22 अगस्त 2016. पाकिस्तान टेस्ट मैचों में नम्बर एक टीम बन गयी. रैंकिंग के मामले में. इंग्लैंड की ज़मीन पर जब कदम रखा था तो पिछली पांच सीरीज़ उन्हीं के बस्ते में थीं. वो हारे नहीं थे. और ये पाकिस्तान के लिए एक नयी बात थी. ये उस समय को दोबारा मोड़कर लाने वाली बात थी जब पाकिस्तान क्रिकेट में धौंस जमा के रखता था.
पाकिस्तान की ऊंचाई अचानक नहीं तय हुई थी. और ये ऊंचाई उनके सात फुट के बॉलर इरफ़ान के आने से भी हासिल नहीं हुई थी. ये ऊंचाई उन्हें उनकी परफॉरमेंस के दम पर मिली थी जो मैच-दर-मैच बढ़ती जा रही थी. उनके टूर अच्छे जा रहे थे. वो तैयारी के साथ सीरीज़ में घुस रहे थे. ये सब कुछ एक प्रोसेस में हो रहा था. वो इतने तैयार थे कि ओवल में वो जीते. उस हार से बचकर निकलते हुए जो एक समय पर सामने नज़र आ रही थी.
पाकिस्तान को ये ऊंचाई मिले अरसा हो गया था. पाकिस्तान का इस तरह टेस्ट क्रिकेट खेलना एक आश्चर्य से भर देने वाला एक्सपीरियंस था. एक सुखद आश्चर्य. पाकिस्तान ने सिर्फ अच्छा क्रिकेट खेल रहा था बल्कि पाकिस्तान असल में स्मार्ट क्रिकेट खेल रहा था. पाकिस्तान के साथ ऐसा था कि वो अच्छा खेलने लगते हैं तो आदमी हक्का-बक्का हो जाता है. खराब खेलने लगें तो उनपर हंसा जाता है. पाकिस्तानी टीम ने एक महीना पहले स्पॉट पर रहना एन्जॉय किया. मिस्बाह को आईसीसी ने टेस्ट चैंपियनशिप की गदा देने में एक महीना लगा दिया. उस बीच हर जगह पाकिस्तान के चर्चे थे. उनके पुश-अप्स के चर्चे थे. उस फैसले के चर्चे थे जिसने पुश-अप्स पर बैन लगा दिया था. मगर मिस्बाह को गदा मिली और पखवाड़े के भीतर वो इंडिया के पास चली आई.

और उसके बाद होम सीरीज़. बेहद घटिया परफॉरमेंस. वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़. मगर चूंकि सामने वेस्ट इंडीज़ थी, पाकिस्तान जीत गया. असली डाउनफॉल आया न्यूज़ीलैंड में. तब, जबकि सामने ऑस्ट्रेलिया था. पाकिस्तान की परफॉरमेंस उस तरह से चल रही थी जैसे चुम्बक के दो ध्रुव एक साथ वजूद में रहते हैं. वो दोनों कभी मिलते नहीं. मगर रहते साथ में ही हैं. पाकिस्तान लगभग 490 चेज़ कर ले गया था. ब्रिस्बेन में. वहीं पूरी टीम दो सेशन भी नहीं टिक पाई और एक इनिंग्स की हार खानी पड़ी. मेलबर्न में. उधर पाकिस्तान के डाउनफॉल के एक ही नहीं कई रीज़न हैं.
मोहम्मद आमिर. 10 मैचों में 30 विकेट. ये आंकड़ा तब तक सही नहीं लगता है जब तक ये न बताया जाए कि इसके अलावा उसकी गेंदों पर 12 कैच भी छूटे हैं. मोहम्मद आमिर ने टेस्ट क्रिकेट में दूसरी इनिंग्स से ठीक पहले चार साल तक एक भी गेंद नहीं फेंकी थी. उसके बाद आते ही वो पाकिस्तान टीम का मेन बॉलर बन गया. टिस पर एक दर्जन कैच जो मिट्टी में गिरा दिए गए. आमिर में वो अग्रेशन मिसिंग लगता है जो एक टीनेज आमिर में कभी दिखता था. ये या तो बदली हुई हेयर स्टाइल की वजह से था या उसकी शादी. या हो सकता है क्रिकेट से अलग बिताये टाइम का असर हो.

पाकिस्तान का असल में एक ही हाई पॉइंट था. और वो था इंग्लैंड के खिलाफ़ ओवल में टेस्ट मैच. वो एक मैच ऐसा था जहां किसी भी बेकार टेस्ट परफॉरमेंस को छुपाया जा सकता था. वहां को भी उसपर ध्यान भी नहीं देता. क्यूंकि ओवल में जो क्रिकेट पाकिस्तान ने खेला वो बेहद शानदार था. ऐसी पेस बॉलिंग जो सालों से पाकिस्तान की तरफ से नहीं देखि गयी थी. (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ वहाब का स्पेल एक कम्पटीशन हो सकता है.) बैटिंग में भी यूनिस खान चमक के निकले. 200 मारे. असद शफीक ने पूरी तरह से एक एंड पकड़े रक्खा. हालत ये हुई कि दूसरी इनिंग्स में पकिस्ता को मात्र 40 रन बनाने को मिले. 13 ओवर में वो काम हो गया. और उसपर भी नायब दिन. 14 अगस्त. पाकिस्तान का जन्मदिन.
2017 में क्या हो सकता है
मिस्बाह टीम से गायब दिख सकते हैं. मिस्बाह की जगह कौन भरेगा, मालूम नहीं. धोनी और मिस्बाह का जाना शायद 2017 का क्रिकेट की फ़ील्ड में एक बहुत बड़ा चेंज होगा. सरफ़राज़ अहमद शायद एक नाम हो सकते हैं. अज़हर अली की परफॉरमेंस उन्हें बैक नहीं करती.

पाकिस्तान के लिए 2017 की शुरुआत पहली परीक्षा होगी. ये वो समय है जब वो अर्श से गिरकर फर्श पर पहुंच गए हैं. और अब उन्हें यहां उठने की कोशिश करनी होगी. एकदम वैसे जैसे एक बच्चा नया नया चलना शुरू करता है. आगे एक टूर वेस्ट इंडीज़ का है. ये वो ज़मीन है जहां उन्होंने एक भी टेस्ट सीरीज़ नहीं जीती है. भले ही आज वो एक खराब कंडीशन में हैं लेकिन फिर भी वो फेवरिट ही होंगे. वेस्ट इंडीज़ की स्थिति असल में पाकिस्तान से भीज ज़्यादा गंभीर है. हालांकि दबी जुबान में इंडिया के टूर की भी बातें हो रही हैं लेकिन उसके बारे में उतना ही सोचा जाए जितना मंगल पर बंगला बनाने के बारे में तो बेहतर होगा.