टीम इंडिया आयरलैंड और इंग्लैंड में बुरी तरह एक्सपोज हो गई. टीम सिर्फ सीरीज नहीं हारी, ये भी पता चल गया कि प्लेयर्स पूरी तरह से फिट नहीं हैं. इंजरी आम बात हो गई है. यहां तक कि मैदान पर भी प्लेयर्स को बार-बार क्रैम्प्स आ रहे हैं. हर सीरीज से पहले कोई न कोई अहम प्लेयर इंजरी के कारण बाहर हो रहा है.
टीम इंडिया की फिटनेस को लेकर BCCI ने बदल दिए सारे पैरामीटर!
BCCI New Fitness Rules : आयरलैंड और इंग्लैंड में टीम इंडिया की फिटनेस एक्सपोज हो गई थी. अब इसे लेकर BCCI ने सख्त नियम बना दिए हैं. BCCI सचिव ने फिजियो की भी जमकर क्लास लगाई है.

श्रीलंका दौरे पर भी जसप्रीत बुमराह समेत कई अहम प्लेयर्स इंजरी के कारण शामिल नहीं हैं. इसे लेकर अब BCCI काफी सीरियस हो गया है. बोर्ड ने फिटनेस टेस्ट के तरीके और पैरामीटर्स दोनों में बड़े बदलाव कर दिए हैं. साथ ही ये स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी को भी इससे छूट नहीं दी जाएगी. ये फिटनेस टेस्ट क्या हैं और क्यों इनके पैरामीटर्स बदले गए? ये विस्तार से समझते हैं.
अब क्या होंगे नए मानक?पिछले साल सोहम देसाई की जगह एड्रियन ले रॉक्स ने टीम इंडिया के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच का पद संभाला था. ले रॉक्स के आते ही फिटनेस जांचने का तरीका बदल गया. मशहूर यो-यो टेस्ट की जगह ब्रोंको टेस्ट को लाया गया.
ब्रोंको टेस्ट मुख्य रूप से फुर्ती नापने का टेस्ट है. लेकिन, इसमें एक बड़ी समस्या थी. इसका कोई फिक्स टाइम नहीं तय किया गया था. हालांकि, अब इसे पास करने के लिए 5.15 से 5.20 मिनट में पूरा करना होगा. यही नया बेस पैरामीटर है.
इसके अलावा, 2K रनिंग टेस्ट को भी इंट्रोड्यूस किया गया है. इसमें प्लेयर्स को 9 से 10 मिनट में 2 किलोमीटर दौड़ना होगा. पहले बेसिक यो-यो टेस्ट क्लियर करने का मार्कर 16.5 था.
किसी को नहीं मिलेगी छूटTOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल CoE (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) ने जो पैरामीटर सेट किए थे, उसमें एक बड़ी गड़बड़ी थी. पता चला है कि कुछ सीनियर प्लेयर्स को टेस्ट पास करने के लिए आसान टारगेट दिए जाते थे.
नतीजा? मैदान पर खिलाड़ियों की फुर्ती कम हो गई है. सीनियर बैटर्स विकेटों के बीच दौड़ने में स्ट्रगल कर रहे हैं. इसके कारण टीम में सुस्त फील्डर्स की भी गिनती बढ़ गई है. खबर है कि इसे लेकर BCCI सचिव देवजीत सैकिया और टीम मैनेजमेंट ने फिजियो कमलेश जैन की जमकर क्लास लगाई है.
कमलेश को साफ हिदायत दी गई है कि किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी. चाहे उस प्लेयर का कद टीम में कितना भी बड़ा हो. अगर फिटनेस को लेकर कुछ भी इशू होता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करना होगा.
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टीम मैनेजमेंट CoE से खुश नहींअब ये भी समझ लेते हैं कि क्यों ये बदलाव करने पड़े. टीम इंडिया के पेसर जसप्रीत बुमराह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हो चुके हैं. वॉशिंगटन सुंदर भी पहले टेस्ट के लिए फिट नहीं हैं. हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी भी फिटनेस के कारण टीम से बाहर चल रहे हैं. कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर इस इंजरी लिस्ट को देख फ्रस्ट्रेट हो गए हैं. टीम मैनेजमेंट का मानना है कि बार-बार प्लेयर्स की इंजरी के कारण सही प्लेइंग XI चुनना भी मुश्किल हो गया है.
साथ ही बुमराह को लेकर भी टीम मैनेजमेंट CoE से खुश नहीं है. पहले उन्हें ये भरोसा दिया गया था कि बुमराह पहले टेस्ट तक फिट हो जाएंगे. लेकिन इंजेक्शन और रिहैब के बावजूद वह समय पर फिट नहीं हो सके.
हर्षित राणा के केस ने तो CoE के काम करने के तरीके पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. हर्षित को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे T20I से पहले चोटिल मानकर वापस भेज दिया गया था. लेकिन, बाद में पता चला कि उन्हें चोट नहीं लगी थी, बल्कि क्रैम्प्स हुए थे. साथ ही उनका वेट भी तय सीमा से ज्यादा था.
सूत्रों के अनुसार, सेलेक्शन के समय उनका वजन 97 केजी था. CoE ने बाद में उनकी अधिकतम वेट सीमा 96 केजी तय की. फिलहाल उनका वेट 94 केजी है. अगले सप्ताह उन्हें फिटनेस क्लीयरेंस मिलने की उम्मीद है. यानी खिलाड़ी को पहले फिट घोषित किया गया और बाद में वजन पर सवाल उठे.
प्लेयर्स और CoE के बीच कॉम्युनिकेशन गैपरिपोर्ट के मुताबिक, प्लेयर्स और CoE के बीच भी काफी कॉम्युनिकेशन गैप नज़र आ रहा है. हाल ही में श्रीलंका टूर पर रवाना होने से पहले मोहम्मद सिराज समेत कई रेगुलर प्लेयर्स को अचानक नए फिटनेस टेस्ट देने पड़े. हैरानी की बात यह है कि उन्हें पहले से इन पैरामीटर्स की पूरी जानकारी ही नहीं थी. हालांकि, अब सभी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले प्लेयर्स को नए पैरामीटर लिखित रूप से सौंप दिए गए हैं.
2023 ODI वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में BCCI का इंजरी मैनेजमेंट शानदार था. तब फोकस खिलाड़ियों को चोट से बचाने पर था. हर प्लेयर के वर्कलोड के हिसाब से कस्टमाइज्ड प्लान था. लेकिन, अब रणनीति पूरी तरह से बदल गई है. अब खिलाड़ियों पर 2K टेस्ट, ब्रोंको टेस्ट और यो-यो टेस्ट जैसे मुश्किल टेस्ट थोपे जा रहे हैं. इस एक्सट्रीम फिटनेस प्रोग्राम ने प्लेयर्स पर बर्नआउट का खतरा भी बढ़ा दिया है.
लेकिन, समस्या ये है कि टीम इंडिया के सामने श्रीलंका टेस्ट सीरीज, न्यूजीलैंड दौरा, एशियन गेम्स और फिर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जैसी बड़ी चुनौतियां हैं. ऐसे में बोर्ड अब फिटनेस को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहता.
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