एशियन गेम्स में 24 सितंबर का दिन एथलेटिक्स के लिए बेहद खास रहा. एथलेटिक्स में ब्रॉन्ज के साथ मेडल खाता खुला. सीमा कुमारी ने महिलाओं के 10,000 मीटर इवेंट में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता. सीमा ने 32:50.05 के समय में रेस पूरी की. इसके तुरंत बाद भारतीय टीम 4x400 मीटर रिले इवेंट में उतरी. उन्होंने यहां अपना सिल्वर मेडल डिफेंड किया.
Asian Games: सीमा कुमारी ने 16 साल बाद भारत को दिलाया मेडल
एशियन गेम्स में भारत के लिए एथलेटिक्स का पहला दिन खास रहा. भारत ने दो मेडल जीते. वहीं 100 मीटर के दोनों स्टार खिलाडियों ने सेमीफाइनल में जगह बनाई.

सीमा ने भारत का 16 साल का इंतजार खत्म किया. उन्होंने अपनी रेस को सटीक तरीके से प्लान किया और 32:50.05 का समय निकाला. इससे पहले साल 2010 में भारत को इस इवेंट में मेडल हासिल हुआ था. उन एशियाड गेम्स में प्रीजा श्रीधरण ने गोल्ड मेडल जीता था. उसी रेस का सिल्वर मेडल भारत की ही कविता राउत के नाम रहा था. एशियन गेम्स के इस इवेंट में यह भारत का अब तक का केवल तीसरा मेडल है.
हिमाचल प्रदेश की रहने वाली सीमा 10,000m के साथ 5000m में भी हिस्सा लेती हैं. सीमा ने 2024 एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप की सीनियर रेस में गोल्ड जीता था. वहीं पिछले साल FISU वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 5000m सिल्वर जीता था. वह इस समय 10,000 मीटर की नेशनल चैंपियन भी हैं.
वहीं मिक्स्ड टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया. पूवम्मा राजू, विशाल थेन्नारासु, विथ्या रामराज और मनु टीएस की चौकड़ी ने तीन मिनट 14.46 सेकेंड के समय के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया. भारत ने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भी सिल्वर पदक बरकरार रखा.
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इस रेस में आखिरी लेग भागने वाली विथ्या रामराज ने शानदार प्रदर्शन किया. वह अपने लेग की शुरुआत में तीसरे स्थान पर थीं. लेकिन आखिरी 100 मीटर में उन्होंने पूरे पुश के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा किया. इस इवेंट में बहरीन ने तीन मिनट 12.87 सेकेंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड मेडल जीता.
एथलेटिक्स में आज 100 मीटर में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाई. अनिमेष ने अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रहते हुए क्वालिफाई किया, जबकि गुरिंदरवीर अपनी हीट में दूसरे स्थान पर रहे. वहीं ट्रिपल जंप में भारत की ओर से निहारिका वशिष्ठ और आशा इलांगो ने हिस्सा लिया.
निहारिका 13.00 मीटर के जंप के साथ 10वें स्थान पर रहीं. आशा इलांगो ने 13.83 मीटर के प्रयास के साथ फाइनल में मेडल की रेस में खुद को बनाए रखा. हालांकि काउंटर बैक के कारण वह मेडल नहीं जीत सकीं. जब भी दो एथलीट्स का बेस्ट जंप एक जैसा होता है, तब काउंटर बैक का इस्तेमाल किया जाता है. इसके मुताबिक, जिस भी एथलीट ने वह बेस्ट जंप कम अटेंप्ट में किया होता है, वही विजेता होता है. आशा चौथे स्थान पर रहीं.
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