कहानी पूरी फिल्मी है

जिस रात सुशीला ने घर छोड़ा, डॉ भारती उसे अपनी गाड़ी में ले गईं. उस दौरान वो उनकी गोद में सो गई.
पूरी कहानी फिल्मी है. लड़की का नाम है सुशीला, जो बाड़मेर जिले के पचपदरा तहसील के भांडियावास गांव की है. 2010 में सुशीला की शादी जोधपुर जिले के बिसलपुर गांव में रहने वाले नरेश के साथ कर दी गई. 12 साल की बच्ची को पता भी नहीं था कि शादी क्या होती है. उसे लगा कि कोई रस्म है. शादी हुई और वो अपने घर में ही आगे की पढ़ाई-लिखाई करने लगी. 2016 में एक दिन उसे पता चला कि उसकी शादी हो गई है और अब उसे गौना करवाकर अपने पति के घर जाना है. सुशीला अड़ गई और शादी कैंसिल करने की ज़िद करने लगी. घर वाले नहीं माने तो 27 अप्रैल 2016 को उसने घर छोड़ दिया. सुशीला की मदद सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. भारती ने की. घर छोड़ने के बाद रात में ही बाड़मेर हाइवे से डॉ. भारती ने सुशीला को रेस्क्यू किया और बाड़मेर बाल कल्याण समिति के सामने पेशकर उसकी कस्टडी ले ली.
कोर्ट ने कैंसिल की शादी

सुशीला (बाएं) अभी 12वीं की पढ़ाई कर रही है.
सुशीला ने डॉ. भारती के साथ पारिवारिक न्यायालय संख्या एक में शादी को निरस्त करने के लिए अर्जी दी. कोर्ट में सुशीला के पति नरेश ने माना कि सगाई हुई है, शादी नहीं. इससे कोर्ट के सामने भी चैलेंज खड़ा हो गया. फिर शुरू हुआ सुबूत जुटाने का सिलसिला. डॉ. भारती और सुशीला ने नरेश की फेसबुक आईडी को खंगाला. वहां उन्हें शादी के दौरान लिए हुए फोटो मिल गए. कुछ लोग भी गवाही के लिए तैयार हो गए. कोर्ट के सामने उम्र का भी सुबूत पेश किया गया. सारी चीजों को देखने के बाद कोर्ट ने इसे बाल विवाह मानते हुए नौ अक्टूबर को शादी निरस्त करने का फैसला सुनाया.
गवाही के लिए राजी नहीं हो रहे थे लोग

कोर्ट ने जब शादी कैंसिल करने का आदेश दिया तो सुशीला को अपनी मंजिल नज़र आने लगी.
डॉ भारती ने बातचीत में बताया कि सुशीला का केस उनके लिए बेहद मुश्किल था. सुशीला का पिता हत्या के आरोप में जेल की सजा काट चुका था. वो जमानत पर जेल के बाहर था. इसके अलावा उस पर और भी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप समय-समय पर लगते रहे थे. इस वजह से इलाके में लोग उससे डरते थे. इसके अलावा सुशीला के पिता ने शादी में फोटो खींचने से भी मना किया था, जिससे मुश्किलें और भी बढ़ गई थीं. बाद में फेसबुक की मदद से जब सुबूत जुटाए गए तो कुछ लोग भी गवाही देने के लिए राजी हो गए.
तलाक के लिए ज़ोर देते हैं वकील

सांकेतिक तस्वीर
डॉ भारती बताती हैं कि उनकी संस्था अब तक 33 बाल विवाह को खत्म करवा चुकी है. वो बताती हैं कि बाल विवाह जैसे मामलों के निपटारे के लिए भी पारिवारिक न्यायालय का ही सहारा लेना पड़ता है. वहां पर वकील कहते हैं कि शादी खत्म करने के बजाय तलाक करवाकर दोनों को अलग कर सकते हैं लेकिन डॉ भारती कहती हैं कि बाल विवाह जब वैध ही नहीं है तो शादी वैध कैसे हो सकती है. जब शादी वैध नहीं हो सकती तो तलाक का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है. ऐसे में हमारा पूरा ज़ोर शादी कैंसिल करवाने पर ही होता है और इस मामले में भी हमें कामयाबी मिली है.
अब अपना सपना पूरा करेगी सुशीला

बाल विवाह के दंश से छूटी सुशीला ने कहा कि उसके ऊपर जो बंधन था, वो अब दूर हो गया है. अब वो फिर से एक बार पढ़ाई-लिखाई में जुटेगी और पुलिस अधिकारी बनकर समाज की सेवा करेगी. वहीं डॉ. भारती ने कहा कि सुशीला अब पढ़ाई पर ध्यान दे सकेगी. वो कोशिश कर रही हैं कि सुशीला अपने माता-पिता के घर चली जाए और आगे की पढ़ाई उन्हीं लोगों की देख-रेख में पूरी करे.
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