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किस्सा अजिंक्य रहाणे का, लोकल ट्रेन की धक्का-मुक्की से गाबा का घमंड तोड़ने तक!

Ajinkya Rahane Retirement : टीम इंडिया के पूर्व कप्तान Ajinkya Rahane ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है. 30 जुलाई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये उन्होंने रिटायरमेंट अनाउंस की.

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अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. (फोटो-PTI)

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  • अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई को सोशल मीडिया के माध्यम से क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की, जिसके साथ उन्होंने 12 साल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर समाप्त किया।
  • रहाणे ने अपनी कप्तानी में 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को उनकी धरती पर हराकर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा।
  • उनके संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट टीम में युवाओं को नेतृत्व देने की जिम्मेदारी बढ़ेगी, और टीम के प्रदर्शन पर उनका प्रभाव देखने को मिलेगा।

अजिंक्य रहाणे. टीम इंडिया का वो कप्तान, जिसने ऑस्ट्रेलिया में कंगारुओं को धोया. वो भी एक ऐसी यंग ब्रिगेड के साथ, जिससे शायद ही इतिहास दोहराने की किसी को उम्मीद थी. रहाणे की अगुवाई में टीम इंडिया ने इतिहास दोहराया. अब रहाणे ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है. 30 जुलाई को उन्होंने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान कर दिया.

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अपने इमोशनल पोस्ट में रहाणे ने टाइमिंग की बात की. ये टाइमिंग ही टीम इंडिया के जिंक्स की पहचान थी. रहाणे ने 12 साल इंडियन जर्सी पहनी. इस दौरान उन्होंने 85 टेस्ट, 90 ODI और 20 T20I मुकाबले खेले. लगभग 8000 इंटरनेशनल रन वाले इस प्लेयर की पहचान इनके रनों से नहीं थी. उनकी पहचान थी इंडियन सब कॉन्टिनेंट के बाहर उनका डोमिनेंस.

चाहे 2014 का लॉर्ड्स टेस्ट हो या इसी साल का मेलबर्न टेस्ट. रहाणे की सेंचुरीज हमेशा टीम इंडिया के लिए संकटमोचक साबित हुईं. वेलिंगटन से लेकर किंग्समीड तक, जहां भी रहाणे से कप्तान ने उम्मीद लगाई. उन्होंने अपने बल्ले से डिलीवर किया. पिछले 3 साल से वो इंडियन सेटअप से बाहर हैं. लेकिन, 2020-21 में बतौर कप्तान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में जो कारनामा किया, उसे कोई भी इंडियन फैंस शायद ही कभी भूल पाएगा.

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आंकड़े सच नहीं बताते

रहाणे टीम के उस भरोसेमंद प्लेयर की तरह रहे हैं, जो ज्यादा बातें नहीं करता था. लेकिन, जब टीम मुश्किल में होती थी, सबसे आगे खड़ा होता था. भारतीय क्रिकेट के जिंक्स (प्यार से उन्हें सब यही तो बुलाते थे) ने अब क्रिकेट को अलविदा कह दिया है. आंकड़े देखेंगे तो कन्फ्यूज हो जाएंगे कि ऐसा क्या खास था इनमें.

8414 इंटरनेशनल रन हैं. टेस्ट में 5077, ODI में 2962 और T20I में 375 रन. ये तो बहुत साधारण आंकड़े हैं. ऐसे में इंडियन क्रिकेट उनके संन्यास से इतना स्तब्ध क्यों है? वो इसलिए कि रहाणे के अचीवमेंट्स उनके स्टैट्स में नज़र नहीं आते. कैसे डोंबिवली का एक लड़का टीम इंडिया के सबसे ऐतिहासिक जीत का लीडर बना? भारतीय टीम के जिंक्स का पूरा किस्सा सुनेंगे तो शायद समझ पाएंगे.

डोंबिवली की लोकल से शुरू हुई कहानी

रहाणे का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ. लेकिन, क्रिकेट का ककहरा उन्होंने डोंबिवली में सीखा. मुंबई में लोकल ट्रेन पकड़ना अपने आप में एडवेंचर स्पोर्ट की तरह है. 7 साल का एक लड़का रोज सुबह डोंबिवली से सीएसटी (छत्रपति शिवाजी टर्मिनस) तक का सफर तय करता था. वो भी कंधे पर अपने से भारी किटबैग लेकर. आंखों में टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना सजाए.

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पूर्व क्रिकेटर प्रवीण आमरे ने इस हीरे को पहचाना और तराशना शुरू किया. जब कोई घरेलू क्रिकेट में रनों की बहार लगाए तो उसे कितने दिनों तक सेलेक्टर्स इग्नोर कर पाएंगे? रहाणे ने भी ऐसा ही किया. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब 14209 रन बना चुके रहाणे ने सेलेक्टर्स को चुनने पर मजबूर कर‍ दिया. लेकिन, टीम इंडिया में एंट्री एक बात है. उस जगह को जस्टिफाई करना बहुत अलग चैलेंज है.

देश के बाहर के रिकॉर्ड शानदार

सबसे बड़ा चैलेंज तब होता है, जब किसी यंग्सटर को दिग्गज से कंपेयर किया जाने लगे. रहाणे के साथ भी ऐसा ही हुआ. उनमें लोगों को राहुल द्रविड़ की छवि नज़र आने लगी. रहाणे ने इंडियन सब कॉन्टिनेंट के बाहर प्रूव भी करके दिखाया. लेकिन, सब कॉन्टिनेंट में उनके आंकड़े बहुत खास नहीं हैं. 16 टेस्ट मुकाबलों में रहाणे ने घर पर 35.73 के औसत से 1644 रन ही बनाए थे. जबकि SENA देशों में इंग्लैंड को छोड़ दें तो सब जगह उनका औसत इससे बेहतर ही था.

लेकिन, इंडियन सब कॉन्टिनेंट के बाहर जब टीम इंडिया के धुरंधर पेस और बाउंस के आगे टिक नहीं पा रहे थे. वहीं, रहाणे का बल्ला आग उगल रहा होता था. साल 2014 में लॉर्ड्स की हरी घास वाली पिच पर जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड के सामने टीम इंडिया स्ट्रगल कर रही थी. विराट, श‍िखर, पुजारा और विजय 30 रन भी नहीं बना पाए थे. वहां रहाणे ने 104 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी.  

इसी साल मेलबर्न में भी रहाणे ने ऐसा ही कमाल करके दिखाया था. मिचेल जॉनसन की आग उगलती गेंदों पर काउंटर अटैक करते हुए उन्होंने 147 रन ठोके थे. उन्होंने दूसरी इनिंग्स में भी 48 रन बनाए थे और मैच को ड्रॉ कराने में अहम योगदान निभाया था. वेलिंगटन से लेकर किंग्समीड तक, हर मुश्किल पिच पर रहाणे ने अपने बल्ले से टीम की नैया पार लगाई.

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इंडियन क्रिकेट का गोल्डन चैप्टर

इन सबमें सबसे खास अचीवमेंट था, 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी. 2018 में टीम इंडिया ने घर पर ऑस्ट्रेलिया को हराया था. कंगारू बदला लेने का इंतज़ार कर रहे थे. शुरुआत रही भी बिल्कुल वैसी ही. एडिलेड में हुए पहले टेस्ट मैच में इंडियन टीम दूसरी इनिंग्स में 36 रन पर ऑलआउट हो गई. लेकिन, यहां से मुश्किलें कम होने की जगह बढ़ने लगीं.

कप्तान विराट कोहली इस मुकाबले के बाद पैटरनिटी लीव पर घर लौट गए. कोविड के कारण क्वारंटीन चल रहा था. ख‍िलाड़ी चोटिल हो रहे थे, पर कोई इंडिया से स्कवॉड में शामिल होने आ भी नहीं सकता था. एक प्लेयर को छोड़, पूरा बेंच स्ट्रेंथ टेस्ट हो गया. लेकिन, फिर भी कप्तान रहाणे ने हार नहीं मानी.

एडिलेड के बाद टीम मेलबर्न पहुंची. बॉक्सिंग डे टेस्ट. रहाणे ने कप्तानी पारी खेली. शतक जड़ा (112 रन) और टीम को जीत दिला दी. इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है. सीरीज बराबरी पर पहुंच चुकी थी. लेकिन, दो मैच बाकी थे. सिडनी में चेतेश्वर पुजारा और हुनमा विहारी ने शरीर पर गेंदे खाकर मैच बचाया. अब टीम ब्रिस्बेन पहुंची. सीरीज अब भी बराबरी पर था.

लेकिन, गाबा वो मैदान था, जहां ऑस्ट्रेलिया 32 साल से नहीं हारा था. मीडिया से लेकर पूरी ऑस्ट्रेलियन टीम इंडियंस को मेंटली से लेकर फिजिकली तोड़ने तक पीछे नहीं रहे. लेकिन, रहाणे की लीडरश‍िप में भारतीय युवाओं ने ऑस्ट्रेलिया का घमंड चकनाचूर कर दिया. यही कारण है कि इसे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे महान सीरीज में से एक माना जाता है.

रहाणे का डाउनफॉल और वापसी

कहते हैं वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता. रहाणे के साथ भी ऐसा ही हुआ. गाबा की जीत के बाद रहाणे का फॉर्म ऐसा रूठा कि वो टीम इंडिया से ही बाहर हो गए. लोग कहने लगे, रहाणे का करियर खत्म हो गया. वो संन्यास ले लेंगे. लेकिन, जो आदमी मुंबई लोकल की बॉडी मसाज में नहीं टूटा, वो इस झटके से क्या ही टूटता?

वो वापस रणजी ट्रॉफी खेलने गए. इसी बीच, IPL 2023 की नीलामी हुई. चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने उन्हें बेस प्राइस पर खरीद लिया. इस सीजन CSK में दिखा रहाणे 2.0. अपनी क्लासिक बैटिंग के लिए फेमस, रहाणे ने 150-160 के स्ट्राइक रेट से बॉलर्स की कूटाई की. वानखेड़े में मुंबई इंडियंस के खिलाफ 27 गेंदों में 61 रन की वो पारी, शायद ही कोई भूल सकता है.

टीम इंडिया के क्राइसिसमैन  

घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के फॉर्म के दम पर उन्होंने WTC Final (2023) में टीम इंडिया में वापसी की. यहां पहली पारी में 89 रन बनाकर उन्होंने फिर साबित कर दिया कि वो टीम इंडिया के सबसे बड़े क्राइसिस-मैन थे. विराट कोहली की तरह उनके पास अग्रेसिव फैन आर्मी नहीं है. न ही रोहित शर्मा जैसी उनकी पीआर मशीनरी है.

30 जुलाई को उन्होंने भावुक पोस्ट से विदाई का ऐलान कर दिया. भावुक रहाणे ने कहा कि कैप नंबर 278 को अलविदा कहने का समय आ गया है. लेकिन जब-जब भारतीय टेस्ट क्रिकेट के स्वर्णिम पन्नों की बात होगी, तो अजिंक्य रहाणे का नाम सुनहरे अक्षरों में ही लिखा जाएगा. 
रहाणे एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कभी किसी फैसले पर मुंह नहीं बनाया. चुपचाप अपना काम किया. जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब चट्टान की तरह खड़े रहे. यही अजिंक्य रहाणे की पहचान थी और शायद सबसे बड़ी पूंजी भी.

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