यूनानी दार्शनिक अरस्तु ने कहा था कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, वह समाज के बिना नहीं रह सकता. राजस्थान के बाड़मेर में कुछ ऐसा ही देखना को मिला है. एक व्यक्ति ने जातीय पंचों द्वारा सामाजिक बहिष्कार किए जाने से परेशान होकर आत्महत्या कर ली. बाबूराम मेघवाल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि समाज में अब कोई उन्हें बुलाता नहीं, कोई उनके पास नहीं बैठता, इसलिए वे काफी परेशान हैं और जान दे रहे हैं. देखें वीडियो.
राजस्थान में पंचायत के तुगलकी फरमान से परेशान हो बंदे ने आत्महत्या कर ली
बाबूराम मेघवाल ने सुसाइड नोट में क्या लिखा है?
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