पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर एक पॉलिसी बना दी है. भारत और पाकिस्तान के बीच अभी भी कोई बाइलेट्रल सीरीज नहीं होगी. लेकिन अगर कोई इंटरनेशनल या मल्टीलेटरल इवेंट भारत में हो रहा हो, तो पाकिस्तानी प्लेयर्स और टीमें भारत आकर खेल सकेंगी. इसके लिए वीजा एप्लीकेशन के प्रोसेस को भी सरल बनाया जाएगा.
पाकिस्तानी खिलाड़ियों का स्वागत होगा, भारत की स्पोर्ट्स पॉलिसी तय
पॉलिसी का मकसद भारत के खेलों में रिप्रेजेंटेशन पर है. जियो-पॉलिटिक्स की स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत को इंटरनेशनल स्पोर्टिंग इवेंट्स में अच्छा मेजबान बनाया जाए, इस पर भी फोकस होगा.


खेल मंत्रालय ने ये फैसला 5 मई 2026 को लिया. इससे जुड़ा एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है. पॉलिसी का मकसद भारत के खेलों में रिप्रेजेंटेशन पर है. जियो-पॉलिटिक्स की स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत को इंटरनेशनल स्पोर्टिंग इवेंट्स में अच्छा मेजबान बनाया जाए, पॉलिसी इसी बारे में है.
पॉलिसी के दो हिस्से हैंबाइलेट्रल मैचों पर पूरी तरह से रोक
भारत की टीमें पाकिस्तान में कोई मैच खेलने नहीं जाएंगी. और पाकिस्तानी टीमों को भारत में एक-दूसरे के खिलाफ मैच खेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी. इसका मतलब है कि क्रिकेट, हॉकी या किसी भी खेल में दोनों देश आमने-सामने बाइलेट्रल सीरीज नहीं खेल सकेंगे.
इंटरनेशनल इवेंट्स के लिए अलग पॉलिसी
इंटरनेशनल स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन, मसनल ICC, IOC, FIH आदि के नियमों के अनुसार पाकिस्तानी प्लेयर्स भारत में आने वाले बड़े इवेंट्स में हिस्सा ले सकेंगे. T20 वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान के प्लेयर्स को भारत आने की इजाजत नहीं थी. पर इस पॉलिसी के बाद अगर कोई भी ऐसा इंटरनेशनल इवेंट भारत में होता है, तो पाकिस्तानी प्लेयर्स को भारत आने की इजाजत होगी. भारतीय खिलाड़ी भी उन इवेंट्स में खेलेंगे जहां पाकिस्तान की टीमें होंगी.
2029 में भारत में होने वाला क्रिकेट चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की टीम हिस्सा ले सकेगी. 2031 का 50 ओवर वर्ल्ड कप भी भारत में होना है. इसमें भी पाकिस्तान की टीम आ सकेगी. 2030 के Commonwealth Games में भी पाकिस्तान के प्लेयर्स खेल सकेंगे. 2036 ओलंपिक और 2038 एशियन गेम्स होस्ट करने के लिए भारत ने बोली लगाई है. अगर ये भी भारत में होते हैं, तो पाकिस्तान के खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले पाएंगे.
वीजा प्रोसेस आसान होगाखेल मंत्रालय ने वीजा संबंधी समस्याओं को भी सुलझाने का फैसला किया है. खिलाड़ी, टीम अधिकारी, टीम का स्टाफ और इंटरनेशनल फेडरेशन के पदाधिकारियों के लिए वीजा प्रोसेस सरल किया जाएगा. इंटरनेशनल फेडरेशन के अधिकारियों को 5 साल तक के लिए मल्टी-एंट्री वीजा मिल सकेगा. इससे इन इवेंट्स को मैनेज करने में मदद मिलेगी.
पहले पाकिस्तानी या पाकिस्तानी मूल के प्लेयर्स के वीजा में देरी होती थी, जिससे इंटरनेशनल फेडरेशन सवाल उठाते थे. अब सरकार ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पूरे प्रोसेस को आसान किया जाएगा.
क्यों लिया गया ये फैसला?पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान खेल संबंध बहुत खराब हो गए थे. 2025 के एशिया कप और T20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के मैच पर देश में काफी गुस्सा था. पाकिस्तानी हॉकी टीम को बिहार और चेन्नई में इवेंट्स के लिए वीजा दिए जाने पर भी आलोचना हुई थी.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल में नियम साफ हैं. अगर आप बड़े इवेंट होस्ट करना चाहते हैं तो किसी देश के खिलाड़ियों को बाहर नहीं रख सकते. भारत अब खुद को ग्लोबल स्पोर्टिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना चाहता है. इसलिए दो अलग-अलग नीति बनाई गई हैं.
आने वाले महीनों में भारतीय और पाकिस्तानी प्लेयर्स कई बार आमने-सामने होंगे. जुलाई-अगस्त में Commonwealth Games होने हैं. सितंबर-अक्टूबर में Asian Games आयोजित किए जाएंगे. हॉकी में FIH Pro League भी जून में लंदन में होनी है. इसके बाद अगस्त में एम्स्टर्डम में हॉकी वर्ल्ड कप में भी दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगे.
भारत 2030 Commonwealth Games की मेजबानी करेगा. अहमदाबाद में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के अधिकारी भारत की 2036 ओलंपिक बोली की तैयारी देखने आएंगे. क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंट भी भारत में होने वाले हैं. ऐसे में साफ और पारदर्शी नीति जरूरी है. सरकार का कहना है कि हम अपने खिलाड़ियों के हित और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं.
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