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अन्नामलाई की पार्टी के आइकॉन होंगे एपीजे अब्दुल कलाम, वजह भी जान लीजिए

बीजेपी से अलग राह पकड़ते हुए के अन्नामलाई ने ‘वी द लीडर’ नाम से नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है, जो एपीजे अब्दुल कलाम की विचारधारा से प्रेरित होगा. अन्नामलाई का कहना है कि यह आंदोलन आगे चलकर राजनीतिक पार्टी बनेगा और 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगा.

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कलाम के आदर्शों पर पार्टी बनाएंगे अन्नामलाई. (फोटो- India Today)

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  • अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़कर नया राजनीतिक आंदोलन 'वी द लीडर' का गठन किया है, जिसका आदर्श और प्रतीक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम होंगे, और यह आंदोलन 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाग लेगा।
  • अन्नामलाई ने तमिल पहचान को भारतीय राष्ट्रवाद से जोड़ने की विचारधारा अपनाई है, और पार्टी बनाने का निर्णय बीजेपी में मतभेद और गठबंधन मुद्दों के कारण लिया गया।
  • यह आंदोलन सामाजिक बंटवारे और वंशवाद के विरोध में है, और इसका उद्देश्य वैज्ञानिक सोच, तमिल गौरव, राष्ट्रवाद, सुशासन और समग्र विकास को बढ़ावा देना होगा।

कांग्रेस के पास नेहरू-गांधी हैं. बीजेपी के पास श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय. समाजवादी पार्टी के पास जय प्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया की विचारधारा है. बीएसपी के पास बाबा साहेब आंबेडकर हैं. द्रविड़ मुनेत्र कझगम के पास पेरियार हैं. एआईएडीएमके के पास एमजीआर. ऐसे में बीजेपी छोड़कर तमिलनाडु में नया राजनीतिक आंदोलन छेड़ने का ऐलान करने वाले के अन्नामलाई किसके पीछे चलेंगे? 

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ये तो तय हो गया है कि अन्नामलाई नई पार्टी बनाएंगे. ये पार्टी 2031 का विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी, लेकिन इस नए दल का प्रतीक पुरुष कौन होगा?

बीजेपी से इस्तीफा मंजूर होने के बाद अपने पहले संबोधन में ही अन्नामलाई ने इसका जवाब दे दिया है. उन्होंने ऐलान किया है कि उनके आंदोलन की प्रेरणा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम होंगे. अपनी पार्टी के लिए अन्नामलाई ने जो आइकॉन चुना है, वो एकदम यूनिक हैं. कलाम अभी तक शायद किसी भी राजनीतिक पार्टी का प्रमुख आदर्श चेहरा नहीं रहे हैं. लेकिन अन्नामलाई ने ऐलान किया है कि उनका नया राजनीतिक आंदोलन भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बताए रास्तों पर चलेगा.

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'वी द लीडर' आंदोलन

अन्नामलाई ने बताया कि उनका आंदोलन ‘वी द लीडर’ के नाम से होगा. यह ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ के तहत काम करेगा, जिसे वह कोयंबटूर में स्थापित करेंगे. इसका मेन काम लीडरशिप, एथिक्स (नैतिकता) और ट्रेनिंग पर रिसर्च करना होगा. इस आंदोलन के आइकॉन अब्दुल कलाम होंगे. कलाम की तारीफ करते हुए अन्नामलाई ने उन्हें ‘प्राउड तमिल’ और ‘राष्ट्रवादी’ बताया.

कलाम को क्यों बनाया ‘आइकॉन’

अन्नामलाई लगातार तमिल पहचान को भारतीय राष्ट्रवाद के साथ जोड़ने की राजनीति करते रहे हैं. उन्होंने अक्सर ये कहा है कि तमिल विरासत पर गर्व करना और भारतीय राष्ट्र के प्रति निष्ठा रखना एक दूसरे की विरोधी बातें नहीं हैं बल्कि पूरक हैं. एक के बिना दूसरे का वजूद संभव नहीं. यही वजह है कि अन्नामलाई ने अपने नए आंदोलन को पूर्व राष्ट्रपति कलाम से जोड़ा है. उनको अपना वैचारिक आदर्श बनाकर अन्नामलाई ने अपनी राजनीति को राष्ट्रवाद, सामाजिक सद्भाव, तमिल पहचान के साथ-साथ विकास और वैज्ञानिक सोच के साथ भी जोड़ने की कोशिश की है.

बता दें कि अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति थे और उनका जन्म तमिलनाडु के धनुषकोडि जिले में हुआ था. ‘मिसाइल मैन’ के नाम से मशहूर कलाम भारत की राजनीति के उन चुनिंदा पर्सनैलिटीज में से एक हैं, जिन्हें लेकर धर्म, समाज और राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान दिया जाता है.

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क्या है आंदोलन का मकसद?

अपने आंदोलन के बारे में बताते हुए अन्नामलाई ने कहा कि यह समाज में बंटवारे, वंशवादी राजनीति और व्यक्ति पूजा का विरोध करेगा. साथ ही वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के अलावा तमिल गौरव, राष्ट्रवाद, सुशासन और समग्र विकास के मुद्दे पर आगे बढ़ेगा. अन्नामलाई ने यह खुलासा भी किया कि ये आंदोलन धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल के रूप में डेवलप होगा और साल 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हिस्सा भी लेगा.

बता दें कि कर्नाटक पुलिस में ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर रहे के अन्नामलाई ने नौकरी छोड़ बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया था. हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी से उनके मतभेद खुलकर सामने आए. खासतौर पर एआईएडीएमके से गठबंधन के मुद्दे पर अन्नामलाई की नाराजगी सतह पर दिखी. वह कई बार पार्टी की मीटिंग्स में भी गैर मौजूद रहे. हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली में अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करने के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया. 

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