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गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे मेसी, शरीर विकसित ही नहीं हो रहा था, तब बार्सिलोना ने किया था कमाल

अगर बचपन में बीमारी से जीत नहीं मिलती तो शायद मेसी आज इस मुकाम पर नहीं होते. लेकिन मेसी ने अपनी बीमारी को मात कैसे दी?

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(तस्वीरें- YouTube@talkSPORT और Twitter से साभार हैं.)

अर्जेंटीना के FIFA वर्ल्ड कप जीतने के बाद चारों ओर स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी की चर्चा है. ट्विटर पर मेसी टॉप ट्रेंड्स में हैं. जो फुटबॉल के बारे में नहीं जानते या मैच नहीं देखते, उनकी जुबान पर भी जाने अनजाने मेसी का नाम आ चुका है. फ्रांस के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से जीतकर अर्जेंटीना ने अपने कप्तान मेसी को वर्ल्ड कप का 'तोहफा' दिया. 'फुटबॉल का जादूगर' कहे जाने वाले मेसी को करियर के 18 साल बिताने के बाद वर्ल्ड कप जीतने का सुख मिला है. लेकिन मेसी ने इंटरनैशनल करियर शुरू करने से पहले एक बड़ी जीत हासिल की थी. ऐसी जीत, जो अगर नहीं मिलती तो शायद आज इस मुकाम पर नहीं होते.

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मेसी की बीमारी क्या थी?

लियोनल मेसी बचपन में ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी (GHD) का शिकार थे. एक ऐसी बीमारी जिसमें शरीर का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता है. हाइट सामान्य अनुपात में नहीं बढ़ पाती है. दूसरी तरह की कमियां भी शरीर में रह जाती हैं. मानव शरीर में पिट्यूटरी ग्लैंड (पीयूष ग्रंथि) ग्रोथ हार्मोन रिलीज करता है जिससे बच्चों की हड्डियों और दूसरे हिस्सों का विकास होता है. लेकिन एक लाख में ऐसे 10 से 33 बदकिस्मत बच्चे होते हैं जिनकी बॉडी में ये हार्मोन रिलीज नहीं होता. ऐसी बीमारी के लक्षण तब दिखते हैं जब बच्चे अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में औसतन छोटे दिखते हैं.

मेसी की हाइट अभी 5 फीट 7 इंच है. ये सामान्य कहा जा सकता है. लेकिन बचपन में सामान्य नहीं था. बचपन से फुटबॉल के शौकीन मेसी की इस बीमारी का पता 11 साल की उम्र में चला. द एथेलेटिक की रिपोर्ट के मुताबिक एक डॉक्टर डिएगो वॉर्ज्सटीन ने मेसी के परिवार को बताया था कि उनकी हाइट पिछले कुछ सालों में नहीं बढ़ी है. डॉ डिएगो ने मेसी का इलाज किया था. इसमें हर दिन उन्हें पैर में ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) इंजेक्शन लेना पड़ता था. ये सिलसिला करीब तीन सालों तक चला था.

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वर्ल्ड कप जीतने के बाद लियोनल मेसी (फोटो- Twitter/FIFA)
 
बार्सिलोना क्लब का साथ

ये इलाज काफी महंगा था. करीब 900 डॉलर हर महीने का खर्च. अभी के हिसाब से देखें तो 74 हजार रुपये महीना. अर्जेंटीना के फुटबॉल क्लब 'नेवेल्स ओल्ड बॉयज' ने तब मेसी में दिलचस्पी दिखाई थी. मेसी के पिता उन्हें लेकर उस क्लब में गए. नेवेल्स ने मेसी को रखा, लेकिन जितने पैसे मिल रहे थे वो काफी नहीं थे. इसके बाद मेसी का परिवार 10 हजार किलोमीटर दूर स्पेन के बार्सिलोना क्लब पहुंचा. बार्सिलोना क्लब ने मेसी के इलाज का पूरा खर्च उठाने को तैयार हो गया. मेसी के पैरों पर लंबे समय तक इंजेक्शन के दाग भी रहे थे. इसके बाद जो हुआ सब इतिहास में दर्ज है.

सिर्फ 13 साल की उम्र में बार्सिलोना क्लब से जुड़े मेसी इसकी चर्चा पहले कर चुके हैं. गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में मेसी ने कहा था, 

"मेरे लिए बार्सिलोना पहुंचना मुश्किल नहीं था, क्योंकि मैं जानता था ऐसा मुझे करना ही था. मुझे अपने इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी और सिर्फ बार्सिलोना एकमात्र क्लब था जो मदद के लिए तैयार था. इसलिए जैसे ही उन्होंने मदद की, हम वहां पहुंच गए."

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लड़कपन में ही बार्सिलोना से जुड़ने के बाद पिछले साल तक मेसी इसी क्लब के साथ जुड़े रहे. दोनों का साथ करीब 21 साल तक चला था. मेसी ने साल 2000 में सिर्फ बार्सिलोना के साथ कॉन्ट्रेक्ट साइन किया था. वहीं अपने देश अर्जेंटीना के लिए मेसी कुल 171 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं. खैर, ‘जादूगर’ ने वर्ल्ड कप जीतने के बाद घोषणा की है कि वे रिटायर नहीं हो रहे हैं. 

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