लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में रणजी मैच होना था. दिल्ली वर्सेज पंजाब. कौन सी बड़ी बात है. वहां तो आए दिन रणजी मैच होते थे...पर पर पर, तब मैदान में कोई परिंदा भी पर नहीं मारने आता था. मगर उस दिन तो भाईसाहब वहां लौंडे बरस पड़े थे. मैदान के अंदर घुसने को मार हो रही थी. वो इसलिए क्योंकि लौंडों तक खबर पहुंच गई थी कि सहवाग आ रहा है. बॉलरों को भूत बना देने वाला वीरेंद्र सहवाग. खबर जंगल में आग की तरफ फैल गई. बगल में पड़ने वाली लखनऊ यूनिवर्सिटी में अघोषित छुट्टी जैसा माहौल हो गया. मल्लब यूनिवर्सिटी खाली, मैदान फुल. सहवाग की एक झलक पाने को लड़के पगलाए जा रहे थे. फिर सहवाग खेलने आया. मार छक्का-चउवा फिफ्टी जड़ दी. लौंडे और पगला गए. फिर जब लंच के दौरान सहवाग पवेलियन की तरफ लौट रहा था तो लड़के गला फाड़कर सहवाग-सहवाग चिल्ला रहे थे. सहवाग ने भी फिर गजब कर दिया. अपनी टीशर्ट उतारी और दर्शकों की तरफ उछाल दी. भाईसाहब फिर जो लौंडों ने उस टीशर्ट को नोचा है कि क्या बताएं. जिसके हाथ उस टीशर्ट का एक टुकड़ा आ गया था वो अपने आपको शक्तिमान ही समझ रहा था. लड़कों ने टीशर्ट के उस टुकड़े को कई साल तक अपनी पर्स पर संभालकर रखा.ऐसी है अपने देश में क्रिकेट की दीवानगी. खैर आपको बताने की जरूरत नहीं है. आप सब तो जानते ही हैं. पर उसके अलावा बाकि खेलों की नैया राम भरोसे रहती है. ऐसा ही एक खेल है जिसको क्रिकेट जैसी दीवानगी की जरूरत है, पर लोग है कि मानते नहीं. इंट्रेस्ट है भी तो वो कुछ राज्यों के कुछ इलाकों तक सीमित है. बाकि जगह कुछ कूल डूड मिल जाएंगे जो कुछ यूरोपियन क्लबों का नाम बताकर भौकाल झाड़ देते हैं. पर अपने देश के चार खिलाड़ियों के नाम पूछ दो तो कंफ्यूज हो जाएंगे. बात फुटबॉल की कर रहे हैं. फुटबॉल को इसी हालत से निकालने के लिए भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील क्षेत्री ने एक अपील जारी की है. उन्होंने 1 जून से मुंबई के फुटबॉल एरीना में शुरू हुए इंटरकांटिनेंटल कप में लोगों से आने की अपील की है. कहा कि - जो भी लोग जो हमारा मैच देखने आए, उनको धन्यवाद. पर मैं उन लोगों से अपील करता हूं कि हमारे मैच देखने आएं, जो फुटबॉल के फैन नहीं हैं. क्योंकि फुटबॉल न सिर्फ बेस्ट गेम है बल्कि हम अपने देश के लिए खेलते हैं. मेरा आपसे वादा है कि आप एक बार आएंगे तो वापस बदलकर जाएंगे. सुनें और क्या बोले क्षेत्री -
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