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चारा काटने से लेकर वेटलिफ्टिंग तक, हरजिंदर कौर ने ऐसे जीता सिल्वर मेडल

हरजिंदर कौर ने इस बार अपने प्रदर्शन में कोई कमी नहीं छोड़ी. आप अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि उन्होंने अपनी तीनों ही कैटेगरी में पर्सनल बेस्ट किया है.

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वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भारत को सातवां मेडल दिलाया. (Photo-PTI)

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  • हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल से सिल्वर मेडल हासिल किया, जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनल बेस्ट स्कोर 227 किलोग्राम का भार उठाया।
  • हरजिंदर कौर को कलाई और कमर के दर्द के बावजूद डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर ट्रैनिंग जारी रखी, क्योंकि यह साल कॉमनवेल्थ और एशियाई गेम्स के लिहाज से अहम था।
  • सिल्वर मेडल जीतने के बाद हरजिंदर कौर की उपलब्धि से भारतीय वेटलिफ्टिंग को फायदा होगा और उनके अगले चैंपियनशिप प्रदर्शन पर निगाहें टिकेंगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में भारत के मेडल आने का सिलसिला जारी है. इस लंबी लिस्ट में एक नया नाम शामिल हुआ है.  नाम है हरजिंदर कौर. वह खिलाड़ी जिन्होंने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता लेकिन इस बार उसे सिल्वर में बदल दिया. लेकिन इस सिल्वर मेडल के लिए हरजिंदर कौर को बहुत दर्द सहना पड़ा. बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा.  यहां तक कि अपने डॉक्टर के भी खिलाफ चली गई. यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि वह इस बार उन्हें किस्मत नहीं मेहनत के दम पर मेडल चाहिए.

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ब्रॉन्ज को सिल्वर में बदला

आपको बता दें कि 4 साल पहले हरजिंदर ने 71 किलोग्राम कैटेगरी में हिस्सा लिया था. यह उनका कॉमनवेल्थ डेब्यू था. वह आखिरी लिफ्ट तक चौथे स्थान पर थीं. हालांकि पूरे इवेंट में टॉप पर रहने वाली नाइजीरिया की खिलाड़ी क्लीन एंड जर्क में कोई क्लीन लिफ्ट नहीं कर सकीं और चौथे स्थान से हरजिंदर तीसरे स्थान पर पहुंच गई.

हरजिंदर कौर ने इस बार अपने प्रदर्शन में कोई कमी नहीं छोड़ी. आप अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि उन्होंने अपनी तीनों ही कैटेगरी में पर्सनल बेस्ट किया है. उन्होंने सबसे पहले स्नैच में 101 किलोग्राम का भार उठाया जो कि उनका पर्सनल बेस्ट है. इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम का भार उठाया. यह भी उनका पर्सनल बेस्ट है. वहीं उन्होंने 227 किलोग्राम का भार उठाया और यह कुल स्कोर भी उनका पर्सनल बेस्ट है.

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दर्द के साथ की ट्रेनिंग

हरजिंदर जब वेट उठा रहीं थीं तब उन उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी लेकिन इसके पीछे काफी दर्द छुपा था. दरअसल काफी समय से हरजिंदर कौर को अपनी कलाई और अपनी कमर में दर्द की परेशानी थी. वह लगातार इससे जूझ रही थी. इस साल की शुरुआत में उन्होंने डॉक्टर के पास जाने का फैसला किया. डॉक्टर ने सलाह दी कि वह जितना हो सके आराम करें. लेकिन यह साल वेटलिफ्टिंग के लिहाज से अहम है.  इस साल कॉमनवेल्थ और एशियाई गेम्स होने वाले हैं.  हरजिंदर और उनके भाई ने मिलकर फैसला किया कि वह डॉक्टर की सलाह नहीं मानेंगे. उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखेंगे. इस साल हुई एशियाई चैंपियनशिप में  हरजिंदर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसी ब्रॉन्ज ने उनकी कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह भी पक्की कर दी.

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कौन हैं हरजिंदर कौर?

हरजिंदर कौर पंजाब के नाभा के महेश गांव की रहने वाली हैं. उनके खेल की शुरुआत वेट लिफ्टिंग से नहीं बल्कि कबड्डी से हुई थी. वह स्कूल में कबड्डी खेलती थीं और रस्सी खींच भी.  उनके कोच परविंदर शर्मा ने देखा कि हरजिंदर की मसल पावर बहुत अच्छी थी. हरजिंदर ने बताया था कि वह घर पर चारा काटने की मशीन पर काम करतीं थी. इस मशीन में दो लोहे के पहियों को घुमाना होता था. इसी से उनकी मसल पावर पढ़ी. इसी कारण वेटलिफ्टिंग की शुरुआत में उन्हें मुश्किल नहीं हुई. उन्होंने कबड्डी छोड़ और वेट लिफ्टिंग में ट्रेनिंग करना शुरू किया. 2022 में अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता लेकिन अब इस सिल्वर में बदलकर उम्मीद जगा दी है कि अब गोल्ड दूर नहीं है.

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