'बीजेपी से बेहतर है कांग्रेस', उद्धव ठाकरे ने विलय के सवाल पर मन की बात भी बोल दी
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कार्यकर्ताओं को उनके आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे बहुत पहले ही आदेश दे चुके हैं. उनका इशारा इन दिनों वायरल हो रहे बाल ठाकरे के उस पुराने भाषण की ओर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'गद्दारों' की पिटाई की जानी चाहिए.

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में जो खलबली मची हुई है, उस पर अब खुद उद्धव का बयान आया है. उन्होंने 'ऑपरेशन लोटस' पर बात की, भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. बागी नेताओं के बयानों पर पलटवार किया. और इस्तीफे की बात करते हुए ये तक कहा कि वो किसी को भी शिवसेना प्रमुख बनाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने ये भी कहा कि अगर भाजपा को शिवसेना का साथ नहीं मिला होता तो बहुत पहले ही खत्म हो गई होती.
दिन- शुक्रवार, 19 जून. मौका- शिवसेना स्थापना दिवस. पार्टी के 60 साल पूरा हो गए हैं. इस अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था था. इंडिया टुडे से जुड़े मुस्तफा शेख की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि कार्यकर्ताओं को उनके आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे बहुत पहले ही आदेश दे चुके हैं. उनका इशारा इन दिनों वायरल हो रहे बाल ठाकरे के उस पुराने भाषण की ओर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘गद्दारों’ की पिटाई की जानी चाहिए.

इसके बाद उद्धव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "अगर इस तरह के 'ऑपरेशन' चलते रहे तो हमें भी "ऑपरेशन कमल" करना पड़ेगा." उन्होंने आरोप लगाया कि देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है. लोगों को चुनाव लड़ने के लिए नामांकन तक भरने नहीं दिया जा रहा है. उद्धव ने कहा,
इस्तीफा देने को तैयार“मेरी BJP को सलाह है कि अगर आप इसी तरह चलते रहे तो आपका कोई भविष्य नहीं है. युवाओं को कम मत आंकिए. उन्होंने हमें आजादी की लड़ाई दी थी और वे बड़े बदलाव भी ला सकते हैं.”
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि वो शिवसेना प्रमुख पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा,
“मैं किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना का प्रमुख बनाने के लिए तैयार हूं. मैं संघर्ष छोड़ने वाला नहीं हूं, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस पद के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूं, उसी दिन मैं यह जिम्मेदारी छोड़ दूंगा.”
इस बात पर वहां मौजूद शिवसैनिकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए और उद्धव से पार्टी प्रमुख बने रहने की अपील की.
'कॉकरोच' पर बातशिवसेना प्रमुख ने और भी मुद्दे छेड़े. बोले, "मैं कोई भविष्यवक्ता (fortune teller) नहीं हूं और न ही ज्योतिष में विश्वास करता हूं. लेकिन जिस देश में युवाओं को कॉकरोच कहा जाए, उसका भविष्य क्या होगा? चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जाया जा रहा है. इतना सब हासिल करने के बाद देश का क्या करेंगे? जेपी नड्डा ने कहा था कि देश में एक ही पार्टी रहेगी. वे 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की बात करते हैं, लेकिन उनका रास्ता 'वन पार्टी, नो इलेक्शन' की ओर बढ़ता दिख रहा है."

उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा, "उन्हें जिताने के लिए आपने मेहनत की थी. अब उन्हें जवाबदेह बनाने का अपना अधिकार इस्तेमाल कीजिए. किसानों ने चंदा दिया और ये उम्मीदवार जीतकर आए. मेरे आदेश का इंतजार मत कीजिए, उनसे सवाल पूछिए और उनका हिसाब मांगिए."
कांग्रेस पर क्या बोले?इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस पर भी बात की. उन्होंने कहा,
कांग्रेस-शिवसेना (UBT) का विलय होगा?"कांग्रेस के साथ हमारे मतभेद रहे हैं. बीजेपी की वजह से हमने कांग्रेस को अपना दुश्मन माना था. कांग्रेस ने हमारे नेताओं को तोड़ा, लेकिन कभी हमारा अपमान नहीं किया. उन्होंने कभी मातोश्री की आलोचना नहीं की. कांग्रेस ने हमेशा अपनी बात पर कायम रहने की कोशिश की. वे हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाली बीजेपी से बेहतर हैं. अगर शिवसेना ने बीजेपी का साथ नहीं दिया होता, तो बीजेपी बहुत पहले खत्म हो गई होती."
भले ही उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की तारीफ की, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना (UBT) के कांग्रेस में विलय की अटकलों को पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा कि उल्टा अब ऐसी स्थिति बन रही है कि बीजेपी को ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होना पड़ सकता है.
उद्धव ने कहा, "शिवसेना का जन्म किसी पार्टी में विलय होने के लिए नहीं हुआ था. इसका गठन मराठी लोगों के अधिकारों की रक्षा और हिंदुत्व के लिए हुआ था. कांग्रेस ने भी हमें परेशान किया है. हमारी आधी से ज्यादा राजनीतिक जिंदगी कांग्रेस के साथ दुश्मनी में बीती है. हमारे रिश्ते बेहद कटु रहे हैं."
उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़कर गए सांसद और उस्मानाबाद से सांसद रहे ओमराजे निंबालकर के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से उद्धव प्रचार के लिए नहीं निकलते, तो कम से कम आदित्य ठाकरे को मैदान में उतरना चाहिए. इसके जवाब में उद्धव ने कहा कि अगर वो प्रचार करने नहीं गए थे, तो फिर ओमराजे निंबालकर चुनाव कैसे जीत गए? इसके बाद उद्धव ने बागी सांसदों के लिए सवाल छोड़ा कि अब ये लोग विश्वासघात के पाप का प्रायश्चित कहां करेंगे और अपने माथे पर लगे गद्दारी के दाग को कैसे मिटाएंगे.
वीडियो: राजधानी: कब लिखी गई उद्धव ठाकरे की शिवसेना तोड़ने की स्क्रिप्ट?

