नॉनस्ट्राइकर एंड पर बोलर द्वारा किया गया रनआउट. कुछ वक्त पहले तक इसे मांकडिंग कहते थे. फिर ICC ने नियम बदले और अब इसे रनआउट कहा जाता है. इसमें बोलर, गेंद रिलीज होने से पहले क्रीज़ छोड़ रहे नॉनस्ट्राइकर को रनआउट करता है. और भले ही यह नियमों के अंतर्गत हो, लेकिन इस पर सालों से बवाल चल रहा है.
चार्ली डीन के रनआउट पर दीप्ति के 'मजे' लेने वाले स्टार्क अब क्या करेंगे?
ज़ैम्पा ने स्टार्क को तकलीफ़ दे दी.


लेकिन हम आज 3 जनवरी 2023 को इस पर बात क्यों कर रहे हैं? क्योंकि, आज बिग बैश लीग में एक ऐसी घटना हुई जिसने हमें साल 2022 का अक्टूबर महीना याद दिला दिया. इस महीने में क्या हुआ था? मिचल स्टार्क ने कुछ कहा था. स्टार्क ने क्या कहा था, उस पर आने से पहले हम आपको याद दिलाते हैं वो घटना, जिसने स्टार्क को ये कहने पर मजबूर किया.
साल 2022 के सितंबर महीने में भारतीय क्रिकेटर दीप्ति शर्मा ने इंग्लिश क्रिकेटर चार्ली डीन को नॉनस्ट्राइकर एंड पर रनआउट किया था. इस पर खूब विवाद हुआ. हमने इस विवाद को सिली पॉइंट में कवर किया. और इसके एक महीने बाद अतिस्मार्ट स्टार्क इंग्लैंड के खिलाफ़ T20I मैच खेल रहे थे. मैच तो बारिश से धुल गया. लेकिन इस बारिश से पहले स्टार्क बेवजह एक विवादित कमेंट कर चुके थे.
बात इंग्लैंड की बैटिंग के पांचवें ओवर की है. दाविद मलान स्ट्राइक पर थे और बॉल स्टार्क के हाथ में थी. ओवर की चौथी बॉल. स्टार्क ने गुड लेंथ पर फेंकी, मलान इसे मार नहीं पाए, गेंद वापस स्टार्क की तरफ आ गई. स्टार्क ने बॉल उठाई, घूमे और नॉनस्ट्राइकर एंड पर खड़े बटलर से कहा,
‘मैं दीप्ति नहीं हूं, लेकिन शायद मैं भी ये (रनआउट) कर सकता हूं.’
और ऐसा कहते ही स्टार्क ने एक साइड पकड़ ली. साइ़ड, उन लोगों की जिन्हें इस तरीके से बल्लेबाज का आउट होना गलत लगता है. वो ICC के नियमों को भी नहीं मानते. और नियमों पर चलने वाले प्लेयर्स की आलोचना में किसी भी हद तक चले जाते हैं. भले ही ये लोग आगे चलकर दुविधा में फंस जाएं, परेशान हो जाएं. लेकिन जबरदस्ती का मोरल स्टैंड लेते वक्त ये आगे की परवाह नहीं करते.
और ऐसा करने वाले स्टार्क के सामने अब एक बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है. और ये दुविधा खड़े करने वाले हैं उन्हीं के नेशनल टीममेट एडम ज़ैम्पा. BBL टीम मेलबर्न स्टार्स के कप्तान ज़ैम्पा ने एक मैच में सामने वाले बैटर को नॉनस्ट्राइकर एंड पर रनआउट करने की कोशिश की. कोशिश इसलिए, क्योंकि उनकी उड़ाई गिल्लियां बल्लेबाज को आउट नहीं कर सकीं.
नियमों के पेंच में फंसे ज़ैम्पा देखते ही रहे और थर्ड अंपायर ने बल्लेबाज को बचा लिया. लेकिन इससे स्टार्क और उनके जैसी सोच रखने वालों का क्या करें? इन्हें कैसे समझाएं कि नियमों का पालन करने में कोई बुराई नहीं है. और अगर आप स्वेच्छा से किसी नियम का पालन नहीं करना चाहते, तो इसके लिए मोरल हाई ग्राउंड क्यों लेना?
आपको ICC का कोई नियम नहीं मानना तो मत मानिए, चिल्लाकर घोषणा क्यों कर रहे? दुनिया के सामने क्यों गा रहे हैं कि हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि हम बड़े अच्छे हैं. और जब कोई व्यक्ति तय नियमों के मुताबिक चले तो उसे नीचा क्यों दिखाना? उसे ऐसा क्यों फील कराना कि वो गलत कर रहा है? नियम सबके लिए समान हैं, कोई नियम का फायदा उठा रहा है तो वो भी ठीक. और कोई नहीं उठा रहा, तो चलिए वो भी ठीक ही है.
दोनों को जो ठीक लग रहा, कर रहे. अब इसमें कोई एक मोरल हाई ग्राउंड क्यों ले? क्यों ऐसा जाहिर करे कि वो सही है और दूसरा गलत. जबकि नियमों के मुताबिक दूसरे ने कुछ गलत नहीं किया? अब, जबकि स्टार्क के साथी ज़ैम्पा ने भी नियमों के मुताबिक एक प्लेयर को आउट करने की कोशिश कर ली है, तो उम्मीद है कि स्टार्क अपनी गलती सुधारेंगे और आगे से ऐसे मोरल हाई ग्राउंड लेने नहीं कूदेंगे.
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