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एक कविता रोज़: हर कोई मुस्कुराता है अपने-अपने अर्थ के साथ

आज एक कविता रोज़ में पढ़िए फ़रीद खां की कविता 'मुस्कुराहटें'.

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फोटो - thelallantop

फ़रीद खां मुंबई में रहते हैं. वैसे पटना से हैं. कविता-कथा के साथ-साथ फिल्म और पटकथा-लेखन से भी जुड़े हैं. आज अपना बर्थ डे मना रहे हैं. लिहाजा रिवाज के मुताबिक उन्हें मुबारकबाद देते हुए आज एक कविता रोज़ में पेश है फ़रीद की एक कविता 'मुस्कुराहटें'...   

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हर कोई मुस्कुराता है अपने-अपने अर्थ के साथ बच्चा मुस्कुराता है तो लगता है वह निर्भय है प्रेमिका मुस्कुराती है तो लगता है उसे स्वीकार है मेरा प्रस्ताव दार्शनिक मुस्कुराता है तो लगता है व्यंग्य कर रहा है दुनिया पर भूखा मुस्कुराता है तो लगता है वह मुक्त हो चुका है और पाने को पड़ी है उसके सामने पूरी दुनिया जब अमीर मुस्कुराता है तो लगता है शासक मुस्कुरा रहा है कि देश की कमजोर नब्ज उसके हाथ में है कि जब भी उसे मजा लेना होगा वह दबा देगा उसे थोड़ा-सा...

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