दोनों पहले गर्मजोशी से गले मिले. दोनो ने लगभग एक जैसे कपड़े पहन रखे थे. सबसे पहले गाना बजा यूपी की अब बात अलग है यूपी का अब ठाठ अलग है यूपी को ये साथ पसंद है.शुरुआत राहुल गांधी ने की. अखिलेश यादव ने (हम नहीं कहेंगे कि डरते-डरते) राहुल को माइक दे दिया. मगर जब तक राहुल बोलते रहे अखिलेश यादव पेंसिल घुमाते रहे (वैसे इसे नर्वसाने का लक्षण माना जाता है) राहुल ने कहा कि मोदी जी के शब्दों में ये PPP है prosperity, peace, progress (समृद्धि, शांति, तरक्की)
इसमें अखिलेश ने आगे जोड़ा कि देश के प्रधानमंत्री यहीं से निकल जाते हैं. इन तीन P में चौथा P पीपल्स यानी जनता का जोड़ना चाहूंगा. सायकिल के साथ हाथ हो और हाथ के पास सायकिल हो तो रफ्तार कितनी ज़्यादा होगी. हम दोनो रफ्तार के दो पहिए हैं. लाइन में खड़ा करने वालों को जवाब मिलेगा. लाइन में खड़े होकर लोग लाइन में लगने का जवाब देंगे. फिर राहुल ने कहा, मैने पहले ही कहा था अखिलेश अच्छा लड़का है अच्छा काम कर रहा है. बस उसे काम करने नहीं दिया जा रहा है.अखिलेश और मेरा दोस्ती का रिश्ता है. हम नई तरीके की राजनीति करना चाहते हैं. फिर अखिलेश यादव मौज लेते दिखे और बोले. काम बोलता है और काम तो बोल ही रहा है. सर्दी देख ली, गर्मी देख ली बरसात देख ली, घोषणा पत्र भी देख लिया पर अच्छे दिन नहीं दिखे.
राहुल ने पहले गठबंधन न करने की बात पर कहा कि हिस्ट्री बदलती रहती है उस समय गठबंधन गलत था अब सही है. मोदी जी और आरएसएस क्रोध की राजनीति करते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर मायावती की इज़़्ज़त करता हूं.
मायवती पर भी अखिलेश ने हल्के फुल्के ढंग से टिप्पणी की. कहा अब मैं मायावती को बुआ नहीं कहता. वैसे भी उनका चुनाव चिन्ह इतना बड़ा है कि उसके साथ साझा नहीं किया जा सकता.
इसके बाद राहुल गांधी हर बात में गंगा और जमुना का रिफरेंस देते रहे और अखिलेश यादव बाउंसर टाइप सवालों को खुद पर झेलते रहे. अभी तो ये इस गठबंधन की शुरुआत है. आगे देखना रोचक होगा कि प्रियंका गांधी और डिंपल यादव की भी ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है या नहीं. ये भी पढ़ें :














