चिट्ठियां, जो एक समय संवाद का इकलौता माध्यम हुआ करतीं थी. बीसवीं सदी में युद्धकाल में इनकी अहमियत बढ़ गई. उस दौर में संचार की इतनी सुविधाएं नहीं थी. सैनिकों को अगले पल का भी पता नहीं होता था. युद्ध के मैदान में बर्बरता और बर्बादी के अलावा कुछ नहीं दिखता था. इसके बावजूद सैनिकों ने अपनी प्रेमिकाओं और अपने घरवालों को प्यार भेजा. उम्मीद भेजी. जो नहीं भेज पाए, उन्होंने अपनी डायरी में लिखकर रखा. ताकि किसी दिन अपनी बात ख़ुद से पहुंचा पाएं. उनमें से अधिकतर अपना वादा पूरा नहीं कर पाए. वे युद्ध के मैदान से नहीं लौट सके. उन्हें ये पहले से पता था. फिर भी उन्होंने उम्मीद कायम रखी. ये अभूतपूर्व जीजिविषा का प्रतीक था. आज हम दोनों वर्ल्ड वॉर की कुछ चिट्ठियों की कहानियां सुनाएंगे. जानेंगे, कैसे ये चिट्ठियां इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन गईं? और, उन चिट्ठियों से युद्ध के बारे में क्या पता चलता है? देखें वीडियो.
दुनियादारी: वर्ल्ड वॉर की चिट्ठियों से युद्ध के बारे में क्या पता चलता है?
कैसे ये चिट्ठियां इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन गईं?
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