महीने. 25 देश. 30 मीडिया संस्थान. 100 पत्रकार और, एक पर्दाफाश.
पर्दाफाश ये कि, इज़रायल में बैठे कुछ लोग दुनियाभर में लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं. वे विदेशों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री वाले चुनावों का नतीजा बदलवा रहे हैं. कैसे? फ़र्ज़ी सोशल मीडिया कैंपेन चलाकर, बोट्स के ज़रिए अफ़वाहें फैलाकर, फ़ोन और वेबसाइट हैक करवाकर आदि. ये तो कुछ ज्ञात तरीके हुए. लेकिन उनका कारनामा यहीं तक सीमित नहीं है. जो लोग ये काम कर रहे हैं, वे इज़रायल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (IDF), इज़रायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेत और विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर चुके हैं. इस ग्रुप के लीडर का नाम ताल हनान है. हनान IDF की एलीट यूनिट में था. वहां से निकलने के बाद उसने प्राइवेट सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस के बिजनेस में हाथ आजमाया. ये वाला काम वो दुनिया को दिखा रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल चल रहा था. हनान और उसकी टीम अवैध तरीके से सरकार बनाने और गिराने में मदद कर रही थी. उसके इस सीक्रेट धंधे के बारे में पब्लिक को कोई जानकारी नहीं थी. 15 फ़रवरी को ब्रिटिश अख़बार गार्डियन, इज़रायली अख़बार हारेत्ज़, फ़्रेंच अख़बार ला मोन्द, जर्मन मैगज़ीन डेर स्पीगल. अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट समेत 30 मीडिया संस्थानों ने वो सब खोलकर रख दिया, जिसे ताल हनान दुनिया से छिपा रहा था.
हनान क्या कुछ छिपा रहा था? जानेंगे आज दुनियादारी में.
दुनियादारी: इज़रायल की कंपनी ने फेक न्यूज फैलाकर चुनावों में धांधली करवाई, पूरी कहानी क्या है?
इस रिपोर्ट में गौरी लंकेश पर क्या खुलासा हुआ?
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