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वो घातक गेंदबाज़ जिसने 10 की उम्र में यॉर्कर से बैट्समैन का पैर तोड़ दिया था

19 मई को सिद्धार्थ कौल का जन्मदिन होता है.

आईपीएल-2018 में एक लड़का खूब चमका. 17 मैचों में 21 विकेट. पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला दूसरा फास्ट बॉलर. सनराइजर्स हैदराबाद इस बार के फाइनल में पहुंची तो इसमें टीम के चार बॉलर्स का जोरदार रोल था. भुवनेश्वर कुमार, संदीप शर्मा और राशिद खान के अलावा ये चौथे बॉलर थे चंडीगढ़ के सिद्धार्थ कौल. उनकी परफॉर्मेंस 10 साल से घरेलू क्रिकेट में कमाल की रही है. सिद्धार्थ को अब 3 जुलाई से शुरू हो रहे इंग्लैंड टूर पर तीन टी-20 औऱ तीन वनडे मैचों की सीरीज में भी चुन लिया गया है.

ये दूसरा मौका है जब उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया गया है. दिसंबर 2017 में जब श्रीलंका के खिलाफ 3 वनडे की सीरीज हुई थी, उसमें भी कौल को टीम इंडिया की टिकट मिली थी. मगर यहां हुए तीन मैचों में उन्हें खेलने का मौका ही नहीं मिला. इसलिए कौल की डेब्यू के लिए नजर अब इंग्लैंड टूर पर है. आईपीएल की अच्छी परफॉर्मेंस उनके साथ है.

इस सीरीज से पहले दी लल्लनटॉप ने सिद्धार्थ कौल से बात कीः

चंडीगढ़ के वो ग्राउंड जहां से नन्हे सिद्धू की शुरुआत हुई. दूसरी फोटो में वो मां संध्या और भाई उदय के साथ दिख रहे हैं.
चंडीगढ़ के वो ग्राउंड जहां से नन्हे सिद्धू की शुरुआत हुई. दूसरी फोटो में वो मां संध्या और भाई उदय के साथ दिख रहे हैं.

Q. अपने बचपन के बारे में बताएं. क्रिकेट कैसे शुरू किया?
हम चंडीगढ़ के सेक्टर-46 में रहते थे. मोहल्ले में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने में खूब मजा आता था. चौथी क्लास में था तभी से खेलना शुरू कर दिया था. दोस्त आवाज लगाते थे – ‘सिद्धू चल’ और मैं बैट-बॉल लेकर पहुंच जाता था. एक बार चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्टेडियम में अंडर-12 के लिए ट्रायल्स देने गया था. वहां यॉर्कर मार कर एक बैट्समेन का पैर तोड़ दिया था. इसके बाद सब बच्चों ने मिलकर कोच से कहा कि सिद्धार्थ बहुत तेज बॉलिंग करता है और हम उसके सामने नहीं खेलेंगे. ये देख कोच ने अंडर-16 टीम में शामिल कर लिया.

ये वो दौर था जब मेरे दिमाग पर शोएब अख्तर छाए हुए थे. एकदम उसी स्टाइल में भागता था और अख्तर को ही कॉपी करता था. इस चक्कर में मैंने अपना बॉलिंग एक्शन भी खराब कर लिया था. मैंने कभी भी बैट्समेन बनने का इसलिए नहीं सोचा क्योंकि बॉलरों का फील्ड पर अग्रेशन देखकर मुझे गजब की फीलिंग आती थी. गली में खेलते हुए भी मैं खुद को शोएब अख्तर से कम नहीं मानता था. बस इसी पैशन और जुनून से लगा रहा और मौके मिलते रहे.

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अपने भाई उदय, मां संध्या और पिता तेज कौल के साथ सिद्धार्थ (दाएं).

28 साल के सिद्धार्थ कौल के बड़े भाई उदय कौल भी पंजाब के लिए रणजी खेलते हैं. वो पंजाब टीम के विकेट कीपर हैं. पिता तेज कौल ने 1975-76 में जम्मू कश्मीर के लिए बतौर विकेट कीपर रणजी क्रिकेट खेला था. बाद में वो फीज़ियोथैरेपिस्ट बन गए और स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में बतौर कोच काम करने लगे. सिद्धार्थ और उदय की मां संध्या भी SAI में जिम्नास्टिक की कोच हैं. इसी स्पोर्ट्स कल्चर का फायदा दोनों बेटों को अपने करियर में मिला.


Q.  वो कौन सी घटना थी, जब आप क्रिकेट खेलने को लेकर सीरियस हुए?
हर किसी की लाइफ में वो एक मौका ज़रूर आता है जब कन्फ्यूजन सामने आता है. मेरी लाइफ में वो मौका तब आया जब मैं चंडीगढ़ में सेक्टर-35 के गवर्नमेंट मॉडल स्कूल में पढ़ता था और अंडर-17 टीम में था. हमारी टीम विजयवाड़ा खेलने जा रही थी. उस वक्त मेरा सलेक्शन तो हो रहा था, मगर मेरा ध्यान क्रिकेट में नहीं लग रहा था. तब मां ने कहा कि देखो अगर क्रिकेट खेलना है तो फिर क्रिकेट ही खेलो, कुछ और मत सोचो. और अगर कुछ और करने का मन है तो क्रिकेट छोड़ दो और फिर उसमें अपना ध्यान लगाओ. कोई भी काम आधे मन से मत करो. तब मैंने मां से कहा कि बस एक साल और लूंगा, नहीं तो वापस आकर पढ़ाई करूंगा. विजयवाड़ा में हुए उस टूर्नामेंट में, मैं सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला खिलाड़ी बनकर लौटा था और तब से मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. इस दौरान जो भी दिक्कत आई मैंने उसे मेहनत करके दूर किया. कई बार मेरी औसत सी हाइट (5.7) को लेकर लोग पूछते थे कि फास्ट बॉलर कैसे बनोगे? मगर मैंने हमेशा खुद में सुधार पर ही ध्यान दिया. चीजें अपने आप आपके फेवर में आ जाती हैं.

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सिद्धार्थ ने 52 फर्स्ट क्लास मैचों में 182 विकेट लिए हैं.

Q. आपने डॉमेस्टिक क्रिकेट में 10 साल से ज़्यादा वक्त तक पसीना बहाया है, इस दौरान का कोई वाकया याद आता है जो कभी भूल नहीं सकते?
मैंने जो भी सीखा है, वो यहां ही सीखा है. 2007 में मैं लखनऊ में अंडर-19 इवेंट में चार दिन का मैच खेल रहा था. चार दिन बाद ही पंजाब रणजी मैच भी शुरू हो रहा था और मेरा नाम टीम में था. अब मैंने अपनी टीम वालों को ये बताया तो हमने मैच को तीसरे दिन तक खत्म करने का प्लान बनाया ताकि अगले दिन मेरा रणजी डेब्यू हो जाए. टीमवालों ने इतना साथ दिया कि कई बल्लेबाजों ने 50-50 रन मारकर पारी डिक्लेयर की और फिर टीम को ऑलआउट करके तीसरे दिन ही मैच खत्म किया. उसी शाम मैंने दिल्ली के लिए फ्लाइट ली और रात को दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए टैक्सी ली. सुबह 4 बजे घर पहुंचा और दो घंटे सोकर सवेरे-सवेरे ही पीसीए मोहाली पहुंच गया. पंजाब ने टॉस जीतकर बॉलिंग ली और गेंद मेरे हाथ में थी. पहली ही पारी में चार विकेट मिल गए. ये डेब्यू इसलिए भी स्पेशल रहा क्योंकि विकेट के पीछे मेरा भाई उदय था जिसने कैच लपका था. ये पंजाब के लिए एक यादगार शुरुआत थी.

Q.  2008 में विराट कोहली की कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम में आप थे. टीम में सलेक्शन की क्या याद है?
पंजाब के लिए रणजी खेलते हुए यही सोच रहती थी कि अपनी टीम को जिताना है. उस दौरान हमारा मैच बड़ौदा के साथ चल रहा था जिसमें हम हार गए थे. हमारी टीम इसका दुख मना रही थी. इतने में कोच मुनीष बाली आए और कहा कि हमारे तीन लड़के अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में सलेक्ट हो गए हैं. उन्होंने दो नाम लिए और तीसरा नाम मेरा था. सुनकर मैं रोने लगा. तब मेरे पास फोन नहीं होता था. मैंने लैंडलाइन से मां को फोन लगाया और तब पहली बार लगा कि पंजाब के बाहर भी दुनिया है. फिर मलेशिया के कुआलालम्पुर में हम खेलने गए. और जब वर्ल्ड कप जीतकर लौटे तो मैंने वहां 10 विकेट लिए थे.

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अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान एक मैच में कौल को गोदी में उठाए विराट कोहली. पीछे नज़र आ रहे हैं रविंद्र जडेजा.

Q. अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भी टीम इंडिया का रास्ता आपके लिए क्यों नहीं खुला?
खुद पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है. क्रिकेट में ही नहीं, लाइफ के हर मोड़ पर. मां-बाप ने यही सिखाया है कि अपना काम करते रहो, यही अपने हाथ में होता है. वापस आकर डॉमेस्टिक क्रिकेट में रम गया. मगर इससे पहले कि कुछ और होता, इंजरी परेशान करने लगी. 2007 से 2012 तक केवल 6 डॉमेस्टिक मैच खेल पाया था. मगर 2012 के बाद फिर फॉर्म में आया. 2012-13 के रणजी सीजन में पंजाब के लिए खेलते हुए मैंने 13 मैचों में 38 विकेट लिए. इसके बाद इन 10 साल की ही मेहनत है कि मैं आज 2018 में टीम इंडिया (इंग्लैंड टूर) के लिए चुना गया हूं. इस दौरान हर तरह की सिचुएशन में खेल चुका हूं. स्लो विकेट हो या ग्रीन टॉप, फ्लैट ट्रैक हो या बाउंसी, सब पर बॉलिंग करने का एक्सपीरियंस हो गया है. मुझे लगता है यही इंटरनेशनल लेवल पर काम आता है.


सिद्धार्थ को फॉर्म और फिटनेस का फायदा आईपीएल से बुलावे के रूप में मिला. डेल्ही डेयरडेविल्स ने 2013 में सिद्धार्थ को पहली बार खरीदा. दो सीजन तक इस टीम के साथ रहे मगर ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला. दो साल फिर रणजी में पसीना बहाया और फिर 2017 से सनराइजर्स हैदराबाद ने खरीद लिया. पिछले सीजन सिद्धार्थ ने 10 मैचों में 16 विकेट लिए थे और इसका फायदा ये हुआ कि इस सीजन के लिए हैदराबाद ने सिद्धार्थ को 3.8 करोड़ रुपए में खरीदा. इस सीजन सबसे किफायती गेंदबाजी करने में सिद्धार्थ टॉप-5 में हैं.


चेन्नई के खिलाफ क्वालिफायर में अंबती रायडू को जीरो पर बोल्ड मारा था, ये सिद्धार्थ की सबसे यादगार विकेट है.

Q. IPL-2018 में आपकी बॉलिंग में इतने वैरिएशन की क्या कहानी है?
आज क्रिकेट में स्किलफुल होना बहुत जरूरी है. बैट्समेन आए दिन नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं. उसी के हिसाब से अपनी बॉलिंग पर भी काम करना पड़ता है. अपनी बॉलिंग पर कई साल से मेहनत कर रहा हूं. जिस ‘नकल बॉल’ (Knuckle Ball) की बात आज होती है वो मैंने जहीर खान से 2011 में सीखी थी. तब से प्रैक्टिस करते-करते अब जाकर अच्छे से डिलीवर कर पा रहा हूं. वैसे ही स्लो बॉल और यॉर्कर पर भी काफी काम किया है.

Q. हैदराबाद की सक्सेस में भुवी-कौल-संदीप की तिकड़ी की क्या प्लानिंग थी?
भुवी के साथ मेरा पुराना रिश्ता है. कई ऐज-ग्रुप्स में हम लोग साथ खेले हैं. मैं उसकी हर चीज ऑब्जर्व करता हूं. बॉलिंग से लेकर रिएक्शन तक. शानदार बॉलर है और गजब का इंसान भी. भुवनेश्वर से बहुत कुछ सीखने को मिलता है. खूब बातें करते हैं हम लोग. दूसरी बात ये भी है कि संदीप शर्मा को भी कई साल से जानता हूं. पंजाब में हम लोग लंबे वक्त से साथ खेल रहे हैं. इसलिए सनराइजर्स हैदराबाद में हमारी ट्यूनिंग अच्छी बैठती है. नेट्स में एक-दूसरे से काफी सलाह लेते हैं और फिर प्लान करके गेंद फेंकते हैं. इसी से बॉलिंग में वैरिएशन आती है.

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सनराइजर्स हैदराबाद के बॉलिंग अटैक – भुवी और राशिद ख़ान के साथ सिद्धार्थ.

Q. राशिद खान इन दिनों बहुत चर्चा में हैं, सनराइजर्स के लिए खेलते हुए आपने कितना जाना है इस अफगानी प्लेयर को?
बहुत अच्छा प्लेयर है. मुझे तो लगता है आने वाले 10 साल राशिद खान के हैं. उस बंदे की बॉलिंग में बहुत वैरिएशन है. उसकी खासियत है कि जब भी बल्लेबाज उस पर आक्रामक होगा, वो विकेट निकाल लेगा. उसमें वर्ल्ड क्लास क्रिकेटर के गुण हैं. आईपीएल की खास बात यही है कि अफगानिस्तान और नेपाल के क्रिकेटर्स भी हमारे साथ खेल रहे हैं और अपना टैलेंट शेयर कर रहे हैं, यहां से भी सीख कर जा रहे हैं.

Q. IPL-2018 फाइनल में मामला कैसे गड़बड़ा गया, क्या चल रहा था ड्रेसिंग रूम में?
हमारी पूरी तैयारी थी. बस टीम ने जो प्लान किया था, हम लोग उसे ग्राउंड पर एग्जिक्यूट नहीं कर पाए. वो दिन शेन वॉटसन का था और उसने अपने आगे किसी को टिकने ही नहीं दिया. इस सीजन में हमारी सबसे बड़ी सक्सेस इसी में है कि हमारी बॉलिंग यूनिट ने अच्छा किया है. पर्सनली मेरे लिए भी ये सीजन बेहद खास रहा है. बहुत सी चीजें सीखने को मिलीं जो आगे करियर में काम आएंगी. अंबती रायडू को पहले क्वालिफायर में जीरो पर आउट करना हमेशा यादगार रहेगा.

SL Series
जब सिद्धार्थ से पूछा गया कि टीम इंडिया में सलेक्शन क्यों लेट हुआ तो उनका कहना था – “मैं अपना काम कर रहा हूं, सलेक्टर्स अपना करेंगे.”

Q. आप इंग्लैंड सीरीज पर जा रहे हैं, क्या हम उम्मीद करें कि आपको वहां डेब्यू करने का मौका मिलेगा?
बिल्कुल. मैं इंग्लैंड टूर के लिए पूरी तरह तैयार हूं. 3 जुलाई से 17 जुलाई 2018 के बीच हम लोग तीन टी-20 और तीन वनडे मैच खेलेंगे. मुझे भरोसा है कि मैं अपने रणजी के एक्सपीरियंस और आईपीएल की फॉर्म को इंग्लैंड में जारी रखूंगा. 15 जून को फिटनेस टेस्ट के लिए जाना है, उससे पहले नेट्स में तैयारी करूंगा. हरभजन सिंह और आशीष नेहरा से लगातार बात करता हूं और उनकी टिप्स पर काम भी करता हूं.

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