‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बारे में एक बात बहुत ही खास है. यहां से न सिर्फ तेल-गैस की बड़ी खेप गुजरती है. बल्कि इंटरनेट कनेक्शन के केबल्स भी यहां के समंदर में बिछे पड़े हैं. इन्हीं की बदौलत दुनिया के एक बड़े हिस्से को इंटरनेट सर्विस मिलती है. खबर है कि ईरान अब इन केबल्स को नुकसान पहुंचा सकता है. ईरान के दो सीनियर अधिकारियों ने बताया कि अगर अमेरिका और इजरायल फिर से ईरान पर हमला करते हैं तो ईरान समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट वाली केबलों को निशाना बनाएगा.
इंटरनेट की नस काटने की तैयारी में ईरान, अमेरिका को दी धमकी- 'आग से मत खेलो'
दो ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के नए हमले की स्थिति में ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बना सकता है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ का हिस्सा 1% से भी कम है.

इसके लिए ईरान ने एक बड़ी योजना तैयार कर ली है. इससे पहले भी ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत विफल हो जाती है और कोई नया संघर्ष शुरू होता है तो इस क्षेत्र में समुद्र के नीचे मौजूद केबल्स हमले का निशाना बन सकती हैं.
इंटरनेट को ठप कर देगा ईरानअपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर दो ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स से बात की. उन्होंने यह तो नहीं बताया कि ईरान किस तरह या कहां हमले करेगा. लेकिन उनमें से एक ने कहा कि ईरान का मकसद यह होगा कि हमले के बाद केबलों की मरम्मत न हो सके. इंटरनेट कनेक्शन समेत कम्युनिकेशन को लंबे समय तक बाधित रखना ही उनका टारगेट है. अधिकारियों में से एक ने कहा,
अगर ईरान पर हमला होता है, तो फिर कोई 'रेड लाइन' (सीमा) नहीं बचेगी. समुद्र के नीचे बिछी केबलों से लेकर सैन्य ठिकानों तक, यहां तक कि गुप्त ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है.
अधिकारी ने अमेरिका को ‘आग से न खेलने’ की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि ईरान की समुद्र के नीचे मौजूद इन केबलों तक पूरी पहुंच है और वह आसानी से उन्हें नष्ट कर सकता है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप-प्रमुख यादुल्लाह जवानी ने कहा कि अगर ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है.
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UN की एजेंसी, 'इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन' के मुताबिक दुनिया भर का लगभग 99% इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबलों के जरिए ही आता-जाता है. हालांकि, टेलीकम्युनिकेशन रिसर्च फर्म 'टेलीजियोग्राफी' के रिसर्च डायरेक्टर एलन मौल्डिन का कहना है कि ईरान द्वारा किए जाने वाले ऐसे हमलों का वैश्विक असर सीमित हो सकता है. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का 1% से भी कम हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होकर गुजरता है.
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जानकारों का कहना है कि कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाएं धीमी हो सकती हैं. वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स तथा क्लाउड कंप्यूटिंग में बाधा आ सकती है. इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑपरेटर ट्रैफिक को किस तरह दूसरे रास्तों (रिरूट) से भेजते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के समय कनेक्शन बहाल करना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा, इंश्योरेंस की अधिक लागत और समुद्री क्षेत्र में प्रवेश के लिए परमिट मिलने में देरी होने से मरम्मत का काम और भी जटिल हो सकता है.
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