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ट्रंप ने ठुकराया नया ऑफर, बोले- 'ईरान सूअर की तरह छटपटा रहा', अभी नहीं खुलेगा होर्मुज!

Trump stuffed pig Iran: एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप बोले ‘नाकेबंदी, बमबारी से ज्यादा असरदार है. ईरान किसी सूअर की तरह छटपटा रहा है.' ये बात उन्होंने ईरान के तीन पॉइंट वाले प्रपोज़ल को ठुकराते हुए कही. ईरान ने भी जवाब दिया कि अगर ब्लॉकेड नहीं हटा तो अंजाम बुरा होगा.

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ट्रंप होर्मुज में ब्लॉकेड हटाने को तैयार नहीं हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)

अमेरिका के प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रपोजल को ठुकरा दिया है. उनका कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लाकेड, किसी भी मिलिट्री एक्शन से ज्यादा असरदार है. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ईरान के लिए जिन आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है, उस पर नई बहस छिड़ गई है. ट्रंप ने कहा-  ‘नाकेबंदी, बमबारी से ज्यादा असरदार है. ईरान किसी सूअर की तरह छटपटा रहा है. अभी उसकी हालत और ज्यादा खराब होगी. उसके पास परमाणु हथियार बिलकुल नहीं होने चाहिए.’

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ट्रंप का कहना है कि ईरान समझौता करना चाहता है. लेकिन उसकी शर्त है कि उसपर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं. ट्रंप का तर्क है कि अगर उन्होंने सैंक्शन हटा दिए तो ईरान परमाणु हथियार बनाने की प्रक्रिया फिर से शुरू कर देगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान ईरान के प्रपोजल को ठुकराते हुए दिया है. ईरान का प्रस्ताव था कि नेवल ब्लॉकेड हटाया जाए, मिडल ईस्ट में जंग खत्म हो और न्यूक्लियर एनरिच्मेंट की बातचीत फिलहाल के लिए टाल दी जाए. इसके बदले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की बात कही थी.

प्रेसिडेंट ट्रंप ने दावा किया है कि नाकेबंदी की वजह से ईरान तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पा रहा है. जिससे वहां के ऑयल स्टोरेज और पाइपलाइन अब फटने की कगार पर हैं. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, CENTCOM ने ईरान पर एक छोटे लेकिन पावरफुल हमले की प्लानिंग की है. इस स्ट्राइक में इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया जाएगा, ताकि ईरानी रिजीम को बाई फ़ोर्स टेबल पर लाया जा सके.

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प्रेसिडेंट ट्रंप ने ‘NO MORE MR. NICE GUY' कैप्शन के साथ एक AI फोटो पोस्ट किया है. एक्शन हीरो फिल्म के माफिक ट्रंप बंदूक थामे कह रहे हैं ‘नॉन न्यूक्लियर डील कैसे साइन करना है? ये ईरान को पता नहीं है.’ 

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ट्रंप का  बंदूक थामे पोस्ट. 
ईरान ने क्या कहा?

प्रेस टीवी को एक सीनियर सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ‘अमेरिका की इस नाकेबंदी का ऐसा प्रैक्टिकल जवाब मिलेगा. जो कभी सोचा भी नहीं गया होगा. ईरान आर्म्ड फोर्स ने बातचीत से हल निकालने का मौका दिया था पर धैर्य की भी एक सीमा होती है. अगर नाकेबंदी जारी रहती है तो इसका जवाब देना जरूरी है.’

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का असर अब साफ दिखने लगा है और ये सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं है. आर्थिक दबाव की वजह से ईरान की करेंसी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गई है. 29 अप्रैल को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 18 लाख रियाल तक पहुंच गई. कच्चे तेल की कीमत 120 डालर प्रति बैरल है. इसमें नुकसान सिर्फ ईरान का नहीं है. पेंटागन के मुताबिक, इस में जंग में अमेरिका के अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. 

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वीडियो: ट्रंप ने भारत को Hell-Hole कहा, भारत से पहले ईरान ने ही सुना दिया

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