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IIT-BHU यौन उत्पीड़न के आरोपियों के घर क्यों नहीं चला योगी सरकार का बुलडोजर? पुलिस का जवाब आया

विपक्ष सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर ये आरोप लगाता रहा है कि वो अपनी पार्टी से जुड़े आरोपियों पर नरमी रखती है. इस मामले में भी यही कहा गया, कि पहले तो गिरफ़्तारी में इतने दिन लगे, फिर गिरफ्तारी के बाद भी उनके घरों पर बुलडोज़र नहीं चला.

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IIT-BHU यौन उत्पीड़न केस के आरोपी. (फ़ोटो - सोशल)

पिछले साल नवंबर में IIT-BHU में बीटेक सेकंड ईयर की छात्रा का यौन उत्पीड़न रिपोर्ट किया गया था. इस केस में तीनों आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया. उनका 'BJP कनेक्शन' होने का दावा किया जाता है. अब दो को हाई कोर्ट ने ज़मानत दे दी है. इसके बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवाल उठे, आरोप लगे. कहा गया कि जो योगी सरकार ‘त्वरित कार्रवाई, तुरंत न्याय’ वाले फ़ॉर्मूले पर चलने के लिए चर्चित है, उसने इस मामले में ‘पक्षपात’ किया है. वहीं जब पुलिस से पूछा गया कि कार्रवाई में ढिलाई क्यों की, तो उसने अपना जवाब दे दिया है.

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क्या था मामला?

नवंबर, 2023. एक और दो तारीख़ की दरमियानी रात. बनारस हिंदू विश्विद्यालय (BHU) की एक छात्रा अपने एक साथी के साथ कैंपस में ही कहीं जा रही थी. कृषि संस्थान के पास एक सुनसान जगह पर कुछ बाहरी युवकों ने दोनों को घेर लिया. उन्होंने कथित तौर पर छात्रा का यौन उत्पीड़न किया. पीड़िता ने बताया कि उन लोगों ने जबरन उनके ‘कपड़े उतरवाए, उन्हें पीटा, मोबाइल छीना और उनकी तस्वीर भी खींचीं’.

छात्रा के उत्पीड़न के बाद से BHU के छात्रों ने एक बड़ा आंदोलन किया था. CCTV फ़ुटेज और पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने 30 दिसंबर, 2023 की जांच के बाद तीनों आरोपी को गिरफ़्तार किया. अभिषेक चौहान, कुणाल पांडेय और सक्षम पटेल. बताया गया कि तीनों आरोपी BJP IT सेल से जुड़े थे. हालांकि, घटना के बाद पार्टी ने तीनों को निष्कासित कर दिया था.

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ये भी पढ़ें - IIT BHU गैंगरेप आरोपियों की गिरफ्तारी में कैसे लग गए 60 दिन? 

विपक्ष सत्तारूढ़ BJP सरकार पर ये आरोप लगाता रहा है कि वो अपनी पार्टी से जुड़े आरोपियों पर नरमी रखती है. इस मामले में भी यही कहा गया, कि पहले तो गिरफ़्तारी में इतने दिन लगे, फिर गिरफ्तारी के बाद भी आरोपियों के घरों पर बुलडोज़र नहीं चला.

ये आरोप आज तक लगाया जाता है. इस पर अभी तक प्रशासन का कोई बयान नहीं आया है, मगर पुलिस ने टिप्पणी की है. वाराणसी के काशी ज़ोन के DCP गौरव बांसवाल ने बताया कि इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया था और चार्जशीट पेश करने के दौरान उन पर गैंगस्टर ऐक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी.

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बुलडोज़र की कार्रवाई क्यों नहीं की? इस सवाल पर DCP बंसवाल ने कहा,  

“बुलडोज़र की कार्रवाई एक सिविल मैटर है. प्रशासन अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई करता है. पुलिस के अधिकार क्षेत्र में बुलडोज़र जैसी कोई कार्रवाई नहीं है.”

पुलिस के हाथ में है घर तोड़ना?

‘बुलडोज़र ऐक्शन’ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लगाई गई हैं. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बुलडोज़र का इस्तेमाल सज़ा के तौर पर किया जा रहा है. ख़ास तौर पर अल्पसंख्यकों और हाशिए पर पड़े समुदायों के ख़िलाफ़. उनकी मांग है कि कोर्ट इन कार्रवाइयों को रोके और सुनिश्चित करे कि ये केवल क़ानूनी तौर पर किए जाएं.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले में कहा कि अगर कोई आदमी किसी मामले में दोषी भी ठहरा दिया जाए, तो भी उसका घर नहीं गिराया जा सकता. 

इसी केस में जिरह करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ख़ुद अदालत के सामने कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इसलिए नहीं गिराई जा सकती, क्योंकि वो किसी आपराधिक मामले में शामिल है या दोषी है. ऐसा केवल नगरपालिका क़ानूनों के प्रावधानों के तहत ही किया जा सकता है.

वीडियो: लखनऊ में सैकड़ों मकानों पर फिर चलेगा बुलडोज़र, रोती महिलाओं ने योगी सरकार पर क्या आरोप लगाए?

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