तमिलनाडु की चीफ मिनिस्टर जयललिता की तबियत खराब है. उनको बुखार और डिहाइड्रेशन हो गया था. इसी वजह से 22 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इधर जयललिता की हेल्थ को लेकर शहर, गांव, गली, मोहल्ले, सोशल मीडिया हर जगह अफवाहों का बाजार गर्म हो गया. लोग कहने लगे कि जयललिता नहीं रहीं. उनकी मौत हो गई है.
ये मुद्दा ज्यादा सेंसिटिव इसलिए भी था कि जब वो जेल गईं तो उसी दुःख में जाने कितने सुसाइड कर बैठे थे, कहीं कुछ अनहोनी हो गई तो जाने कितने मर रहेंगे.
हद तो तब हो गई जब खुराफाती लोगों ने विकीपीडिया को भी एडिट करने की कोशिश की. विकीपीडिया पर उनकी जानकारी वाले पेज को एडिट करने वाले लोगों की भरमार हो गई. लोगों ने झुंड बना कर एडिट करना शुरू कर दिया. तकते ही तकते विकीपीडिया पर एडिट वॉर चालू हो गया. एडिट करने का खेल फ्राइडे को 6 बजे सुबह स्टार्ट हो गया. जो कि दोपहर के 4.30 बजे को अपने पीक पे पहुंच गया. मिनट-मिनट में पेज एडिट किया जा रहा था.

लोगों का एक खेमा ये साबित करने लग गया कि जयललिता की डेथ हो चुकी है. वही दूसरा वाला खेमा ये बताने में लग गया कि डेथ की खबर वैलिड नहीं है. बहुत सारे लोग विकीपीडिया के पेज पर जाकर कॉलम लिखने लगे. वहां मेंशन करने लगे कि जयललिता की डेथ 30 सितम्बर को हो चुकी है.

असल में हुआ क्या था कि गुरुवार के सुबह को एक मेडिकल बुलेटिन अनोउंस किया गया. जिसमें कहा गया कि इलाज के के लिए जयललिता को कुछ दिन और हॉस्पिटल में रहना पड़ेगा. तभी से उनकी बीमारी और हेल्थ को लेकर तरह-तरह के अफवाह फ़ैलाने लगे. डीएमके के प्रेजिडेंट करुणानिधि ने राज्य सरकार को जयललिता की मेडिकल रिपोर्ट जारी करने की मांग की. इसे लोगों ने बड़े अजीब तरीके से लिया. और करुणानिधि की इस बात के बाद पॉलिटिक्स भी ज्यादा होने लगी. बात बढ़ते-बढ़ते इतनी पढ़ गई कि विकिपीडिया पर एडिट वॉर हो गया.
ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है