चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं. इस यात्रा के दौरान उन्होंने एक बहुत ही अहम टिप्पणी की है. माना जा रहा है कि उनका ये कॉमेंट अमेरिका के लिए था. प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली सोच के लिए कोई जगह नहीं है. इस सोच को बहुत पहले ही छोड़ दिया जाना चाहिए था. उन्होंने ऐसे ग्लोबल सिस्टम की मांग की जो समान नियमों पर आधारित हो और जिसमें दोहरे मापदंड न हों.
'जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली सोच छोड़नी होगी', ब्रिक्स में जिनपिंग का निशाना किस पर था?
President Xi Jinping ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली सोच के लिए कोई जगह नहीं है. इस सोच को बहुत पहले ही छोड़ दिया जाना चाहिए था. उन्होंने ऐसे ग्लोबल सिस्टम की मांग की जो समान नियमों पर आधारित हो, और जिसमें दोहरे मापदंड न हों.

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और कई देशों के बीच तनाव का माहौल है. वेस्ट एशिया के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इसीलिए प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ग्लोबल ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका के रवैये को लेकर हमलावर रहे. प्रेसिडेंट जिनपिंग ने कहा,
'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देश) मल्टीपोलर दुनिया (कई ध्रुवों वाली दुनिया) की मुख्य ताकत के तौर पर उभर रहा है. बिना नियमों वाली दुनिया ट्रैफिक लाइट के बिना चौराहे जैसी होती है, जहां अफरातफरी और अव्यवस्था लगभग तय होती है.
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सबके लिए समान नियमों की मांगप्रेसिडेंट शी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों द्वारा मिलकर बनाए जाने चाहिए. उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन (rule of law) की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया. उन्होंने संप्रभु समानता, आंतरिक मामलों में दखल न देने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और ग्लोबल नियम सभी देशों पर बिना किसी दोहरे मापदंड के लागू होने चाहिए. उन्होंने कहा,
सभी देश, चाहे उनका आकार, ताकत या धन कुछ भी हो, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं.
प्रेसिडेंट शी ने इंटरनेशनल संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की मांग की है. उन्होंने ब्रिक्स देशों से संयुक्त राष्ट्र के अधिकार को बनाए रखने को कहा. साथ ही उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (WTO), इंटरनेशनल फाइनेंशियल ढांचे के साथ कई संस्थाओं में सुधार के लिए प्रयास का आग्रह किया है.
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