फरीदाबाद में मंझावली पुल के पास अधूरे रास्ते पर एक शख्स की गड्ढे में गिरने से मौत हो गई. मृतक की पहचान 45 वर्षीय अतुल कुमार जोशी के रूप में हुई है. बताया गया कि वो रात के समय यमुना रोड से यूपी जा रहे थे. तभी सड़क अचानक आगे खत्म हो गई और वो बाइक समेत गड्ढे में गिर गए. पूरी रात वहीं रहे. सुबह जब खेतों में जाते समय गांववालों की नजर उन पर गई, तो पुलिस को सूचना दी गई.
हरियाणा से शुरू हुई सड़क यूपी में अचानक खत्म, वहीं रात में बाइक चालक की गिरकर मौत
Faridabad bike accident: अतुल कुमार जोशी फरीदाबाद के NIT-I इलाके के रहने वाले थे. वो नोएडा के एक प्राइवेट आई हॉस्पिटल में मैनेजर के तौर पर काम करते थे. पुलिस ने बताया कि 14 जून की रात अतुल फरीदाबाद से नोएडा जा रहे थे. तभी वो यमुना रोड पर चढ़ गए.


अतुल कुमार जोशी फरीदाबाद के NIT-I इलाके के रहने वाले थे. वो नोएडा के एक प्राइवेट आई हॉस्पिटल में मैनेजर के तौर पर काम करते थे. पुलिस ने बताया कि 14 जून की रात अतुल फरीदाबाद से नोएडा जा रहे थे. तभी वो यमुना रोड पर चढ़ गए. इस सड़क का मकसद फरीदाबाद को ग्रेटर नोएडा से जोड़ना है. लेकिन इसका काम अभी पूरा नहीं हुआ है.
तिगांव पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर इंस्पेक्टर रणबीर सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा कि रात के अंधेरे में शायद मृतक को पता नहीं चला कि पक्की सड़क खत्म हो गई है. उन्होंने कहा,
"वो अपनी मोटरसाइकिल समेत सीधे एक गड्ढे में गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं. सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे ग्रामीणों ने गड्ढे में गिरी मोटरसाइकिल और जोशी को देखा और फरीदाबाद के तिगांव पुलिस स्टेशन को सूचना दी. वहां पहुंचने पर हमें पता चला कि दुर्घटना उत्तर प्रदेश में हुई थी. क्योंकि जोशी हरियाणा सीमा से 45-50 मीटर दूर थे."
गौतमबुद्ध नगर स्थित दनकौर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर मनोज सिंह ने कहा,
सबूतों से पता चला है कि गिरने के बाद भी जोशी कुछ समय तक जीवित थे. उनका हेलमेट टूट गया था. सिर में चोट लगी थी. वो सहारे से गड्ढे में बैठने के लिए उठे भी थे, लेकिन अंदरूनी चोटों, खून बहने और सुनसान जगह पर समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई.
मामले पर फरीदाबाद जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि हरियाणा की तरफ से सड़क परियोजना कई साल पहले पूरी हो गई थी. लेकिन जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के कारण उत्तर प्रदेश में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है.
अधिकारी ने कहा कि चार-लेन परियोजना का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा के समय को दो घंटे तक से घटाकर 25-30 मिनट करना था.
सड़क अधूरी है तो क्या वहां कोई चेतावनी का संकेत नहीं होना चाहिए था? रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां सड़क खत्म हुई है, वहां कोई चेतावनी संकेत, सावधानी बोर्ड, रिफ्लेक्टर, बैरिकेड या स्ट्रीट लाइट नहीं लगी थी. जो सड़क अचानक उत्तर प्रदेश बॉर्डर के पार खेतों में खत्म होती है, वहां भी कोई बैरिकेड नहीं लगाया गया था.
जल्दबाजी या मैप?परिवार की लिखित शिकायत पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के तहत कार्रवाई की गई. परिवार ने किसी गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया. आगे जांच की जा रही है कि मृतक क्या किसी मैपिंग ऐप की मदद से सड़क पर चढ़े या अस्पताल पहुंचने की जल्दी में गलती से उस रास्ते पर चले गए थे.
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