चुनावी बॉन्ड का डेटा रिलीज होने के बाद इस मुद्दे पर विदेशी मीडिया में भी काफी चर्चा हो रही है. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए लिखा कि भारत में राजनीति एक महंगा व्यापार है. जिसमें लाभ भी खूब मिलता है.डोनर की लिस्ट में अडानी ग्रुप का नाम नहीं है. जिस कंपनी की कीमत मोदी सरकार के आने के बाद हजार गुना बढ़ गई है. लिस्ट में मुकेश अंबानी का नाम भी नहीं दिखा. हालांकि, चंदा देने वाली कंपनी का कनेक्शन रिलायंस इंडस्ट्रीज से है. पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इस मुद्दे पर लिखा है कि वो विवादित स्कीम जिसकी मदद से प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़े युद्ध अभियान की शुरुआत की. और अपने प्रतिद्वंदियों को छोटा बना दिया. उस इलेक्टोरल बांड के डेटा को सार्वजनिक कर दिया गया. ब्रिटिश डेली दि गार्डियन ने लिखा है कि पारदर्शिता की कमी की वजह से इलेक्टोरल बॉन्ड को आलोचना का सामना करना पड़ा. इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन बीजेपी के लिए तगड़ा झटका है. पूरी खबर जानने के लिए वीडियो देखें.
इलेक्टोरल बॉन्ड पर विदेशी मीडिया ने क्या-क्या छापा है?
Election commision ने 14 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया था. इस मुद्दे पर विदेशी मीडिया की भी प्रतिक्रिया आई है. चुनावी बॉन्ड को लेकर विदेशी मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर हमलावर है.
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