बिहार कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. खांटी कांग्रेसियों को मौजूदा कांग्रेस का नया निजाम पसंद नहीं आ रहा है. आरोप लग रहे हैं कि जो धन-बल में मजबूत है, उसे बिहार में पार्टी के बड़े पद दिए जा रहे हैं. कवायद पूरी डिजिटल है. 50 रुपये वाले 3000 कांग्रेस सपोर्टर लाइए और बिहार स्टेट वाइस प्रेसिडेंट बन जाइए. प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के तत्वाधान में 'सृजन साथी जनसंपर्क' अभियान चल रहा है. इसी के तहत कांग्रेसियों को 50 रुपये वाले कांग्रेस सपोर्टर लाने के इनाम में पदभार बांटे जा रहे हैं.
बिहार में डेढ़ लाख में स्टेट वाइस प्रेसिडेंट बनो, कांग्रेस में पैसों के दम पर पद, सुनकर भड़के कांग्रेसी
Bihar Congress: अगर कोई कांग्रेसी 3000 'सृजन साथी' का रजिस्ट्रेशन कराता है, तो उसे बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है. 2000 'सृजन साथी' लाने वाले को बिहार कांग्रेस सचिव और 200 'सृजन साथी' लाने वाले को जिला स्तर पर पदाधिकारी बनने का मौका मिलेगा. इस मामले पर जब बवाल हुआ तो बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम की सफाई आई है.


बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (BPCC) के प्रेसिडेंट राजेश राम ने 11 अप्रैल को 'सृजन साथी जनसंपर्क' अभियान लॉन्च किया था. मकसद था राज्य में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना. एक 'ट्रांसपेरेंट और मजबूत डिजिटल सिस्टम' बनाना और संगठनात्मक पदों को जमीन से जुड़े और एक्टिव लोगों को देना.
बिहार कांग्रेस में पद पाने का नियमराजेश राम ने एक लेटर जारी किया था, जिसमें कांग्रेसियों को टारगेट दिए गए. इसमें बताया गया कि कितना टारगेट पूरा करने पर राज्य और जिला लेवल पर कौन सा संगठनात्मक पद मिलेगा. पार्टी कार्यकर्ताओं को ऐसे कांग्रेस सपोर्टर लाने के लिए कहा गया, जो 50 रुपये चुकाकर 'सृजन साथी' के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं.
इस प्रोग्राम में कांग्रेस का 'सृजन साथी' बनने की फीस 50 रुपये है, जो कांग्रेस की 10 रुपये की मेंबरशिप फीस से भी ज्यादा है. कांग्रेस के मौजूदा सदस्य और गैर-सदस्य इस प्रोग्राम के तहत 50 रुपये देकर 'सृजन साथी' बन सकते हैं.
3000 सृजन साथी, माने बिहार कांग्रेस उपाध्यक्षराजेश राम के लेटर के मुताबिक, अगर कोई कांग्रेसी 3000 'सृजन साथी' का रजिस्ट्रेशन कराता है, तो उसे बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है. 2000 'सृजन साथी' रजिस्ट्रेशन कराने वाले को बिहार कांग्रेस सचिव और 200 'सृजन साथी' रजिस्ट्रेशन कराने वाले को जिला स्तर पर पदाधिकारी बनने का मौका मिलेगा.
कांग्रेसियों में नाराजगीप्रोग्राम की यही 'खूबी' कई कांग्रेसियों की नाराजगी की वजह बन गई है. उनका कहना है कि ये पहल कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की बताई गई विचारधारा के खिलाफ है. कांग्रेस के सीनियर नेता और बिहार के कटिहार से लोकसभा सांसद तारिक अनवर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वे 'सृजन साथी जनसंपर्क' अभियान के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी के नियमों का 'उल्लंघन' करता है.

तारिक अनवर ने आगे कहा,
"मैं इस प्रोग्राम के खिलाफ हूं. संगठनात्मक पुनर्गठन के नाम पर नाकाबिल लोगों को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह इस आधार पर पद बांटने जैसा है कि कोई कितने मेंबर बना सकता है."
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोग्राम को 'एकतरफा' शुरू करने से पहले बिहार कांग्रेस के किसी भी सीनियर नेता से सलाह नहीं ली गई. 50 रुपये की फीस के बारे में पूछे जाने पर अनवर ने कहा, “यह पूरी तरह से गलत है और पार्टी के नियमों के खिलाफ है.”
राहुल-खरगे तक मामला पहुंचारिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के ऑफिस को बिहार कांग्रेस की इस कवायद के बारे में बता दिया गया है. पार्टी के एक सीनियर सांसद ने मल्लिकार्जुन खरगे के सामने 'सृजन साथी' की फीस का मुद्दा उठाया, तो खरगे ने इस पर हैरानी जताई है. सांसद ने बताया कि खरगे ने इस मामले को देखने की बात कही है.
एक अन्य सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा, "एक तरफ राहुल गांधी पार्टी को विचारधारा पर चलाने की बात करते हैं. दूसरी तरफ, बिहार कांग्रेस में ऐसा लग रहा है कि संगठनात्मक पद बेचे जा रहे हैं."
उन्होंने आगे कहा,
क्या बोले राजेश राम?"जिस किसी के पास भी अकूत पैसा है, वो 2000-3000 लोगों को एनरोल कर सकता है और सीनियर पद पर दावा कर सकता है. अगर कोई 3000 लोगों को एनरोल करने के लिए 1.5 लाख रुपये खर्च करता है और लिस्ट जमा करता है, तो वो बिना जांचे-परखे उपाध्यक्ष के तौर पर सिफारिश पाने के काबिल हो जाता है."
इन सभी आरोपों को बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम नकारते हैं. उन्होंने इस पहल को एक पायलट प्रोजेक्ट बताया है, जिसे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की मंजूरी मिली हुई है. उन्होंने कहा कि ये कोई 'सदस्यता अभियान' नहीं है, बल्कि संगठन को नए सिरे से गढ़ने की पहल है.

अगर कोई जनरल सेक्रेटरी बनना चाहता है तो उसे 50 रुपये खर्च करने वाले 2000 लोगों से सपोर्ट साबित करना होगा. वो भी बिहार कांग्रेस की मोबाइल ऐप पर पूरी डिजिटल प्रोसेस पूरी करके. राजेश राम के मुताबिक, इससे परख होती है कि कैंडिटेट के पास लोगों का कितना समर्थन है.
यह भी पढ़ें: बिहार में भ्रष्टाचार उजागर किया तो आधी रात पत्रकार के घर पहुंची पुलिस, बोली एल्कोहल टेस्ट करना है
राजेश राम ने कहा कि पहले लॉबी से पदाधिकारी बनते थे. पद लेने के लिए पार्टी के लोगों को पटना या दिल्ली के नेताओं की चौखट पर जाना पड़ता था. उन्होंने कहा कि अब लोगों का सपोर्ट साबित करके पद मिलता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से उन्हीं लोगों को ऐतराज है, जो लॉबी करके अपने चहेतों को पद नहीं दिला पा रहे.
वीडियो: पंचायत चुनाव में कांग्रेस जीती तो BJP कार्यकर्ता ने पूरे गांव का पानी रोक दिया









