जावधपुर यूनिवर्सिटी में रैगिंग पीड़ित लड़के की मौत गिरकर हुई. या वो उस रात के ट्रॉमा को बर्दाश्त नहीं कर पाया और खुद को खत्म करने के लिए उसने छलांग लगा दी. या फिर उसे धकेला गया और उसकी हत्या कर दी गई. इन सारे सवालों की गुत्थियां पुलिस सुलझाएगी और अदालत सजा देगी. पर सवाल ये है जब रैगिंग के ऐसे संगीन मामले आ रहे हैं तो देश में रैगिंग के खिलाफ अलग से कोई कानून क्यों नहीं है.
दी लल्लनटॉप शो: पश्चिम बंगाल में रैगिंग की वजह से 17 साल के लड़के की मौत का जिम्मेदार कौन?
आज भी रैगिंग के खिलाफ कोई स्पेसिफिक कानून नहीं है.
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