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'कुत्ते झुंड में भोंकते हैं, शेर अकेला आता है', एकनाथ शिंदे किस पर भड़क गए?

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे ने बिना नाम लिए एक-दूसरे पर तीखे हमले किए. सांसदों की संभावित बगावत की खबरों के बीच शिंदे ने ठाकरे को आत्मचिंतन की सलाह दी, जबकि ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की.

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शिंदे और उद्धव ठाकरे ने नाम लिए बिना एक दूसरे पर निशाना साधा है. (फोटो- India Today)

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  • शिवसेना की स्थापना के 60वें वर्ष पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने बिना नाम लिए एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए, जिसमें शिंदे ने ठाकरे को आत्मचिंतन करने की सलाह दी।
  • शिवसेना में 2022 की बगावत के बाद पार्टी दो खंडों में विभाजित हो गई है, जिसमें एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ सरकार बना ली और अब उनके साथ कई सांसद जाने की खबरें हैं।
  • उद्धव ठाकरे ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का भी संकेत दिया है और कहा कि अगर कोई बेहतर नेतृत्वकर्ता होगा तो वे पद छोड़ने को तैयार हैं।

महाराष्ट्र की कद्दावर पार्टी शिवसेना के स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने बिना नाम लिए एक-दूसरे पर निशाना साधा. शिवसेना उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे की बनाई पार्टी है. इसमें 2022 में तब बंटवारा हो गया, जब एकनाथ शिंदे ने पार्टी से बगावत करके कई विधायकों को तोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बना ली. खबर है कि अब उद्धव ठाकरे के 9 में से 6 सांसद भी एकनाथ शिंदे के साथ जाने वाले हैं. बगावत की इन खबरों के बीच एकनाथ शिंदे ने ठाकरे पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि वो सबको जाओ-जाओ कहते रहते हैं. इसलिए एक दिन सब उनको छोड़कर चले जाएंगे. शिंदे ने ठाकरे को ‘आत्मचिंतन’ की सलाह दी और कहा कि अगर इसी तरह लोग उन्हें छोड़कर जाते रहे तो एक दिन उनके पास सिर्फ ‘चाटुकार’ ही बचेंगे. 

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ये सब 19 जून के दिन हुआ, जब शिवसेना को बने ठीक 60 साल हो गए. साल 1966 में 19 जून को बनी ये पार्टी अब दो खंडों में बंट गई है. हर खेमा खुद को पार्टी के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का असली वारिस बताता है. एकनाथ शिंदे ने भी शुक्रवार, 19 जून को मुंबई में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे के सच्चे उत्तराधिकारी उनकी पार्टी के शिवसैनिक हैं. उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना शिंदे ने घोषणा की कि उत्तराधिकार रक्त संबंधों से नहीं, बल्कि विचारधारा से तय होता है. उन्होंने कहा कि शिवसेना कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है. यह लाखों लोगों की विचारधारा है.

ठाकरे पर बरसते हुए शिंदे ने आगे कहा,

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वो (उद्धव ठाकरे) कहते हैं कि जिसको जहां जाना है, चला जाए. जब आप लगातार जाओ-जाओ कहेंगे तो लोग चले ही जाएंगे. आपको इस पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है.

शिंदे ने कहा,

शोले फिल्म में एक्टर असरानी का एक मशहूर डायलॉग था. आधे इधर जाओ. आधे उधर जाओ. बाकी मेरे पीछे आओ. लेकिन इनके (ठाकरे के) पीछे अब कोई नहीं बचा है. इनके साथ सिर्फ कुछ सलाहकार और चाटुकार रह गए हैं. ऐसे में उनकी पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी?

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ठाकरे को लेकर शिंदे ने एक शेर भी सुनाया.

‘तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं.’

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आगे कहा कि कोई उद्धव ठाकरे को समझाए कि अब हालात बदल गए हैं. वक्त के हिसाब से फैसले लेने पड़ते हैं. लेकिन अहंकार इतना बढ़ गया है कि हर जगह सिर्फ ‘मैं-मैं’ दिखाई देता है. अहंकार करने वाले रावण की लंका भी जलकर राख हो गई थी.

ऑपरेशन तुडवा पर भी बोले शिंदे

बता दें कि शिवसेना यूबीटी में सांसदों की बगावत की खबरों के बीच संजय राउत ने बाला साहेब ठाकरे का एक वीडियो शेयर किया. इसमें बाल ठाकरे कहते दिख रहे हैं कि अगर कोई पार्टी से गद्दारी करे तो कानून की परवाह किए बिना उसे कुचल दो. यह वीडियो शेयर करके राउत ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को इशारा किया है कि अगर सांसद बगावत करते हैं तो उनके खिलाफ ‘ऑपरेशन तुडवा’ शुरू करें यानी उनके साथ मारपीट करें.

शिंदे ने इस पर भी प्रतिक्रिया दी है. कहा कि वो लोग कहते हैं कि ‘ऑपरेशन’ करेंगे. किसका ऑपरेशन करेंगे? वो तो सिर्फ बातें करने वाले लोग हैं. शिंदे ने आगे कहा कि वो डॉक्टर नहीं हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर राजनीतिक ऑपरेशन करना जानते हैं. उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन करने के लिए शेर का दिल चाहिए. भेड़िये का नहीं. बाघ की खाल पहन लेने से कोई भेड़िया बाघ नहीं बन जाता.

विरोधियों पर बरसते हुए शिंदे ने कार्यकर्ताओं से ये भी कहा कि आपके सामने एक बाघ खड़ा है. कुछ कुत्ते भौंकते रहते हैं. कल और परसों भी वे भौंकते रहेंगे. आपको बता दूं कि कुत्ते झुंड में भौंकते हैं लेकिन शेर अकेला आता है. शिंदे ने शिवसेना के कांग्रेस में विलय की चल रही बात को लेकर भी ताना मारा और कहा कि वो लोग राजनीतिक रूप से कमजोर हो गए हैं. उनके लिए जनता का विश्वास हासिल करना आसान नहीं होगा.

यह भी पढ़ेंः 'बीजेपी से बेहतर है कांग्रेस', उद्धव ठाकरे ने विलय के सवाल पर मन की बात भी बोल दी

उद्धव ठाकरे ने भी साधा निशाना

इधर शिवसेना के स्थापना दिवस के दिन ही उद्धव ठाकरे का भी बयान सामने आया. इसमें उन्होंने अपनी खंडित पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की. ठाकरे ने कहा कि लोगों को लग रहा है कि वो हिम्मत हार जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं होने वाला. वो अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. 

ऑपरेशन तुडवा को लेकर ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग उनसे आदेश मांग रहे हैं ताकि दलबदलुओं पर ऐक्शन ले सकें. उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे पहले ही कह गए थे कि जो पार्टी छोड़कर जाते हैं, उनसे सख्ती से निपटना चाहिए. ठाकरे ने कांग्रेस के साथ विलय की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि हम तीस साल तक बीजेपी के साथ रहे. लेकिन कभी उनके साथ विलय नहीं किया. फिर कांग्रेस में कैसे विलय कर लेंगे. जो लोग भी ऐसी बातें कर रहे हैं वो झूठ बोल रहे हैं. 

पार्टी नेता का पद छोड़ देंगे उद्धव?

सबसे बड़ी बात उद्धव ठाकरे ने पार्टी के अध्यक्ष पद को लेकर कही. ठाकरे ये सब ठीक उसी समय कह रहे थे, जब एकनाथ शिंदे अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे. पार्टी के सांसदों के बगावत की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि आज उनकी आत्मा को बहुत दुख पहुंचा है. पार्टी वर्कर्स को संबोधित करते हुए बोले, 

अगर आप में से किसी को भी लगता है कि मैं इस (पार्टी प्रमुख) पद के योग्य नहीं हूं तो सीधे मेरे सामने कह दें. मैं अभी इस पद से इस्तीफा देने को तैयार हूं.

ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें सत्ता या पद से कोई लगाव नहीं है. उन्होंने कहा कि उनका एक ही संकल्प है कि सोने से भी अनमोल शिवसेना कभी भी चोरों या गद्दारों के हाथों में पिछले दरवाजे से नहीं जाने दी जानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई सच्चा शिवसैनिक नेतृत्व करने के योग्य है, तो वह आगे आए. वह उसके लिए पार्टी के नेता का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. 

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