मेडिकल साइंस के इतिहास में पहली बार रोबोट ने किसी जीव की सर्जरी की है. यह लैप्रोस्कोपिक सर्जरी थी. यानी गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) निकालने की सर्जरी. दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. उन्होंने अंगो को काटा, टिश्यू को हटाया, क्लिप लगाया और लिवर बेड से गॉल ब्लैडर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. लेकिन इसमें दो बड़ी बातें ध्यान देने वाली हैं. पहली यह कि मरीज एक सुअर था और दूसरी बात यह कि रोबोट्स को पूरी तरह से इंसानी सर्जन कंट्रोल कर रहे थे.
डॉक्टर नहीं, अब रोबोट करेंगे ऑपरेशन! पहली बार दो रोबोट्स ने मिलकर कर डाली लाइव सर्जरी
पहली बार Humanoid Robots ने किसी जीव की सफल सर्जरी की. उन्होंने बिना किसी गड़बड़ के पित्त की थैली (गॉल ब्लैडर) को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्होंने यह ऑपरेशन कैसे किया? और क्या भविष्य में इंसानी डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी में ह्यूमनॉइड रोबोट काम आ सकते हैं?


यह असल में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो की एक टीम का किया गया एक्सपेरिमेंट था. 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'नेचर' में छपी स्टडी के मुताबिक, टीम ने इस काम के लिए कोई खास रोबोट नहीं बनाया. इसके बजाय, उन्होंने बाजार में आसानी से मिलने वाले दो ‘यूनिट्री जी1’ (Unitree G1) रोबोट का इस्तेमाल किया.

‘यूनिट्री जी1’ एक बेहद एडवांस और किफायती ह्यूमनॉइड (इंसानों की तरह दिखने वाला) रोबोट है, जिसे चीन की एक कंपनी ‘यूनिट्री रोबोटिक्स’ बनाती है. ये छोटे और सस्ते रोबोट होते हैं. इनकी लंबाई चार से पांच फीट होती है, वजन लगभग 30 किलो होता है और ये करीब 20,000 डॉलर (19 लाख भारतीय रुपये) से कम कीमत पर मिल जाते हैं.
इन रोबोट्स को मेडिकल टूल्स इस्तेमाल करने के लिए मॉडिफाई किया गया था. इसमें 3D LiDAR और डेप्थ कैमरा भी लगा था, जो सर्जरी के कामों के लिए जरूरी है. इन रोबोट्स को 'सर्जी' (Surgie) नाम दिया गया है.
कैसे किया ऑपरेशन?प्री-क्लिनिकल ट्रायल में सुअर की पित्त की थैली निकालने के दो अलग-अलग ऑपरेशन किए गए. पहली सर्जरी में ह्यूमनॉइड रोबोट मुख्य भूमिका में था और एक इंसानी डॉक्टर ने उसके असिस्टेंट के रूप में मदद की. दूसरी सर्जरी सबसे अनोखी थी, जिसमें किसी इंसान की सीधी मदद के बिना दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने पूरा ऑपरेशन अकेले पूरा किया.
रोबोट्स ने खुद अंगों और टिश्यूज को काटा और क्लिप किया, लेकिन वे पूरी तरह एक्सपर्ट्स के कंट्रोल में थे. बैकस्टेज में मौजूद एक्सपर्ट्स सर्जनों ने टेली-ऑपरेटेड (दूर से कंट्रोल करने वाली) तकनीक के जरिए उनके मूवमेंट को गाइड किया था. रोबोट को बांधकर रखा गया था ताकि वे गलती से गिर न जाएं और जीव को चोट न पहुंचाएं. रोबोट्स ने सूअरों के पेट से गॉल ब्लैडर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला.
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इस एक्सपेरिमेंट का मकसद यह समझना था कि क्या इंसानी डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी में मेडिकल केयर देने के लिए ह्यूमनॉइड रोबोट काम आ सकते हैं. इसका जवाब, फिलहाल तो 'नहीं' है. लेकिन इससे भविष्य में दूरदराज के गरीब इलाकों में रिमोट सर्जरी पहुंचाना आसान हो जाएगा. ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट जिसे हजारों मील दूर बैठा कोई एक्सपर्ट कंट्रोल कर सके. ये उन जगहों के लिए जरूरी हो सकता है जहां अभी एडवांस मेडिकल सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं.
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