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4000 करोड़ रुपये का हर दिन नुकसान... हॉर्मुज पर अमेरिकी घेराबंदी ने ईरान की टेंशन बढ़ाई

ईरान का संभावित नुकसान इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी किलेबंदी कितनी मजबूत है. ये भी संभव है कि ईरान अपने तेल को होर्मुज की जगह, जास्क टर्मिनल से रूट करे. ये जगह होर्मुज के इलाके के बाहर है. 13 अप्रैल से शुरू हुई इस नाकाबंदी से ईरान में तेल, फर्टिलाइजर, खाने-पीने की चीजें और बाकी प्रोडक्ट्स की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है.

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ईरान का कई मिलियन बैरल तेल अभी समुद्र में ही अटका पड़ा है (PHOTO-X)

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच हुई बातचीत और उसके 'बेनतीजा' होने का असर अब दिखने लगा है. अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स की घेराबंदी शुरू कर दी है. उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद ईरानी पोर्ट्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है. होर्मुज पर ईरानी पोर्ट्स की नाकाबंदी से ईरान को हर दिन 43.5 करोड़ डॉलर (लगभग 4,081 करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है. 13 अप्रैल से शुरू हुई इस नाकाबंदी से ईरान में तेल, फर्टिलाइजर, खाने-पीने की चीजें और बाकी प्रोडक्ट्स की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है.

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लेकिन जानकारों के मुताबिक ईरान का नुकसान कई दूसरे कारणों पर भी निर्भर करता है. ईरान का संभावित नुकसान इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी किलेबंदी कितनी मजबूत है. ऐसे में नुकसान कुछ ऊपर-नीचे हो सकता है. ये भी संभव है कि ईरान अपने तेल को होर्मुज की जगह, जास्क टर्मिनल से रूट करे. ये जगह होर्मुज के इलाके के बाहर है. ऐसे में अमेरिकी ब्लॉकेड का असर कुछ कम हो सकता है.

शॉर्ट टर्म में होने वाले नुकसान की भरपाई पहले से ही समुद्र में मौजूद ईरानी तेल से होने की संभावना है. शिप ट्रैकिंग और ग्लोबल बिजनेस पर नजर रखने वाली वेबसाइट केप्लर के मुताबिक मार्च के अंत तक ईरान का लगभग 154 मिलियन बैरल तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर ही था. इस मामले पर वॉल स्ट्रीट जर्नल से बात करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के एक पूर्व अधिकारी मियाद मालेकी ने कहा,

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‘ईरान के पोर्ट्स की अमेरिकी घेराबंदी से ईरान को आर्थिक नुकसान में लगभग 435 मिलियन डॉलर प्रति दिन खर्च करने होंगे.’

उन्होंने कहा कि ईरान का अनुमानित घाटा लगभग 276 मिलियन डॉलर का हो सकता है. इसमें मुख्य रूप से कच्चे तेल और पेट्रो केमिकल्स शामिल हैं. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि मालेकी के अनुमान ईरान के लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल वाले दाम पर आधारित हैं. ये वो कीमत है जिस पर ईरानी तेल पूरे युद्धकाल के दौरान बिक रहा है. मालेकी के मुताबिक ईरान एक दिन में 1.5 मिलियन बैरल तेल इसी रेट पर एक्सपोर्ट कर रहा है. उन्होंने अपने डेटा को इस आधार पर बनाया है जिसमें 90 प्रतिशत ईरानी तेल खार्ग आईलैंड वाले रास्ते से आता है.

इसके अलावा इस ब्लॉकेड से चीन को ईरान से जाने वाली सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है. चीन अपने कच्चे तेल का 45 से 50 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का 30 प्रतिशत ईरान से आयात करता है. अनुमान है कि ट्रंप, चीन को भी इस दबाव अभियान में अपने साथ शामिल होने के लिए कह सकते हैं. लेकिन अब भी एक सवाल बना हुआ है कि क्या अमेरिकी नाकेबंदी उतनी प्रभावी होगी?

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वीडियो: ट्रंप ने होर्मुज की नाकेबंदी के लिए उतारी नेवी, ईरान भी तैयार है, अब क्या होगा?

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