AI रोबोट संभालेगा अब पूरा घर; मशीन में कपड़े धोएगा, कॉफी बनाएगा, पोछा भी लगाएगा
AI की दौड़ अब सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित नहीं रही. अब ध्यान ऐसे “Thinking Robots” पर है जो इंसानों की तरह चीजें देखकर समझ सकें, सामान इस्तेमाल कर सकें और काम करते-करते सीख भी सकें. इसके लिए कई बड़ी कंपनियों में रेस शुरू हो गई है.

जरा सोचिए… आप सुबह उठें और देखें कि घर में रखा एक रोबोट वॉशिंग मशीन खाली कर चुका है, बर्तन साफ कर चुका है, फर्श साफ कर चुका है और रसोई में कॉफी भी तैयार है. अभी तक ये सब sci-fi फिल्मों में दिखता था, लेकिन अब दुनिया की सबसे बड़ी बड़ी टेक कंपनियां इसी भविष्य को हकीकत बनाने की कोशिश में लगी हुई हैं.
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई की दौड़ अब सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित नहीं रही. अब ध्यान ऐसे “Thinking Robots” पर है जो इंसानों की तरह चीजें देखकर समझ सकें, सामान इस्तेमाल कर सकें और काम करते-करते सीख भी सकें.
क्या है Physical AI और कैसे सीख रहे हैं Robots?इस टेक्नोलॉजी को Physical AI कहा जा रहा है. यानी ऐसा AI जो सिर्फ लिखकर जवाब देने तक सीमित न हो, बल्कि असली दुनिया में काम भी कर सके. सबसे दिलचस्प बात ये है कि इन रोबोट्स को इंसानों की तरह कोशिश और गलती के तरीके से सिखाया जा रहा है. अगर कोई काम पहली बार गलत हुआ, तो मशीन अगली बार खुद उसे बेहतर करने की कोशिश करेगी.
रोबोटिक्स कंपनी एजाइल रोबोट्स की वाइस प्रेसिडेंट बेटिना शॉन-बेन्जीन के मुताबिक, Physical AI शरीर के लिए एआई जैसा है. उन्होंने बताया कि ये रोबोट्स सिर्फ पहले से दिए गए आदेशों का पालन नहीं करते, बल्कि आसपास का माहौल देखकर और इंसानों के साथ काम करते हुए खुद को ढालना सीखते हैं.
फिलहाल इन रोबोट्स को रोजमर्रा की जिंदगी के सामान्य काम सिखाए जा रहे हैं. जैसे वॉशिंग मशीन खाली करना, बर्तन साफ करना और फर्श साफ करना. लेकिन टेक्नोलॉजी अब इससे कहीं आगे निकल चुकी है. अब रोबोट को ब्रेन सर्जरी करना भी सिखाया जा रहा है. हालांकि अभी रोबोटिक तकनीक की मदद से न्यूरोसर्जन अब अत्यंत सटीक और न्यूनतम चीर-फाड़ (minimally invasive) वाली ब्रेन सर्जरी करने लगे हैं. ये रोबोट खुद सर्जरी नहीं करते, बल्कि सर्जन के हाथों को अत्यंत सटीकता और स्थिरता प्रदान करते हैं.
Jeff Bezos भी लगा रहे हैं बड़ा दांवन्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौड़ में जेफ बेजोस भी पीछे नहीं हैं. अमेज़न छोड़ने के बाद बेजोस ने रोबोट बनाने की सीक्रेट लैब प्रोजेक्ट प्रोमेथियस (Project Prometheus) में लगातार इंटरेस्ट दिखाया है. इसके अलावा उनकी दूसरी कंपनी - फिजिकल इंटेलिजेंस - भी सिलिकॉन वैली में काफी चर्चा में है. कंपनी के को फाउंडर सर्गेई लेविन ने इसे ChatGPT for robots बताया है.
हाल ही में कंपनी ने डेमो दिखाया कि उसके रोबॉट्स कॉफी बना सकते हैं, अलग-अलग तरह के कपड़े प्रेस कर सकते हैं, सुनने में ये छोटे-मोटे काम लग सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक रोबोट्स के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि है.
अब खुद नई चीजें जोड़कर सीख रहे हैं Robotsअब कंपनियां रोबोट ब्रेन तकनीक पर काम कर रही हैं. इसका मतलब है कि रोबोट्स अलग-अलग हुनर को जोड़कर नए काम सीख सकें. आसान भाषा में समझे तो अगर किसी रोबोट को चाय बनाना, सब्जियां काटना और सूप का तरीका सिखाया जाए, तो वह खुद वेजिटेबल सूप बनाना समझ सकता है.
सर्गेई लेविन के मुताबिक असली बदलाव तब आता है, जब रोबोट सिर्फ सिखाई गई चीजें दोहराने के बजाय उन्हें नए तरीके से जोड़कर समस्याओं का हल निकालना शुरू कर देता है. उनका कहना है कि यह टेक्नोलॉजी उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है.
(ये खबर हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे कुमार ऋषभ ने लिखी है)
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