नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर में काम कर रहे एक मज़दूर राज क्षेत्री सही सलामत बाहर निकल आए. उन्होंने बताया कि जिस वक्त बाढ़ का पानी सुरंग के अंदर आया, उस वक्त नंबर 3 टनल के अंदर करीब 265 लोग काम कर रहे थे. और इनमें से कई लोग अब भी अंदर फंसे हैं. कुछ की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ लोगों के बचाने के लिए आवाज अभी भी आ रही है.
नेपाल बाढ़: 'सुपरवाइजर खुद भाग गए, चीन को पता था...' टनल से ज़िंदा निकले मज़दूर का दावा
Nepal flood survivor: राज क्षेत्री त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर में काम करते थे. उन्होंने सुरंग के अंदर का मंज़र बताया. उनका दावा है कि नंबर 3 टनल के पास कई शव पड़े हुए हैं. नेपाल बाढ़ में रेस्क्यू ऑपरेशन फिलहाल जारी है.

आजतक से जुड़े पंकज दास की रिपोर्ट के मुताबिक, राज ने बताया कि जिस वक्त ये हादसा हुआ, वो खुद सुरंग के अंदर काम कर रहे थे. तभी अचानक तेज आवाज सुनाई दी और वहां आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया. खतरे का अंदाज़ा लगाकर उन्होंने वहां मौजूद चाइनीज सुपरवाइजर से बाहर जाने की इजाजत मांगी. लेकिन राज का आरोप है कि सुपरवाइजर ने उन्हें बाहर नहीं जाने दिया. मज़दूरों को निकालने के बजाय काम जारी रखने को कहा और खुद बाहर निकल गए.
सुरंग से कैसे बाहर निकले?राज का कहना है कि जब बाढ़ आई तो सारे मजदूर टनल की ओपनिंग तक भागने लगे. राज खुद उस टनल ओपनिंग के पास थे, इसलिए किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब हो गए. उनके साथ चार लोग भागे थे. इनमें से दो लोग उनके साथ बाहर निकल आए, लेकिन दो लोगों का अभी तक पता नहीं है.
राज ने सुरंग के अंदर का मंज़र बताया. उनका दावा है कि नंबर 3 टनल के पास कई शव पड़े हुए हैं. वहीं, कुछ लोगों के जिंदा होने और मदद के लिए चिल्लाने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं. उन्होंने कहा कि उस समय किसी को समझ नहीं आ रहा था कि खुद की जान बचाएं या दूसरों की. हर ओर अफरा तफरी का माहौल था.
राज आगे बताते हैं कि टनल से निकलने के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. शुरुआत में उन्हें जंगल में रहना पड़ा. रात पेड़ के नीचे गुजारी. उनका आरोप है कि जिस दिन बाढ़ आई, उस दिन इलाके में मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया था. अगर मोबाइल नेटवर्क चालू रहता तो कम से कम अपने परिवार को फोन करके बता सकते थे कि वो जिंदा हैं.
ये भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ में अब तक 475 लोगों की मौत, अस्पतालों में डेड बॉडी रखने की जगह नहीं
काफी समय बाद जब इलाके में नेटवर्क आया, तब उन्होंने अपने घरवालों से संपर्क किया. राज क्षेत्री ने इस हादसे को लेकर चीन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि चीन को पहले से बाढ़ और लैंडस्लाइड के खतरे की जानकारी थी. अगर समय रहते नेपाल में लोगों को इसकी जानकारी दे दी जाती, तो मजदूरों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जा सकता था.
त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर में इंजीनियरिंग वर्क्स का काम चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन से जुड़ा हुआ है. वहां चीनी सुपरवाइजर्स की निगरानी में काम होता है. ऐसे में राज के आरोपों ने प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
नेपाल में आई इस बाढ़ से कम से कम 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है. नेपाल की NDRRMA के मुताबिक मौत का आंकड़ा एक हजार से ऊपर हो चुका है. वहीं, टनल से 279 वर्कर्स को रेस्क्यू किया जा चुका है. लेकिन अभी भी लगभग 600 वर्कर्स मिसिंग है.
वीडियो: नेपाल बाढ़ में तबाही के बीच कुत्तों की दर्दनाक कहानी











