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बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, कहा- आरोपी का घर गिरा देना सही नहीं

Supreme Court On Bulldozer Actions: 'बुलडोजर एक्शन' के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 2 सितंबर को सुनवाई हुई. कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई किसी केस में दोषी भी हो, तो भी उसका घर नहीं गिराया जा सकता.

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2 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 2 सितंबर 2024, 02:53 PM IST)
Supreme Court On Bulldozer Actions
जस्टिस गवई ने कहा कि कोर्ट अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण नहीं देगा, लेकिन कुछ दिशा-निर्देश भी जरूरी हैं. (फोटो: आजतक)
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सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों में प्रशासन की ओर से किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' लिए जाने पर चिंता जाहिर की है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सोमवार, 2 सितंबर को विभिन्न राज्यों में 'बुलडोजर एक्शन' को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. बेंच ने कहा है कि सिर्फ आरोपी होने के आधार पर किसी के घर को गिराना सही नहीं है. कोर्ट ने कई राज्यों में प्रशासन की ऐसी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोषी भी है, तो भी उसके घर को गिराया नहीं जा सकता.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने कहा,

"सिर्फ इसलिए घर कैसे गिराया जा सकता है कि वो आरोपी है? अगर वो दोषी भी हो तो भी उसका घर नहीं गिराया जा सकता."

जस्टिस गवई ने कहा कि कोर्ट अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण नहीं देगा, लेकिन कुछ दिशा-निर्देश भी जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि भले ही कोई निर्माण अनधिकृत हो, लेकिन फिर भी उसे ढहाने की प्रक्रिया 'कानून के मुताबिक' होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें- उदयपुर: चाकू मारने वाले के 'घर' चला बुलडोजर, पर इस मकान का मालिक तो कोई और निकला

इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि राज्य का रुख उसके हलफनामे से साफ है. तुषार मेहता ने हलफनामा पढ़ते हुए कहा,

"किसी भी अचल संपत्ति को इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका मालिक/कब्जाधारी अपराध में शामिल है."

मेहता ने कहा कि याचिका में यूपी सरकार के खिलाफ जिन मामलों का उल्लेख है, उनमें म्यूनिसिपल कानूनों का पालन किया गया है. जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई, उसकी वजह अवैध कब्जा या निर्माण था. संबंधित व्यक्तियों को इसका नोटिस भेजा गया था और चूंकि उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, इसलिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया.

वहीं इस मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन की ओर से सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने दलील दी. उन्होंने कहा कि अप्रैल 2022 में दंगों के तुरंत बाद दिल्ली के जहांगीरपुरी में कई लोगों के घर इस आरोप में तोड़ दिए गए कि उन्होंने दंगे भड़काए थे. सीनियर एडवोकेट चंद्र उदय सिंह ने उदयपुर के एक मामले का हवाला दिया, कहा कि एक व्यक्ति का घर इसलिए ढहा दिया गया क्योंकि उसके किरायेदार के बेटे पर एक अपराध का आरोप है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में एक गाइडलाइन तैयार करने की बात कही है. इसके लिए संबंधित पक्षों से सुझाव देने को कहा गया है. इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी.

वीडियो: सांप्रदायिक भीड़ ने की बुलडोजर की मांग, पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया

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