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यूपी : दोस्तों की सलाह पर वायग्रा की ओवरडोज ली, फिर ऑपरेशन हुआ, लेकिन एक दिक्कत हो गई!

डॉक्टरों ने उसे यह भी बताया कि वह बच्चे पैदा कर सकता है लेकिन प्राइवेट पार्ट में तनाव हमेशा के लिए बना रहेगा.

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(सांकेतिक तस्वीर, फोटो- Pixabay)

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में वायग्रा (Viagra) की ओवरडोज के कारण एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. ऑपरेशन हुआ. लेकिन ऑपरेशन के बाद भी दिक्कत पूरी तरह से दूर नहीं हुई. डॉक्टरों का कहना है कि इस दिक्कत के साथ ही अब इस व्यक्ति को पूरा जीवन बिताना पड़ेगा.  

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आजतक के रिपोर्टर पंकज श्रीवास्तव की खबर के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले व्यक्ति की शादी हुई थी. शादी के बाद दोस्तों ने उसे सेक्स क्षमता बढ़ाने के लिए वायग्रा लेने की सलाह दी. इसी पर उसने 25-30 मिलीग्राम डोज लेना शुरू किया. हालांकि जब उसे इसका फायदा नहीं हुआ तो उसने 200 मिलीग्राम डोज की दवा लेनी शुरू कर दी. इसके बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, वायग्रा की ओवरडोज के कारण 28 वर्षीय युवक के पेनिस में तनाव शुरू हो गया. कई दिनों तक वह इस परेशानी से जूझता रहा. 20 दिन बाद भी उसकी हालत सही नहीं हुई तो पत्नी मायके चली गई. हालांकि युवक के परिवारवालों ने जब अनुरोध किया तो वो वापस लौटी. हालांकि पति को अस्पताल में भर्ती करवाकर वो दोबारा मायके लौट गई.

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प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उस युवक की पेनाइल प्रोस्थेसिस सर्जरी की तो उसकी स्थिति ठीक हुई. डॉक्टरों ने उसे यह भी बताया कि वह बच्चे पैदा कर सकता है लेकिन छोटी सी दिक्कत ये है कि व्यक्ति के प्राइवेट पार्ट में तनाव हमेशा के लिए बना रहेगा. खबरों में ये भी बताया गया है कि व्यक्ति को हमेशा टाइट कपड़े पहनने की सलाह भी दी गई है.  हालांकि डॉक्टरों ने कहा कि कुछ दिनों बाद उसे शारीरिक संबंध बनाने में कोई समस्या नहीं होगी.

'संबंध बनाने की क्षमता खत्म हो गई' 

अस्पताल ने यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ दिलीप चौरसिया ने आजतक को बताया कि युवक ने दो महीने पहले भी उनसे संपर्क किया था. उन्होंने बताया, 

"वायग्रा का इस्तेमाल वो पहले से करता था और शादी के बाद उसने डोज बढ़ा दी. साइड इफेक्ट यह हुआ कि उसकी संबंध बनाने की क्षमता खत्म हो गई और इजेकुलेशन बंद हो गया. ऑपरेशन के दौरान उसके प्राइवेट पार्ट में पेनाइल प्रोस्थेसिस प्रत्यारोपित किया गया, जिसकी कीमत 35 हजार रुपये है. मरीज की हालत ठीक है और एक हफ्ते बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है."

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वायग्रा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए. क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि वायग्रा की ओवरडोज से समस्या सामने आई हो. दवा के ओवरडोज से गंभीर दिक्कतें भी हो सकती हैं. कई लोग दूसरी बीमारियों से ग्रसित होते हैं इसलिए उन्हें वायग्रा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए.

क्या है वायग्रा?

वायग्रा का असली नाम सिल्डेनाफिल साइट्रेट है. 1990 के दशक में अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर (Pfizer) के रिसर्चर्स दिल की बीमारी ‛एंजाइना’ के इलाज के लिए एक नई दवा 'सिल्डेनाफिल' पर एक्सपेरिमेंट कर रहे थे. इस दवा से छाती के दर्द को कम करने में तो कोई मदद नहीं मिली, लेकिन इससे पुरुषों में साइड इफेक्ट देखा गया. दवा खाने बाद कई पुरुषों ने पेनाइल इरेक्शन की शिकायत की. रिसर्चर्स ने इस साइड इफेक्ट को स्टडी किया जिसके बाद सामने आया ‛वायग्रा’. इसे ‘ब्लू पिल’ भी कहा जाता है.

पुरुषों से मिले फीडबैक पर फाइजर ने काम किया और 1998 में ये दवा दुनिया के सामने आई. इसकी मदद से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद मिलती है. इससे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के इलाज और सेक्स के दौरान क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि यह हर सेक्स समस्या का समाधान नहीं है, इसलिए वायग्रा के इस्तेमाल से पहले अपनी दिक्कतों के बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

वीडियो: एनेस्थीसिया, वायग्रा, इंसुलिन जैसी दवाइयों की खोज के पीछे की कहानी दिलचस्प है

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