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ट्रंप फोन पर पत्रकार से बोले- 'आप वहीं रुकी रहिए', ईरान से अगली बातचीत की जगह बता दी!

प्रेसिडेंट ट्रंप New York Post की एक रिपोर्टर कैटलिन डोर्नबुश से बात कर रहे थे. कैटलिन पहले राउंड की बातचीत कवर करने इस्लामाबाद पहुंची थीं. बातचीत खत्म होने के बाद ट्रंप ने अब उन्हें दोबारा कॉल किया.

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पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता को इस्लामाबाद टॉक्स नाम दिया गया है (PHOTO-AFP)

ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर पाकिस्तान में बातचीत हो सकती है. 14 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक ऐसी बात कह दी, जिससे पूरी दुनिया की निगाह फिर से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिक गई है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई पीस टॉक अगले दो दिनों में यहीं इस्लामाबाद में फिर शुरू हो सकती है.

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प्रेसिडेंट ट्रंप New York Post की एक रिपोर्टर कैटलिन डोर्नबुश से बात कर रहे थे. कैटलिन पहले राउंड की बातचीत कवर करने इस्लामाबाद पहुंची थीं. बातचीत खत्म होने के बाद ट्रंप ने उन्हें दोबारा कॉल किया और कहा,

‘आप वहीं रुकी रहिए. अगले दो दिन में हम फिर से वहीं जाने के मूड में हैं.’

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इसके अलावा ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर तारीफ की और कहा कि वो शानदार काम कर रहे हैं. यही वजह है कि बातचीत के फिर से शुरू होने की संभावना बढ़ गई है. मुनीर को पाकिस्तान की सत्ता का बेहद ताकतवर चेहरा माना जाता है. ट्रंप उन्हें पहले भी फेवरेट फील्ड मार्शल कह चुके हैं. साथ ही ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से भी आसिम मुनीर के अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं.

14 अप्रैल को एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद तो है, लेकिन इसमें ट्रंप के बताए दो दिन से थोड़ा ज्यादा वक्त लग सकता है. उनके शब्द में कहें तो, ‘द गेम  इज ऑन.’ असल में, इस्लामाबाद पर एक तरह की टाइमिंग का दबाव भी है. 22 अप्रैल, बुधवार को दो हफ्ते का सीजफायर खत्म हो रहा है. कोशिश ये है कि उससे पहले बातचीत का एक और दौर हो जाए, ताकि हालात फिर से बिगड़ने से बच सकें.

U.S. Vice President JD Vance, center, walks with Pakistan's Chief of Defence Forces and Chief of Army Staff Field Marshall Asim Munir, left, and Pakistani Deputy Prime Minister and Foreign Minister Mohammad Ishaq Dar after arriving for talks with Iranian officials in Islamabad, Pakistan, Saturday, April 11, 2026.
अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस का पाकिस्तान में स्वागत करते फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (PHOTO-AP)

11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चली थी. उम्मीद थी कि इस दौरान कोई रास्ता निकलेगा, लेकिन 12 अप्रैल की सुबह मामला पलट गया. अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस बातचीत बीच में छोड़कर बाहर आ गए. उनका कहना था कि ईरान ने ये साफ-साफ नहीं कहा कि वो न्यूक्लियर वेपन बनाने की कोशिश नहीं करेगा. दूसरी तरफ जैसे ही पीस टॉक हुई, ट्रंप ने ईरान के खाड़ी वाले पोर्ट पर जाने वाले जहाजों के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया. ये फैसला तब आया जब ईरान ने होर्मुज को बंद करने की बात कही थी.

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हमले के बाद से होर्मुज बंद

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था. हमले के बाद ईरान होर्मुज को लगभग बंद कर चुका है. इसका असर दुनिया भर में दिखा. यही वो रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और LNG गुजरता है. रास्ता बंद होते ही तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. लेकिन, जैसे ही बातचीत फिर शुरू होने की खबरें आईं, कीमत थोड़ी गिरकर करीब 95 डॉलर तक आ गई. The Guardian ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के हवाले से बताया कि 24 घंटे में कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी पार नहीं कर पाया. छह जहाजों को रास्ता बदलकर वापस ईरानी पोर्ट्स की तरफ जाना पड़ा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स ये कहती हैं कि Rich Starry नाम का एक टैंकर बाद में वापस मुड़ा और रास्ता पार कर गया.

इधर, इस पूरे तनाव का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा. इजरायल और लेबनान के बीच भी टकराव बढ़ गया. ईरान के समर्थन में हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट हमले किए हैं. इसके जवाब में इजरायल ने बेरूत समेत कई शहरों पर बमबारी की है. साथ ही दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना भी सरहद पार कर लेबनान में घुस चुकी है. वहीं, वॉशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच पहली बार सीधी बातचीत हुई. अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे प्रोडक्टिव बताया, लेकिन हिज्बुल्लाह ने कहा है कि वो किसी भी समझौते को नहीं मानेगा.

यानी अब बात फिर से इस्लामाबाद पर आकर टिक गई है. सबसे बड़ा सवाल है दिक्कत कहां है? अमेरिका चाहता है कि ईरान 20 साल तक यूरेनियम एनरिटमेंट पूरी तरह बंद कर दे. लेकिन ईरान इसके बदले 5 साल से कम की रोक की बात कर रहा है.

उधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी 15 अप्रैल को सऊदी अरब, तुर्की और कतर के दौरे पर निकलने वाले हैं. उनका मकसद है, शांति प्रक्रिया के लिए समर्थन जुटाना, होर्मुज को फिर से खोलने का रास्ता निकालना और ईरान की जंग हर्जाने की मांग पर चर्चा करना. लेकिन अगर इस्लामाबाद में बातचीत जल्दी शुरू हो गई, तो उनको अपना ये दौरा बीच में ही खत्म करना पड़ेगा.

वीडियो: ट्रंप ने होर्मुज की नाकेबंदी के लिए उतारी नेवी, ईरान भी तैयार है, अब क्या होगा?

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