थॉमस जोनाथन ओसॉफ. ये नाम याद कर लीजिए. 38 साल का ये डेमोक्रेट सीनेटर डॉनल्ड ट्रंप के लिए सीधी चुनौती हो सकता है. अमेरिका की राजनीति में प्रभाव ऐसा है कि लोग उसमें अमेरिका का अगला राष्ट्रपति देख रहे हैं. हाव-भाव, भाषण देने की कला और जनता से कनेक्ट होने के उनके तरीके की वजह से लोगों को वो ‘बराक ओबामा’ लगते हैं.
कौन हैं जॉन ओसॉफ जिन्होंने डॉनल्ड ट्रंप से जॉर्जिया छीन लिया?
जॉर्जिया से दोबारा सीनेटर चुने गए 38 साल के डेमोक्रेट जॉन ओसॉफ की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से हो रही है. उनके भाषण देने के अंदाज, युवाओं से जुड़ाव और चुनावी जीत के बाद 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.

साल 2021 में जब डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर जॉन ओसॉफ पहली बार जॉर्जिया से अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे, तब राजनीतिक एक्सपर्ट्स ने कहा कि वह ‘एक्सीडेंटल सीनेटर’ हैं. यानी संयोग से चुनाव जीत गए हैं. इसकी वजह ये थी कि ओसॉफ बहुत मामूली अंतर से चुनाव जीते थे. लेकिन इसके 5 साल बाद करिश्मा करते हुए वो उस जॉर्जिया से अपनी सीट बचाने में सफल रहे, जहां के लोगों ने 2024 में डॉनल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुना था.
ये बहुत मुश्किल काम है. इसे ऐसे समझिए कि अमेरिकी सियासत में माना जाता है कि जिस राज्य के लोगों ने रिपब्लिकन का राष्ट्रपति चुना हो, वहां से डेमोक्रेट्स का जीतना तकरीबन नाममुकिन है. फिर भी ओसॉफ ने इस बार के चुनाव में जॉर्जिया से निर्णायक जीत हासिल कर ली. ये जीत इतनी बड़ी है कि इसने ओसॉफ को डेमोक्रेटिक पार्टी के सबसे चर्चित उभरते नेताओं में शामिल कर दिया. बात तो उन्हें अगले राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार बनने तक चली गई.
ओसॉफ की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से की जाती है. ओबामा ने खुद भी उनकी कई बार तारीफ की है. दोनों के राजनीतिक गुरु एक हैं और इसकी वजह से भी वो ओबामा के चहेतों की लिस्ट में हैं. अब जॉर्जिया से दोबारा जीत के बाद 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनके उतरने की अटकलें भी तेज हो गई हैं.

ओबामा की स्पीच देने की कला की दुनिया मुरीद है. पानी की तरह बहती भाषा में ओबामा जब अपनी बात रखते हैं तो लगता है कि उनके विरोधी भी उन्हें सुनने के लिए एक पल को विरोध करना छोड़ देंगे. ओसॉफ में भी वही क्वालिटी है. वह भी एक शानदार स्पीकर हैं. प्रगतिशील और मध्यमार्गी दोनों तरह के विचारों को साथ रखते हैं. अमेरिकी राजनीति के ऐसे दौर में जब ज्यादातर नेता उम्रदराज हैं, ओसॉफ युवाओं में एक मजबूत विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे 2009 में 47 साल के बराक ओबामा को 62 साल के जॉर्ज डब्ल्यू बुश के खिलाफ लड़ते हुए अमेरिका के लोगों मे देखा था.
ओसॉफ भी ओबामा की तरह शर्ट की आस्तीनें चढ़ाकर लोगों को संबोधित करते हैं. उनका ये अंदाज देखते ही लोगों को युवा ओबामा याद आ जाते हैं. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में अमेरिकी पत्रकार एजरा क्लेन के न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे लेख का जिक्र है. इसमें एजरा ने भी तस्दीक की है, ‘ओसॉफ के बोलने और खुद को पेश करने के अंदाज में एक ऐसा सीनैरियो है, जो बराक ओबामा की याद दिलाती है.’
अमेरिकी वोटर भी यही बात कहते हैं. जॉर्जिया के एक वोटर पैट्रिक गार्वर का कहना है कि ओसॉफ को देखकर उन्हें वैसा ही एहसास होता है, जैसा 20 साल पहले ओबामा को देखकर हुआ था. खुद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मिडटर्म इलेक्शन से पहले एक रैली में ओसॉफ की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि यहां सिर्फ एक ही समझदारी भरा विकल्प है और वह हैं जॉन ओसॉफ. उन्होंने आगे कहा,
इसकी वजह ये है कि उन्होंने अपने और मेरे गुरु महान नेताओं में से एक जॉन लुईस से सीखा है कि अच्छे मकसद के लिए सत्ता को चुनौती देने का क्या मतलब होता है.
जॉन लुईस वही शख्स हैं, जिनकी वजह से ओसॉफ पॉलिटिक्स में हैं.
17 साल की उम्र में ओसॉफ ने नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता और जॉर्जिया से सांसद रहे जॉन लुईस की बायोग्राफी पढ़ी. वो इससे इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत लुईस को चिट्ठी लिख डाली. उनके साथ काम करने का मौका मांगा. लुईस ने भी जवाब दिया और प्रस्ताव रखा कि वो इंटर्नशिप के लिए उनके पास आ जाएं. इसके बाद लुईस और ओसॉफ के बीच करीबी रिश्ता बन गया. लुईस ओसॉफ के पॉलिटिकल गुरू बन गए.
दिलचस्प बात ये है कि बराक ओबामा की राजनीतिक विरासत को आकार देने में भी जॉन लुईस की अहम भूमिका रही थी. साल 1960 के दशक में नागरिक अधिकारों के लिए लुईस के नेतृत्व में चले आंदोलन ने युवा ओबामा को भी प्रेरित किया था. इसी से उन्हें कम्युनिटी ऑर्गनाइजर यानी समुदाय के बीच रहकर लोगों को संगठित करने का काम करने की प्रेरणा मिली. इसके बाद की कहानी तो सबको पता है. ओबामा अमेरिकी इतिहास के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने और बिना किसी बाधा के अपने दोनों कार्यकाल पूरे किए.

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कौन हैं ओसॉफ?थॉमस जोनाथन ओसॉफ 16 फरवरी 1987 को अटलांटा में पैदा हुए. लेकिन उनके पिता के परिवार की जड़ें रूस और लिथुआनिया में है. मां ऑस्ट्रेलिया से हैं. यहूदी परिवार से आने वाले ओसॉफ के परिवार का अतीत काफी दर्दनाक रहा है. उनके दादा-दादी यहूदी विरोधी नरसंहार से जान बचाकर भागे थे. उनके कई ऐसे रिश्तेदार हैं जो नाजी जर्मनी के होलोकॉस्ट से बचकर निकले थे, जिसमें यहूदियों का सामूहिक नरसंहार किया गया था. ऐसी कहानियों के बीच ओसॉफ का बचपन बीता.
ओसॉफ ने 2009 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री हासिल की. खोजी पत्रकारिता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने में भी ओसॉफ ने हाथ आजमाया. 2017 में उन्होंने पॉलिटिक्स में एंट्री ली लेकिन ये कोई ‘हिरोइक’ एंट्री नहीं थी. ओसॉफ अपना पहला चुनाव हार गए. जॉर्जिया के छठे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में हुए उपचुनाव में ओसॉफ को रिपब्लिकन उम्मीदवार कैरेन हैंडल ने हरा दिया.
हालांकि, इस हार से उनका हौसला नहीं टूटा. 2021 में उन्होंने एक बार फिर चुनाव लड़ा और जॉर्जिया से सीनेटर चुने गए. इसके साथ ही वो अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मिलेनियल (1981 से 1996 के बीच जन्मे लोग) बने.
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