शुरुआत वो पढ़कर कीजिए जो अल्ज़ारी जोसेफ के ईएसपीएन क्रिकइन्फो प्रोफाइल पर लिखा है.
'क्रिकेटर के तौर पर आप इन चीज़ों का सपना देखते हैं. अपने मुल्क के लिए खेलना, वर्ल्ड कप जीतना और अपने हीरो रहे खिलाड़ियों से तारीफ़ पाना. अल्ज़ारी जोसेफ ने ये तीनों बॉक्स टिक किए हैं. वो भी 20 की उम्र तक पहुंचने से पहले. वो 2016 की अंडर-19 वेस्ट इंडीज़ टीम का हिस्सा थे जिसने वर्ल्ड कप जीता. एंडी रॉबर्ट्स को जोसेफ बहुत पसंद आए थे, ईयन बिशप चाहते थे कि जोसेफ को जल्द से जल्द टेस्ट क्रिकेट में खिलाया जाए और कर्टली एम्ब्रोज़ ने कहा था, 'मैं एंटीगुआ से हूं, तुम एंटीगुआ से हो और मुझे गर्व है'."
कैसे पहुंचे यहां तक जोसेफ?
20 नवम्बर 1996 को पैदा हुए अल्ज़ारी शाहेम जोसेफ़ का घर के पिछवाड़े से स्टेडियम तक का सफर दिलचस्प है. वो अपने पिता अल्वा को गेंदबाज़ी किया करते थे. जल्द ही वो पिता के क्लब के लिए खेलने लगे. वहां से फर्स्ट क्लास क्रिकेट तक का सफर उन्होंने तेज़ी से तय किया. वहां उनकी शानदार परफॉरमेंस के बाद उन्हें 2016 के अंडर 19 वर्ल्ड कप के लिए वेस्ट इंडीज़ टीम में जगह दी गई. इस मौके का उन्होंने सोना कर दिखाया. वर्ल्ड कप में उन्होंने 6 मैच खेले और 13 विकेट लिए. अपनी टीम से वो लीडिंग विकेट टेकर रहे. ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 30 रन देकर 4 विकेट लेना उनका बेस्ट था. यही नहीं, इसी मैच में उन्होंने टूर्नामेंट की सबसे तेज़ गेंद फेंकी, जिसने ब्रेंडन स्लाई के स्टंप्स उड़ा दिए.

वर्ल्ड कप फाइनल में भी वो हीरो रहे. इंडिया के पहले तीन विकेट्स उन्होंने ही लिए. जिनमें से पहला था विस्फोटक बल्लेबाज़ ऋषभ पंत का. जोसेफ़ के शुरूआती प्रहार से इंडिया की टीम संभल ही नहीं पाई. सिर्फ 145 रन ही बना पाई, जो वेस्ट इंडीज़ ने चेस कर लिए और वर्ल्ड कप उठा लिया.
सीनियर टीम में एंट्री
जब प्रदर्शन इतना तूफानी हो तो हर रास्ते खुल ही जाते हैं. जोसेफ़ को इंडिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए चुन लिया गया. 9 अगस्त 2016 को उन्होंने डेब्यू किया. और उसी दिन अपना पहला विकेट भी लिया. जानते हैं किसका? विराट 'रन मशीन' कोहली का. और दूसरा था रोहित शर्मा का. उसी साल अक्टूबर में उनको वन डे टीम में भी शामिल किया गया. पाकिस्तान के खिलाफ. इस मैच में भी उन्होंने 2 विकेट लिए. एक उस मैच के शतकवीर बाबर आज़म का था.
वो मैच जहां सारे दिग्गज नतमस्तक हो गए
तारीख थी 2 फ़रवरी 2019. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट का तीसरा दिन. सुबह ही खबर आई कि अल्ज़ारी जोसेफ़ की माता जी नहीं रहीं. अमूमन ऐसे वक़्त खिलाड़ी घर रवाना हो जाते हैं. जोसेफ़ नहीं गए. उनकी टीम को उनकी ज़रूरत थी. पहले वो बैटिंग करने उतरे. उनकी एंट्री पर पूरे स्टेडियम में तालियां बजीं. उन्होंने 20 गेंदों में 7 रन बनाए. फिर बॉलिंग की बारी आई तो दो बेहद महत्वपूर्ण विकेट ले लिए. पहला था इंग्लैंड के स्टार बैट्समैन जो रूट का. सारा स्टेडियम अल्ज़ारी की हिम्मत को सलाम कर रहा था. फील्ड से बाहर भी बड़े-बड़े दिग्गजों ने उनके इस जज़्बे की सराहना की. लोगों ने ट्विटर-फेसबुक को जोसेफ़ के लिए तारीफी अल्फाज़ों से भर डाला. सब कह रहे थे कि समर्पण हो तो ऐसा हो. क्रिकेट को ओढ़ने-बिछाने वाले इस खिलाड़ी ने अब आईपीएल में धमाकेदार आगाज़ कर दिया है. अपने पहले ही मैच में बेस्ट बॉलिंग फिगर्स हासिल कर लीं. 3.4 ओवर में 12 रन देकर 6 विकेट लिए. कहना न होगा कि इस बाइस साल के लड़के का भविष्य बेहद उज्ज्वल है.