केंद्र सरकार संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है. इसके लिए 16 मार्च से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. इससे एक दिन पहले 15 अप्रैल को राहुल गांधी ने इन प्रस्तावों पर हमला बोलते हुए इसे ‘सत्ता कब्जाने की कोशिश’ बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार डिलिमिटेशन (परिसीमन) और जेरीमेंडरिंग (चुनावी क्षेत्रों में फेरबदल) के जरिए सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है.
'इसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं', विशेष सत्र से पहले राहुल गांधी का बड़ा हमला
केंद्र सरकार संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए एक संवैधानिक विधेयक पेश करने जा रही है. इसके लिए 16 मार्च से संसद में तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है.


संसद में तीन दिन (16, 17 और 18 अप्रैल) के विशेष सत्र की शुरुआत से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी है. उन्होंने वीडियो जारी करते हुए बताया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह से समर्थन करती है, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से महिला आरक्षण का समर्थन करती है. उन्होंने याद दिलाया कि संसद ने साल 2023 में महिला आरक्षण बिल को सर्वसम्मति से पास किया था. ये हमारे संविधान का हिस्सा है. लेकिन मौजूदा प्रस्ताव का महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा,
सरकार जो संशोधन ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना देना नहीं है. यह परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों में मनमाने ढंग से फेरबदल के जरिए सत्ता हथियाने की साजिश है.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साल 2026 में हो रही जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसमें ओबीसी का आंकड़ा नहीं है. कांग्रेस नेता ने कहा,
अगर आप (प्रधानमंत्री) महिला आरक्षण अधिनियम लागू करना चाहते हैं, तो आपके पास एक अधिनियम पड़ा हुआ है, उसे लागू कीजिए. हम पूरा समर्थन करेंगे. मगर हम आपको ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्सों की चोरी नहीं करने देंगे. हम दक्षिण भारतीय राज्यों और छोटे राज्यों के खिलाफ किसी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे.
केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने का प्रावधान है, ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके. इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33 फीसदी महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाने की योजना है.
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