कॉमेडियन वीर दास अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी के कैनेडी सेंटर में अपनी कविता 'टू इंडियाज़' सुनाने के बाद से सुर्खियों में बने हुए हैं. जनता का एक धड़ा जहां उनकी कविता के लिए उनकी तारीफ़ के पुल बांध रहा है, वहीं दूसरा तबका उन्हें विदेशी ज़मीन में देश को अपमानित करने का दोषी ठहरा रहा है. इस उबलती कॉन्ट्रोवर्सी के बीच अब वीर दास ने अपना पक्ष सामने रखा है. इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत में वीर दास ने साफ़ कर दिया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है. उनका काम लोगों को हंसाना है और वो ये काम करते रहेंगे. वीर दास बोले,
मैं यहां अपना काम करने के लिए हूं. और वो मैं करता रहूंगा. मैं नहीं रुकूंगा. मेरा काम है लोगों को हंसाना और अगर आप को मेरे जोक्स फ़नी नहीं लगते, तो आप मत हंसें.
ये पहली बार नहीं है जब वीर दास का नाम विवाद से जुड़ा है. अपने करियर के शुरुआत से ही वीर अपने बयानों और चुटकलों के चलते विवादों में घिरते आए हैं. विवादित 'टू इंडीयाज़' कविता लिखने का ख्याल उन्हें कहां से आया ये सवाल पूछे जाने पर वीर ने कहा,
"मैं तो बस शो कर रहा था. शो फुल था. वो मेरी ऑडियंस थी तो मैंने कविता लिख दी. वहां आप किसी तरीके की बातचीत करने की उम्मीद नहीं करते हो. आप तो बस लोगों को हंसाने की उम्मीद करते हो."
उनकी कविता उन्हें नेशनल न्यूज़ चैनल की प्राइम टाइम डिबेट का टॉपिक बना देगी, ऐसी उम्मीद तो शायद वीर ने भी नहीं की होगी. आज के वक़्त में बढ़ती सेंसरशिप के बारे में बात करते हुए वीर ने कहा,
"मैं इस मामले में भाग्यशाली रहा हूं कि मुझे इसका अनुभव नहीं करना पड़ा है. मैंने नेटफ्लिक्स के साथ तीन कॉमेडी स्पेशल किए हैं और तीनों बार जो हमारी बात हुई वो ये थी कि उन्होंने कहा 'जाओ लोगों को हंसाओ', मैंने कहा 'ठीक है'."
वीर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि उन्हें लगता है देश में और भी कॉमेडी क्लब्स खुलने चाहिए प्यार. और खुशहाली बढ़ाने के लिए.
# एम्मी अवॉर्ड्स के लिए हुए नॉमिनेट
वीर दास का नेटफ्लिक्स शो 'वीर दास: फ़ॉर इंडिया' को 49वें एम्मी अवॉर्ड्स के लिए कॉमेडी सेक्शन में नॉमिनेट किया गया है. इस कैटेगरी में वीर के शो के अलावा फ्रांस का कॉमेडी शो 'कॉल माय एजेंट', यूके का शो 'क्रिसमस मदरलैंड' और कोलंबियन सीरीज़ 'प्रॉमिसस डी कैम्पाना' भी शामिल हैं.