भारतीय फुटबॉल टीम, कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हर्ष सिंह, भारत की नंबर वन टेनिस खिलाड़ी वैष्णवी अडकर, महिला रोअर्स, यह उस लंबी लिस्ट के चुनिंदा नाम हैं, जो कि इस बार एशियन गेम्स में नजर नहीं आएंगे. इन सबके भारतीय दल से बाहर होने का एक ही कारण है. खेल मंत्रालय की एशियन गेम्स सेलेक्शन पॉलिसी. पूर्व वर्ल्ड नंबर वन टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना समेत कई खिलाड़ियों ने इस पॉलिसी की आलोचना की है. इसे खिलाड़ियों के लिए गलत बताया है. आखिर इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है? आपको विस्तार से बताते हैं.
एशियन गेम्स सेलेक्शन पॉलिसी को लेकर सरकार से क्यों नाराज हैं एथलीट्स?
पूर्व वर्ल्ड नंबर वन टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना समेत कई खिलाड़ियों ने सरकार की एशियन गेम्स सिलेक्शन पॉलिसी की आलोचना की है. इसे खिलाड़ियों के लिए गलत बताया है. आखिर इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है. आपको बताते हैं.

सबसे पहले जानते हैं कि यह पॉलिसी है क्या और इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, खेल मंत्रालय चाहता है कि केवल वही खिलाड़ी एशियन गेम्स खेलने जाएंगे जो वाकई में इसके दावेदार हैं. खेल मंत्री मंसुख मांडविया ने साफ शब्दों में कहा कि एशियन गेम्स एक्सपोजर टूर नहीं है. वह खिलाड़ियों को सिर्फ अनुभव देने के लिए नहीं भेजेंगे. खिलाड़ी मेडल के दावेदार हैं या नहीं, यह तय करने के लिए सेलेक्शन पॉलिसी बनाई गई. इसमें इंडिविजुअल गेम्स और टीम गेम्स के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं.
1. व्यक्तिगत स्पोर्ट्स
एथलेटिक्स, स्वीमिंग जैसे खेलों में खिलाड़ी को ऐसा प्रदर्शन (टाइमिंग) करना होगा, जो पिछले एशियन गेम्स में 6वें स्थान पर रहने वाले प्रदर्शन के बराबर या उससे बेहतर हो.
वहीं जिन इवेंट्स को मेजर नहीं किया जा सकता, उनके नियम अलग हैं. इसके लिए जरूरी है कि पिछले 12 महीनों में हुए सीनियर एशियन चैंपियनशिप में कम से कम छठा या उससे बेहतर स्थान हासिल किया हो. या फिर एशियाई देशों के बीच टॉप 6 में होना जरूरी है.
2. टीम स्पोर्ट्स
टीम स्पोर्ट्स के लिए यहां टॉप 8 का नियम बनाया गया है. फुटबॉल, हॉकी जैसे गेम्स और रिले, डबल्स, मिक्स्ड डबल्स जैसे टीम इवेंट्स में जरूरी है कि पिछले 12 महीनों में हुए सीनियर एशियन चैंपियनशिप में टॉप 8, या एशियाई देशों के बीच इंटरनेशनल रैंकिंग में टॉप 8 में रहना जरूरी है.
सभी स्पोर्ट्स फेडरेशंस ने अपनी तरफ से लिस्ट बनाकर खेल मंत्रालय को दी थी. अपनी पॉलिसी को आधार बनाकर खेल मंत्रालय ने कई खिलाड़ियों का नाम लिस्ट से हटा दिया. इसी के बाद विवाद शुरू हुआ. पहले आपको बताते हैं कि किन खेलों पर इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा असर हुआ?
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किन खेलों पर हुआ असरटेनिस
इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा असर टेनिस पर दिखा. टेनिस फेडरेशन ने एशियन गेम्स के लिए 12 खिलाड़ियों का चयन किया था. हालांकि, फाइनल लिस्ट में केवल 7 लोगों को ही चुना गया. जो लोग बाहर हुए हैं, उनमें भारत की नंबर वन महिला खिलाड़ी वैष्णवी अडकर और नंबर 2 सहजा यमलापल्ली का नाम शामिल हैं. सरकार के इस फैसले को लेकर ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की थी. वहीं, रोहन बोपन्ना ने लंबा पोस्ट लिखकर फैसले को गलत बताया था. उनका कहना था कि इस तरह के नियम खिलाड़ियों की प्रतिभा को मापने का सही पैमाना नहीं है.
फुटबॉल
भारतीय पुरुष और महिला फुटबॉल टीमें भी एशियन गेम्स में नहीं जाएंगी, जबकि दोनों ही टीमों ने इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया था. भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम इस समय एशियन रैंकिंग में टॉप 8 में नहीं है, जो कि खेल मंत्रालय की पॉलिसी के लिए अहम है. इसी वजह से खेल मंत्रालय ने दोनों टीमों को न भेजने का फैसला किया है.
जूडो
जूडो फेडरेशन ने भी अपनी तरफ से 12 खिलाड़ियों की लिस्ट दी थी. खेल मंत्रालय ने इसमें से केवल तीन को ही फाइनल लिस्ट में जगह दी है. बाहर हुए खिलाड़ियों में हर्ष सिंह भी शामिल हैं. हर्ष ने हाल ही में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 60 किलोग्राम वर्ग में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था. वहीं, इन्हीं खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली उन्नति शर्मा को भी जगह नहीं मिली है. हर्ष ने इस फैसले पर निराशा जताई. उनका कहना था कि उन्होंने एशियन गेम्स के लिए काफी मेहनत की थी. उन्हें इस बड़े मौके का इंतजार था.
रोइंग
रोइंग फेडरेशन ने भी जो प्रस्तावित टीम भेजी, उसमें से चार महिला खिलाड़ियों को एशियन गेम्स में जगह नहीं मिली. सुमन देवी, दिलजोत कौर, भारती देवी और प्रिया देवी को एशियन गेम्स पॉलिसी का नाम लेकर बाहर किया गया. फेडरेशन ने अपने खिलाड़ियों का समर्थन किया और कहा कि सरकार पुराने परिणामों की तर्ज पर फैसला कर रही है. इन चारों ने हाल ही में इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में मेडल जीते हैं. ऐसे में उन्हें बाहर नहीं किया जाना चाहिए.
जो खिलाड़ी बाहर हुए, उन्होंने अपनी फेडरेशंस के साथ मिलकर इस पॉलिसी का विरोध किया. लेकिन, खेल मंत्रालय ने साफ कर दिया कि वह दबाव में आकर पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं करेंगे. सरकार ने साफ किया कि उन्होंने कई मुद्दों पर विचार करने के बाद यह पॉलिसी बनाई है.
सरकार का क्या है पक्ष?सरकार का कहना है कि वह केवल दल की संख्या बढ़ाने के लिए खिलाड़ियों को नहीं भेजेगा. वह चाहती है कि जो भी खिलाड़ी जाए, वह मेडल के लिए दावेदारी पेश करे. एशियन गेम्स एक बड़ा मंच है, और इसे एक्सपोजर टूर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. सरकार के मुताबिक, वह ऐसा बेंचमार्क बना रहे हैं जिसमें ट्रांसपेरेंसी हो, और इसके जरिए सही दावेदारों को ढूंढा जाएगा. इसी कारण सरकार ने एशियन गेम्स के लिए TOPS (Target Olympics Podium Scheme) से इतर TAGG (Target Asian Games Group) पॉलिसी बनाई थी.
इस पॉलिसी के तहत एशियन गेम्स में मेडल के दावेदारों को अलग से इस पॉलिसी में शामिल किया गया. हालांकि, इन खिलाड़ियों को भी सेलेक्शन पॉलिसी से गुजरना पड़ा और कई नाम जगह नहीं बना पाए. पॉलिसी में पैसे और सरकारी रिसोर्स की भी बात की गई है. सरकार के खर्च पर वही एथलीट्स, कोच और सपोर्टिंग स्टाफ एशियन गेम्स जाएंगे, जिन्हें मंत्रालय से मंजूरी मिली है. यहां तक कि बिना सरकारी खर्च के भी, अगर कोई भारतीय दल में शामिल होना चाहता है तो वह भी नहीं होगा. सरकार दल का खर्च भी कंट्रोल करना चाहती है.
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