कॉमनवेल्थ गेम्स में इस साल बहुत कम खेलों को जगह मिली है. भारत ने इन गेम्स में सबसे बड़ा दल एथलेटिक्स में भेजा है. भारत के 43 एथलीट्स हिस्सा ले रहे हैं. कई इवेंट्स हो चुके हैं. कुछ बचे हैं. परेशानी यह है कि भारत को एथलेटिक्स में अब तक एक ही मेडल मिला है और तीन खिलाड़ी चोट की चपेट में नजर आ रहे हैं. लेकिन ऐसा क्यों? क्या यह केवल खिलाड़ियों की गलती है या फिर इसमें फेडरेशन भी दोषी है?
CWG में क्यों चोटिल हो रहे हैं भारतीय एथलीट? एशियाड से पहले बढ़ी मुश्किल
भारत को एथलेटिक्स में अब तक एक ही मेडल मिला है, लेकिन उसके तीन खिलाड़ी चोट की चपेट में नजर आ रहे हैं. क्या यह केवल खिलाड़ियों की गलती है या फिर इसमें फेडरेशन भी दोषी है?

सबसे पहले बात गुरिंदरवीर की. 100 मीटर के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर कॉमनवेल्थ गेम्स में हीट्स से आगे नहीं बढ़ पाए. जेम्स हिलियर ने बताया कि वह चोटिल थे. पूरी फिटनेस के बिना ही वह खेलने उतर गए. इस कारण अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाए.
वहीं तेजस शिरसे की बात करें तो उन्होंने 110 मीटर हर्डल के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया था. शिरसे भी अपने इवेंट के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं , ऐसे में उनसे काफी उम्मीदें थीं. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. वह फाइनल में आठवें स्थान पर रहे. रेस खत्म होने के बाद असहज दिखे. बाद में बताया गया कि वह चोटिल हो गए. वहीं देर रात हाई जंप में भी ऐसा ही कुछ नजर आया. इस इवेंट मौजूदा नेशनल रिकॉर्ड होल्डर और पूर्व नेशनल रिकॉर्ड होल्डर तेजस्विन शंकर भी थे. तेजस्विन ने एक जंप लिया और फिर रिटायर हर्ट हो गए. उन्होंने बाद में बताया कि उनके घुटने में दिक्कत हो रही थी.
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड बने मुश्किलइसका एक कारण खिलाड़ियों का क्वालिफिकेशन शेड्यूल है. आपको बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को 32 इवेंट्स का कोटा मिला था. एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफिकेशन स्टैंटर्ड तय किए. यह स्टैंटर्ड काफी मुश्किल थे. 17 इवेंट्स में नेशनल रिकॉर्ड को मानक रखा गया था. वहीं कई इवेंट्स ऐसे थे जिनमें खिलाड़ियों को मेडल के लिए अपना पर्सनल बेस्ट करना पड़ा. इसके लिए खिलाड़ियों ने खुद को काफी पुश भी किया. कई बार ज्यादा पुश करने के बाद रिजल्ट तो आ जाते हैं लेकिन अक्सर खिलाड़ी चोटिल भी हो जाते हैं.
यह भी पढ़ें- 'शराबी पति रातभर पीटता था', गोल्ड मेडल जीतने वाली शर्मिला की कहानी
इसका दूसरा कारण है शेड्यूल. एथलेटिक्स फेडरेशन के मुताबिक केवल कुछ ही ऐसे टूर्नामेंट थे जिनमें खिलाड़ी यह क्वालिफिकेशन स्टैंटर्ड हासिल करके जगह बना सकता है. कुछ टूर्नामेंट्स बैक टू बैक थे और उनमें हिस्सा लेना अनिवार्य था. लगातार टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने से खिलाड़ियों को रिकवरी का मौका नहीं मिलता. थके हुए शरीर में चोटिल होने का रिस्क बहुत ज्यादा रहता है. यहां थकान भी एक कारण हो सकती है.
रिकवरी के लिए नहीं मिला समयभारत के लिए टेंशन की बात यह है कि अब खिलाड़ियों के पास रिकवरी के लिए समय कम है. सितंबर महीने में एशियन गेम्स होने हैं. यहां भारतीय एथलीट्स से बड़ी संख्या में मेडल लाने की उम्मीदें हैं. ऐसे में जो खिलाड़ी इस समय चोटिल हैं अगर वह पूरी तरह फिट नहीं होते हैं, तो कॉमनवेल्थ के बाद एशियन गेम्स में भी मेडल टैली पर असर दिख सकता है.
साथ ही खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड के लिए अपना पीक हासिल किया. महज तीन महीने में दो बड़े टूर्नामेंट्स के लिए अपना पीक हासिल करना खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती होगी. खासतौर पर तब जब वह महज क्वालिफाई करने के लिए ही अपना सीजन बेस्ट कर चुके हैं.
वीडियो: इंग्लैंड के खिलाफ रोहित शर्मा खेलेंगे वनडे करियर का आखिरी मैच?









