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अपनी इस हरकत पर क्या सफाई देंगे, 'खेल की शुद्धता' से समझौता करने वाले कोहली?

BCCI तो बोर्ड ऑफ कॉनफ्लिक्ट बनता जा रहा है.

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Conflict Of Interest में फंसते दिख रहे हैं Virat Kohli (फाइल फोटो)
विराट कोहली. टीम इंडिया के कैप्टन. बीते दशक के बेस्ट क्रिकेटर. इनके साथ कोहली की एक और पहचान है- स्मार्ट इनवेस्टर. ब्रांड कोहली ने तमाम प्रोडक्ट्स का प्रचार करने के साथ कई कंपनियों में इनवेस्ट भी कर रखा है. अब ऐसे ही एक मामले के चलते वह 'हितों के टकराव' के लपेटे में आते दिख रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोहली को फरवरी 2019 में गैलेक्टस फनवेयर टेक्नॉलजी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने 33.32 लाख रुपये के बदले कम्पलसरी कन्वर्टेबल डेबेन्चर्स (CCD) दिए थे. कोहली को 10 रुपये की फेस वैल्यू वाली 68 CCD दी गई थी. हर CCD के प्रीमियम के तौर पर कोहली ने 48,990 रुपये (कुल 33.32 लाख) चुकाए थे. 10 साल के बाद यह CCD इक्विटी शेयर्स में बदल जाएंगी. यानी 68 CCD के बदले कोहली के पास 68 शेयर होंगे. जिसके बाद कोहली इस कंपनी में 0.051 परसेंट के हिस्सेदार हो जाएंगे. अब आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि CCD होती क्या है. माना मेरी एक कंपनी है. जिसको बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है. लेकिन इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए मुझे बहुत सारे पैसों की जरूरत होगी. इसके लिए मैं तीन तरीकों से पैसे जुटा सकता हूं. उधार लेकर. अपनी कंपनी में किसी को हिस्सेदारी देकर और तीसरा चैरिटी मांगकर. तीसरा वाला प्रैक्टिकल नहीं है. अगर उधार लिया तो मुझे प्रॉफिट-लॉस से इतर उसे पैसे वापस करने होंगे और वो भी ब्याज के साथ. इस तरीके के उधार को डेबेन्चर कहते हैं. अब यहां पर अगर पैसे देने वाला मुझसे कहे कि उधार ले लो और बदले में कंपनी में हिस्सा दे देना. तो ये हुई इक्विटी. लेकिन CCD ऐसी व्यवस्था है जिसमें लिया गया उधार आगे चलकर हिस्सेदारी में बदल जाता है. # फंसेंगे कोहली? कोहली को यह CCD देने वाली कंपनी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) की मालिक है. गैलेक्टस अप्रैल 2018 में सिंगापुर में रजिस्टर हुई कंपनी M-लीग प्राइवेट लिमिटेड की सब्सिडरी है. 17 नवंबर, 2020 को BCCI ने MPL स्पोर्ट्स को इंडियन क्रिकेट टीम का नया किट स्पॉन्सर और ऑफिशल मर्चेंडाइज पार्टनर बनाया. तीन साल के इस कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, सीनियर पुरुष, महिला और अंडर-19 टीमें अब MPL लिखी जर्सियां पहनेंगी. मौजूदा ऑस्ट्रेलिया टूर से यह कॉन्ट्रैक्ट शुरू हुआ है. टीम इंडिया की जर्सियों पर अब MPL स्पोर्ट्स का लोगो है. MPL स्पोर्ट्स MPL की सहायक कंपनी बताई जा रही है. विराट कोहली जनवरी 2020 से MPL के ब्रांड अम्बेसडर हैं. एक्सप्रेस के मुताबिक, इसी जनरल मीटिंग में गैलेक्टस ने कॉर्नरस्टोन स्पोर्ट LLP को 16.66 लाख में 34 CCD दी थी. कॉर्नरस्टोन के CEO अमित अरुण सजदेह दो अन्य लिमिटेड फर्म मैगपाई वेंचर पार्टनर्स LLP और विराट कोहली स्पोर्ट्स LLP में कोहली के पार्टनर हैं. इतना ही नहीं. कॉर्नरस्टोन स्पोर्ट एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, जिसके डायरेक्टर अमित सजदेह हैं. कोहली, KL राहुल, ऋषभ पंत, उमेश यादव, रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और शुभमन गिल जैसे प्लेयर्स के कॉमर्शियल राइट्स भी मैनेज करती है. इस मामले पर जब एक्सप्रेस ने सजदेह से सवाल किया तो उन्होंने कहा,
'मैंने यह कई बार कहा है कि विराट और कॉर्नरस्टोन जहां चाहें इन्वेस्ट करने के लिए स्वतंत्र हैं. जब तक कोहली कॉर्नरस्टोन में इन्वेस्ट नहीं करते, कोई टकराव नहीं होगा.'
इस मामले में एक टॉप BCCI सोर्स ने कहा कि बोर्ड को MPL में कोहली और कॉर्नरस्टोन के इन्वेस्टमेंट की जानकारी नहीं थी. सोर्स ने कहा,
'हमसे प्लेयर्स की इन्वेस्टमेंट ट्रैक करने की उम्मीद नहीं की जा सकती.'
इसी मसले पर एक और ऑफिशल ने कहा,
'कोहली भारतीय क्रिकेट के एक बड़े किरदार हैं और ऐसे इंटर-कनेक्शन गुड गवर्नेंस के लिए आइडल नहीं हैं.'
बात नियमों की करें तो BCCI के संविधान में कॉमर्शियल कॉन्फ्लिक्ट का ज़िक्र है. इसके मुताबिक,
'जब भी कोई व्यक्ति किसी थर्ड पार्टी के साथ किसी विज्ञापन या अन्य प्रोफेशनल एंगेजमेंट में जाता है, जिसके चलते उस व्यक्ति की खेल के साथ की पहली प्राथमिकता पर असर पड़े. या फिर ऐसी समझ बने कि खेल की शुद्धता से समझौता हो रहा है. तो यह कॉमर्शियल कॉन्फ्लिक्ट में आता है.'
हितों में टकराव के मामले में अभी बोर्ड प्रेसिडेंट सौरव गांगुली पर भी उंगली उठी थी. वह लगातार बोर्ड के मुख्य स्पॉन्सर्स की विरोधी कंपनियों के विज्ञापन कर रहे हैं. इस मसले पर गांगुली ने अभी तक कोई सफाई नहीं दी है. देखने वाली बात होगी कि कोहली इन ख़बरों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.

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