जर्मनी के खेमे में क्या सब ठीक है? 4 बार की चैंपियन टीम इस बार फीफा वर्ल्ड कप में बतौर दावेदार उतरी है. ग्रुप ई के शुरुआती दो मुकाबलों में टीम ने जीत भी दर्ज की. लेकिन, ग्रुप स्टेज के अंतिम मैच में उन्हें इक्वाडोर ने 2-1 से हरा दिया. इस मुकाबले में भी जर्मनी को लेरॉय सेन ने दूसरे मिनट में ही बढ़त दिला दी थी. लेकिन, इसके बाद इक्वाडोर की तरफ से निल्सन एंगुलो ने 9वें मिनट और गोंजालो प्लाटा ने 77वें मिनट में गोल कर टीम को जीत दिला दी.
इक्वाडोर से हार के बाद जर्मन टीम में फूट? कोच और कप्तान के बयानों से उठे सवाल
FIFA World Cup 2026 : कप्तान Joshua Kimmich और कोच Julian Nagelsmann ने अलग-अलग बयान दिए. जर्मनी को इक्वाडोर ने रोमांचक मुकाबले में 2-1 से हरा दिया था. हालांकि, शुरुआत में दूसरे मिनट में ही जर्मनी ने बढ़त बना ली थी. लेकिन, वो इसे बरकरार नहीं रख सके.


इस हार के बाद प्लेयर्स और कोच का अलग-अलग इंटरव्यू हुआ. इसमें जर्मन कोच जूलियन नागल्समैन और कप्तान जोशुआ किमिच अलग-अलग राग अलापते दिखे. डेनिज उनदाव का कोच नागल्समैन से मतभेद नया नहीं है. लेकिन, जोशुआ किमिच और कोच की बातों में कॉन्ट्राडिक्शन ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जर्मनी के खेमे में सब ठीक है?
जर्मनी क्यों हार गई?दरअसल, कुरासाओ और आइवरी कोस्ट को हराकर जर्मनी ने पहले ही राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली थी. ऐसे में इक्वाडोर के खिलाफ मुकाबला उनके लिए डेड रबर ही था. साइकॉलोजिकल बूस्ट के लिए ये मैच उनके लिए अहम था. लेकिन, टीम ने जिस तरह का खेल दिखाया, नॉकआउट स्टेज से पहले कई सवाल खड़े हो गए हैं.
2014 में ब्राजील में अंतिम बार ट्रॉफी उठाने के बाद से जर्मनी के लिए फीफा वर्ल्ड कप कुछ खास नहीं रहा है. टीम को 4 मुकाबलों में जीत मिली है. वहीं, इतने ही मुकाबलों में हार का भी सामना करना पड़ा. यही कारण है कि इस वर्ल्ड कप में मिली पहली हार के बाद सवालिया निशान खड़े हो गए हैं.
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उनदाव ने क्या बताया?नागल्समैन से जब हार के बाद इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि समस्या टैक्टिकल थी. लेकिन, उनदाव और किमिच दोनों की मानें तो इक्वाडोर के प्लेयर्स की जीत की भूख जर्मन प्लेयर्स से कहीं ज़्यादा थी. इसी कारण टीम ये मुकाबला हार गई. उनदाव ने मैच के बाद मजेंटा टीवी से कहा,
कप्तान किमिच क्या बोले?मुझे ऐसा लगा कि उनमें हमसे ज़्यादा जीतने की भूख थी. इक्वाडोर बहुत ज़्यादा एग्रेसिव था. हमें उनसे सीखना चाहिए कि हमें भी अपना सबकुछ दांव पर लगाना चाहिए था. उन्होंने अपना 100% दिया. वो हर चैलेंज में इन्वॉल्व हो रहे थे.
वहीं, कप्तान किमिच का भी यही मानना था. उनके मुताबिक, जर्मनी की टीम से ज़्यादा ये मैच इक्वाडोर जीतना डिजर्व करती थी. उन्होंने कहा,
कोच का क्या है मानना?आज अंतर ये रहा कि हमारी ऑपोनेंट हमसे ज़्यादा जीतना चाहती थी. इसी कारण वो आज जीत गए. वो डिजर्व करते थे.
हालांकि, कोच नागल्समैन का मानना इससे अलग था. उनसे जब इस बारे में पूछा गया कि क्या जर्मन प्लेयर्स से ज़्यादा इक्वाडोर के प्लेयर्स ये मैच जीतना चाहते थे. इसी कारण तो कहीं जर्मनी नहीं हारी. इस पर वो भड़क गए. उन्होंने कहा,
प्लीज ये बकवास बंद कीजिए. हमें अच्छा स्टार्ट मिला. दुर्भाग्यवश गोल स्कोर करने के बाद हमने टैक्टिकल सुसाइड करना शुरू कर दिया. हमारी पोजिशनिंग गलत थी. इक्वाडोर का सबकुछ दांव पर लगा था. लेकिन, मैं ये नहीं मानता कि हमारे प्लेयर्स ने पूरा दम नहीं लगाया. ये बिल्कुल साफ है.
जर्मन मैनेजर और प्लेयर्स के बीच ये मतभेद बहुत सवाल खड़ी करती है. नागल्समैन का मानना था कि टैक्टिकल गलतियों के कारण टीम हार गई. वहीं, उनदाव और किमिच को लगा कि इक्वाडोर की जीतने की भूख जर्मनी से ज़्यादा थी. यही हार का कारण बनी. अब राउंड ऑफ 32 से आगे बढ़ने के लिए जर्मनी को अपने अंदर के मतभेद मिटाने होंगे. क्योंकि उनदाव और नागल्समैन के बीच का रिश्ता किसी से छिपा नहीं है. वो पहले भी एक दूसरे के मत से सहमत नहीं दिखे थे. लेकिन, अगर कोच और कप्तान अलग-अलग राग अलापने लगें तो टीम का बंटाधार तय है.
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