The Lallantop

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लड़के की बंदूक के साथ तस्वीर, सच क्या है?

मन्नन बशीर वनी पीएचडी छोड़कर उग्रवादी बन गया या मिसिंग है...

Advertisement
post-main-image
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मन्नन वनी के बारे में कहा जा रहा है कि वो उग्रवादियों से जा मिला है.
बड़ी मायूसी होती है जब एक बेहद काबिल इंसान इतना टूट जाता है कि ऐसे किसी रास्ते पर निकल पड़े, जहां से लौटना संभव नहीं. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक बेहद काबिल रिसर्च स्कॉलर के मामले में भी शायद ऐसा ही है. वॉट्सऐप पर चल रही कुछ तस्वीरों में अप्लाइड जियोलॉजी में पीएचडी कर रहा मन्नन बशीर वनी अंडर बैरल रॉकेट लॉन्चर लगी ऑटोमैटिक राइफल के साथ नज़र आ रहा है. कहा जा रहा है कि कुपवाड़ा से आने वाले मन्नन ने हथियार उठा लिए हैं और 5 जनवरी, 2017 को हिजबुल मुजाहिदीन से जा मिला है.
कौन है मन्नन बशीर वनी
मन्नन कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा से आता है. उसने जियोलॉजी और अर्थ साइंस में कश्मीर यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन किया था. इसके बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजुएशन और एमफिल किया. फिर यहीं पीएचडी शुरू की. टॉपिक था ''स्ट्रक्चरल एंड जियो-मॉर्फोलॉजिकल स्टडी ऑफ लोलब वैली, कश्मीर.''
मन्नन वनी एक रिसर्स पेपर पेश करते हुए. (फोटोः एएमयू)
मन्नन वनी एक रिसर्च पेपर पेश करता हुआ. (फोटोः एएमयू)

मन्नन में काबिलियत की कोई कमी थी, ऐसा कतई नहीं लगता. उसने भोपाल में हुई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर, एन्वायरमेंट, एनर्जी एंड सोसायटी (ICWEES) में अपना एक रिसर्च पेपर - '' फ्लड रिस्क असेसमेंट ऑफ लोलब वैली फ्रॉम वॉटरशेड अनालिसिस यूज़िंग रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस टेक्नीक्स '' पेश किया. इस कॉन्फ्रेंस में अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और चीन सहित दुनिया के 20 देशों से 400 डेलिगेट्स आए थे. कॉन्फ्रेंस में सबसे बेहतरीन पेपर प्रेज़ेंटेशन के इनाम का ऐलान हुआ, तब मन्नन का नाम आया.
मन्नन का ट्विटर अकाउंट और ब्लॉग इस बात की गवाही देते हैं कि उनमें वो विज्ञान के उन छात्रों में से नहीं था, जो अपने इर्द-गिर्द की दुनिया से कटे हुए होते हैं. मिसाल के लिए उसका ट्विटर इंट्रो - 'प्रिज़नर ऑफ पैराडाइज़', तीन शब्दों में न जाने कितना कुछ कह जाता है. मन्नन सिर्फ जियोलॉजी की किताबें ही नहीं पढ़ रहा था. अपने ब्लॉग 'Words Matter' में वो मीरवाइज़ उमर फारूक को लताड़ने के लिए जॉनथन स्विफ्ट को कोट करते हुए अपनी बात शुरू करत है. और ब्लॉग पर सिर्फ राजनीति या छात्रों से जुड़े मुद्दे ही नहीं हैं, सटायर भी हैं. मन्नन के कुछ लेख वेब पोर्टल्स पर छपे थे. ज़्यादातर छात्रों के मुद्दों से जुड़े ये लेख द कंपैनियन डॉट इन पर उपलब्ध हैं.
नाइट पैक डलवाकर प्रेमियों से बात करने वालों पर मन्नन का लिखा व्यंग्य.
नाइट पैक डलवाकर प्रेमियों से बात करने वालों पर मन्नन का लिखा व्यंग्य.

हिजबुल वाली बात फिलहाल तय नहीं है
ये फिलहाल तय नहीं है कि मन्नन सचमुच उग्रवादियों से मिल गया या नहीं. कश्मीर के आईजी ने इंडिया टुडे से कहा है कि मन्नन को फिलहाल गुमशुदा माना जा रहा है और ऐसा भी हो सकता है कि मन्नन की तस्वीर को फोटोशॉप किया गया हो. मन्नन 2 जनवरी तक अपने हॉस्टल में था. गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद पुलिस मन्नन को दिल्ली में भी तलाश रही है, क्योंकि वो आखिरी बार वहीं देखा गया था. एनडीटीवी के मुताबिक मन्नन अलीगढ़ से कुपवाड़ा के लिए निकला था और पांच तारीख को घर पहुंच जाना चाहिए था.
कंपैनियन डॉट इन पर छपे मन्नन के लेख.
कंपैनियन डॉट इन पर छपे मन्नन के लेख.

इंडियन एक्सप्रेस में मन्नन के भाई मुबशीर का बयान छपा है. मुबशीर का कहना है मन्नन महीने भर पहले कुपवाड़ा से अलीगढ़ के लिए निकला था. तब से परिवार यही मानकर चल रहा है कि मन्नन अलीगढ़ में है. वो नियमित रूप से घर पर फोन करता था, लेकिन 4 जनवरी, 2017 के बाद से उसका फोन बंद आने लगा. परिवार को लगा कि मन्नन का फोन या तो खराब हो गया है या चोरी हो गया है. लेकिन जब 2 दिन बीत गए, तो उन्होंने 6 जनवरी को मन्नन के गुमशुदा होने की पुलिस रिपोर्ट फाइल करा दी.
इस तस्वीर के आधार पर कहा जा रहा है कि मन्नन उग्रवादी बन गए हैं
इस तस्वीर के आधार पर कहा जा रहा है कि मन्नन उग्रवादी बन गया है

दी लल्लनटॉप ने अलीगढ़ के सिटी एसपी अतुल कुमार श्रीवास्तव से मन्नन के बारे में बात की. उन्होंने बताया,
''मन्नन पिछले कुछ दिनों से अपने हॉस्टल में नहीं था. उसके आतंकी संगठन से जुड़े होने की खबर आने के बाद उसके कमरे की तलाशी ली गई है और वहां मौजूद कागज़ात सीज़ किए गए हैं. फिलहाल जांच चल रही है और पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है.''
थलसेना अध्यक्ष बिपिन रावत का मन्नन पर बयान आया है - कभी-कभी काबिल लोग भी गुमराह हो जाते हैं.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मन्नन का हॉस्टल. यहां छापा पड़ा है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मन्नन का हॉस्टल. यहां छापा पड़ा है.

मन्नन को ढूंढा जा रहा है. वो जब मिलेगा तब मालूम चलेगा कि वो कहां था और क्या सचमुच वो उग्रवाद की राह पर था. लेकिन मन्नन के बहाने उन हज़ारों काबिल कश्मीरियों के बारे में सोचा जाना चाहिए जिन्होंने हथियार उठाए. वो क्या परेशानी रहती होगी, जो कश्मीर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर भी वो भूल नहीं पाते. मन्नन या उस जैसों के बारे में सोचकर ही हम उन कश्मीरियों को समझ पाएंगे जिन्होंने हथियार उठा रखे हैं, और फिर तब शायद ये तय कर पाएंगे कि आइंदा किसी कश्मीरी को एक बढ़िया करियर छोड़कर हथियार न उठाने पड़ें.


ये भी पढ़ेंः

कश्मीर: क्यों इस बेइंतहा खूबसूरत जगह पर एक भी सिनेमाघर नहीं है

Advertisement

CRPF कैंप पर हमला करने वाले 16 साल के आतंकी का वीडियो सामने आया है

महबूबा मुफ़्ती के भाई कुत्ते के नाम पर शपथ ले रहे थे

Advertisement
Advertisement