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तो क्रिकेट मैच अब आएंगे फेसबुक, एमज़ॉन पर !

जियो इंटरनेट भी लगा रहा है पूरा ज़ोर

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फोटो - thelallantop

फेसबुक-ट्विटर सेल्फी टांगने और युवा हृदयों की प्रेम-आकांक्षाओं की सर्च का मंच भर नहीं रह गए हैं. अब ये सीधे-सीधे टीवी से टक्कर ले रहे हैं. आईपीएल के प्रसारण का ठेका खरीदने के लिए फेसबुक, ट्विटर, जियो इंटरनेट और एमजॉन भी पिच पर आ गई हैं. बीसीसीआई ने आईपीएल के अगले चरण के प्रसारण का ठेका बेचने के लिए लोगों को बुलाया था, अभी तक कुल 18 पार्टियां आई हैं. इंटरनेट कंपनियों के साथ-साथ टीवी कंपनियां भी दौड़ में हैं. कुल 18 कंपनियों में स्टार, सोनी, जियो और एमज़ॉन सबसे तगड़े दावेदार बताए जा रहे हैं.

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इंटरनेट कंपनियों को क्यों चाहिए क्रिकेट का ठेका

इसके दो कारण हैं. पहला फेसबुक, ट्विटर को पता है कि लोग आपस में एक-दूसरे का स्वाद लेकर कभी न कभी उकता जाएंगे, इसलिए लगातार कुछ नया करते रहना होगा. इन्हें माईस्पेस और ऑरकुट की तरह मारे जाने का डर है. दूसरा, इंटरनेट विस्तार पा गया है. गांव में जो लोग खटिया पर बैठ के ग्रुप चैट करते थे, वो अब इंटरनेट पर ग्रुप बनाकर चैट करने लगे हैं. टीवी पर आने वाला मैच सिर्फ आगे जा सकता है. उसमें धोनी का हेलिकॉप्टर तभी दिखेगा, जब टीवी वाले दिखाएंगे. लैपटॉप पर मैच देखने में दर्शक पीछे जा सकता है, ज्यादा आंकड़े देख सकता है. यानी दर्शक को टीवी और नेट पर मैच देखने को मिले तो वो नेट पर मैच देखना चुनेगा. धीरे-धीरे ‘आओ चलें नेट की ओर’ आंदोलन शुरू होगा, बल्कि हो चुका है. किसी कंपनी के लिए इंटरनेट की ओर जाते भारत में क्रिकेट से बढ़िया क्या हो सकता है?

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कैसे बेचा जाता है क्रिकेट दिखाने का ठेका  बीसीसीआई आईपीएल और भारतीय टीम के घरेलू मैचों के लिए अलग-अलग ठेके निकालती है. प्रसारण अधिकार खत्म होने पर बोली के लिए पार्टियों को आमंत्रित किया जाता है. बीसीसीआई के दफ्तर से 5 लाख रुपए (नॉन रिफंडेबल) जमा करवा के फॉर्म लो और समय से पहले भर के जमा करा दो. ये 5 लाख रुपए वापिस इसलिए नहीं मिलते ताकि सिर्फ गंभीर दावेदार ही मैदान में उतरें. बोली की तारीख आपको बता दी जाती है. इसमें आपकी कंपनी को खेल कवर करने का कितना अनुभव है, जैसी शर्तें रहती हैं.

इससे हमें क्या लेना-देना क्रिकेट बोर्ड की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया प्रसारण अधिकार ही हैं. अगर प्रसारण अधिकार महंगे बिकते हैं तो बोर्ड के पास पैसा आता है, घरेलू क्रिकेट की स्थिति अच्छी होती है, मैदानों की हालत अच्छी होती है. इसका दूसरा असर ये भी हो सकता है कि टीवी पर मैच देखना थोड़ा महंगा हो जाए. और अगर कोई सोशल वेबसाइट अधिकार ले लेती है तो आप फेसबुक या ट्विटर टाइमलाइन पर ही मैच देख सकेंगे. जियो जैसी कंपनी नए ग्राहक बनाने के लिए मुफ्त में लाइव मैच दिखा सकती है.


ट्विटर अमेरिका की नेशनल फुटबॉल लीग के कुछ मैच लाइव दिखाता है
ट्विटर अमेरिका की नेशनल फुटबॉल लीग के कुछ मैच लाइव दिखाता है

कितने का मामला है ये सारा फिलहाल टीवी अधिकार सोनी टीवी और इंटरनेट अधिकार स्टार के पास हैं. सोनी टीवी ने पिछला करार 8200 करोड़ रुपए में किया था. यानी एक आईपीएल मैच दिखाने के लिए सोनी वालों को करीब 14 करोड़ रुपए देने पड़ते हैं. स्टार ने 2014 में इंटरनेट अधिकार 302 करोड़ रुपए में खरीदे थे. पर अबकी बार रिलायंस जियो के आने से इंटरनेट के लिए खूब मारा-मारी होगी. अगर जियो ये ठेका जीत गई तो एकदम से करोड़ों ग्राहक यूं ही मिल जाएंगे. टीम भारत के अंतरराष्ट्रीय मैचों का हिसाब अलग है. एक मैच के 40 करोड़ रुपए देने पड़ते हैं. मैच में अगर बारिश आ जाए या किसी और कारण खेल न हो पाए तो उस हिसाब से पैसे कम कर दिए जाते हैं.

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आईपीएल के टीवी प्रसारण अधिकार 2017-2027 के लिए और इंटरनेट प्रसारण अधिकार 2017-2022 के लिए दिए जाएंगे. टीवी चैनल क्रिकेट सिर्फ दिखाते हैं, बाकि सारी चीज़ बीसीसीआई वाले बनाकर देते हैं, कैमरे-कॉमेंटेटर सब बीसीसीआई वाले तय करते हैं. अगर किसी क्रिकेटर की बीसीसीआई से नहीं छनती है तो भैय्या वो कॉमेंट्री करते हुए नहीं सुनाई देगा.

फिक्सिंग का आईपीएल की कुल कीमत पर कोई असर नहीं पड़ा है. प्रसारण के लिए आगे आई पार्टियों को ये क्लियर कर दिया गया है कि राजकोट और पुणे टीम का भविष्य गड्डमड्ड है. अभी चेन्नई और राजस्थान की टीमें फिक्सिंग के कारण बाहर हैं. रोक हटते ही फिर से आईपीएल शुरू की 8 टीमों के फॉर्मेट में आ जाएगी और ये भी बताया गया है कि अगले 10 सालों में आईपीएल को बढाया भी गया तो भी 10 से ज्यादा टीमें नहीं होंगी.

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