एक बार आप सोचिए कि आपने एक यात्रा प्लान की है. आपने महीनों पहले टिकट करवा लिया. लेकिन आप स्टेशन पहुंचकर दंग रह गए. आप अपने डिब्बे लोगों की भीड़ के कारण अपनी सीट पर चढ़ ही नहीं पाए. एक और सिनेरीओ सोचिए. आप त्यौहार पर घर जाना चाह रहे. आपने चालू टिकट ली, लेकिन पूरी ट्रेन इतनी भरी थी कि आप नहीं चढ़ पाए. एक और दृश्य ये भी हो सकता है कि आप इतनी ज्यादा गाढ़ी और जल्दबाज भीड़ में सवार हुए कि आपका दम घुटते-घुटते बचा, आपके बीच का कोई साथी बेहोश हो गया, या अपनी जान गंवा बैठा. ये हो रहा है. देश की ट्रेनों में. देश के व्यावसायिक केंद्रों में. आज के शो में हम इन्हीं स्थितियों पर बात करेंगे.
दी लल्लनटॉप शो: वर्ल्ड कप और छठ पूजा के बीच रेलवे की हालत बुरी
इतनी प्लानिंग के बाद भी त्योहारों के समय रेलवे की व्यवस्था ढीली क्यों पड़ जाती है?
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