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उद्धव ठाकरे की नींद उनके इन 6 सांसदों ने उड़ा दी

Shiv Sena-UBT Crisis: उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना दोबारा टूट सकती है. मीटिंग में सांसदों का ना जाना इस दावे को मजबूत करता है. खबरें आ रही थीं कि 9 में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ सकते हैं. और ये 6 सांसद मीटिंग में शामिल भी नहीं हुए

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शिवसेना (UBT) की मीटिंग में कई सांसद शामिल नहीं हुए थे. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के छह सांसदों ने 18 जून की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जिसके कारण पार्टी के दोबारा टूटने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
  • मीटिंग में सांसदों की गैरहाजिरी और उनके अलग राजनीतिक रवैये के चलते पार्टी में आंतरिक मतभेद और विरोधाभास स्पष्ट हुए हैं।
  • इस स्थिति के कारण शिवसेना को आने वाले समय में संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना दोबारा टूट सकती है. मीटिंग में सांसदों का ना जाना इस दावे को मजबूत करता है. कैमरे पर भरपूर गालियां देने के बाद सांसद संजय राउत ने 18 जून की सुबह कहा कि जो सांसद मीटिंग में आ जाएं, वो बहुत बढ़िया, जो ना आए, वो बेईमान.

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खबरें आ रही थीं कि 9 में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ सकते हैं. और ये 6 सांसद मीटिंग में शामिल भी नहीं हुए. जिन सांसदों को संजय राउत ने ‘बेईमान’ कहा, उनके नाम हैं:

- संजय जाधव
- संजय देशमुख
- नागेश पाटिल आष्टीकर 
- भाऊसाहेब वाकचौरे
- संजय दीना पाटिल 
- ओमराजे निंबालकर

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ये वो सांसद हैं जिन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे का भरपूर साथ दिया था. लेकिन अब अगर ये सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ देते हैं तो पार्टी मुश्किल में पड़ सकती है. इन सांसदों के बारे में संक्षेप में जान लेते हैं.

संजय जाधव

इन्हें पार्टी के सबसे वफादार सांसदों में गिना जाता है. महाराष्ट्र में परभणी सीट से सांसद हैं. इन्हें बंदू जाधव के नाम से जाना जाता है. संजय जाधव ने 2004 में चुनावी राजनीति में कदम रखा था. 2014 में शिवसेना ने उन्हें परभणी लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने जीत हासिल की. फिर 2019 और 2024 में भी जीते.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तब तेज हुईं जब उन्होंने एक प्रोग्राम में कहा, ‘मैं आज आपके साथ हूं, कल क्या होगा, ये नहीं कह सकता.’

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संजय देशमुख

इनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तब तेज हुईं, जब इन्होंने उद्धव ठाकरे की बुलाई गई मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, मीटिंग में आने के बजाय इन्होंने केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात की.

संजय देशमुख को 'संजय भाऊ' के नाम से जाना जाता है. उन्होंने 1999 में शिवसेना छोड़ दी थी. दिग्रस विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. जीते और महाराष्ट्र की तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार में खेल राज्य मंत्री भी बने. इसके बाद कई सालों तक कांग्रेस से जुड़े रहे. 2017 में बीजेपी से जुड़ गए. बाद में बीजेपी छोड़कर फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना में वापस शामिल हो गए.

ये भी पढ़ें: उद्धव ठाकरे से बगावत करने वाले 6 सांसद कौन? शिंदे की पार्टी में जाएंगे या बीजेपी में?

2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें यवतमाल-वाशिम सीट से उम्मीदवार बनाया. संजय ने शिंदे गुट की उम्मीदवार राजश्री पाटिल को हराकर पहली बार लोकसभा चुनाव जीता.

नागेश पाटिल आष्टीकर

ये भी बैठक से गायब रहे. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी उद्धव ठाकरे को पहले ही दे दी थी. नागेश ने 2014 के विधानसभा चुनाव में हदगांव सीट से पहली बार विधायक का चुनाव जीता. 2015 में नांदेड़ जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक बने. 2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें हिंगोली सीट से उम्मीदवार बनाया. और उन्होंने जीत हासिल की.

भाऊसाहेब वाकचौरे

2009 में शिवसेना के टिकट पर शिर्डी से चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने थे. 2014 चुनाव से पहले कांग्रेस जॉइन कर ली थी. बाद में कांग्रेस भी छोड़ दी और कुछ समय तक बीजेपी नेताओं के करीब रहे. 2023 में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में लौट आए. 2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें शिर्डी से उम्मीदवार बनाया और वो चुनाव जीत गए. 

संजय दीना पाटिल

ये उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अब तक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने की खबरों का खुलकर विरोध किया है. संजय दीना पाटिल ने अपना अधिकांश पॉलिटिकल करियर एनसीपी में बिताया. 2019 में शिवसेना (यूबीटी) में शामिल हुए. 2024 लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर उन्होंने जीत दर्ज की थी.

ओमराजे निंबालकर

ओमराजे निंबालकर ने अपना पूरा राजनीतिक करियर शिवसेना में बिताया है. और 2022 में पार्टी टूटने के बाद भी उद्धव ठाकरे के साथ बने रहे. 2009 में शिवसेना के टिकट पर उस्मानाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने. 2019 में शिवसेना ने उन्हें उस्मानाबाद लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की. 2024 में शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें फिर उसी सीट से मैदान में उतारा और उन्होंने दूसरी बार जीत हासिल की.

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