भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITMC) को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने तृणमूल की याचिका पर कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया. तृणमूल ने काउंटिंग टेबल पर केंद्र सरकार और सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट बनाने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट से TMC को झटका, बंगाल मतगणना में केंद्रीय कर्मियों की तैनाती पर SC का दखल से इनकार
Supreme Court TMC Hearing: तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की किसी के प्रति वफादारी नहीं मानी जा सकती. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट बनाने के ECI के कदम के खिलाफ TMC ने कोर्ट का रुख किया था.


शनिवार, 2 मई को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की स्पेशल बेंच ने TMC की याचिका पर सुनवाई की. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की किसी के प्रति वफादारी नहीं मानी जा सकती. कोर्ट ने कहा कि वे ऑफिशियल ड्यूटी के तहत काम करते हैं. तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने साफ किया कि पार्टी की चिंता राज्य सरकार के नॉमिनी की गैरमौजूदगी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट पूरी तरह से केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से हों, इसे गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि क्लॉज चुनाव आयोग के फ्रेमवर्क के तहत राज्य या केंद्र के अधिकारियों के पूल से चुनने की इजाजत देता है.
सुनवाई के दौरान बेंच ने रुख में बदलाव पर ध्यान दिया और कहा कि याचिका में शुरू में सर्कुलर को चुनौती दी गई थी, लेकिन अब इसे लागू करने की मांग की जा रही है. इस बीच, चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि वह सर्कुलर का ठीक से पालन कर रहा है. चुनाव आयोग ने कहा कि व्यवस्था के दौरान बैलेंस सुनिश्चित किया जाएगा, जहां काउंटिंग सुपरवाइजर केंद्र सरकार से है, वहीं काउंटिंग एजेंट राज्य सरकार से है.
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