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भूकंप के बाद 8 दिन मलबे में दबा रहा शख्स, उम्मीद खत्म तब आई आवाज- 'मैं जिंदा हूं'

Venezuela में एक शख्स 140 टन मलबे के नीचे आठ दिनों तक बिना खाना-पानी के जिंदा रहा. कई दिनों तक ऑपरेशन चलाकर रेस्क्यू टीम ने आखिरकार उन्हें सही-सलामत बाहर निकाला. जानिए वो कैसे मिले.

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हर्नान अल्बर्टो गिल को मलबे से बाहर निकालती रेस्क्यू टीम. (फोटो: रॉयटर्स)

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  • वेनेजुएला में 2 जुलाई को एक रेस्क्यू टीम ने 140 टन मलबे के नीचे दबे हर्नान अल्बर्टो गिल को आठ दिन बाद जीवित बाहर निकाला।
  • 24 जून को आए भूकंप ने ला गुएरा के शॉपिंग सेंटर की इमारत ढहा दी थी, जिसके कारण गिल मलबे के नीचे फंस गए थे।
  • इस सफल रेस्क्यू के बाद राहत कार्य जारी हैं और प्रभावित लोगों की खोज और मदद के लिए विभिन्न देशों की टीमें काम कर रही हैं।

वेनेजुएला में मलबे के नीचे दबा रहा शख्स आठ दिन तक भूख-प्यास और अकेलेपन से जूझता रहा, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी. आखिरकार वह जिंदा बाहर निकला. जिजीविषा की इससे बड़ी मिसाल आखिर क्या होगी. कई दिनों की त्रासदी के बाद यह रेस्क्यू उम्मीद की एक रौशनी बनकर सामने आया. जब रेस्क्यू टीम ने ‘हर्नान अल्बर्टो गिल’ को 140 टन मलबे से बाहर निकाला, तो लोगों ने तालियां बजाईं और एक-दूसरे को गले लगा लिया.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्नान अल्बर्टो गिल (43) ‘ला गुएरा’ के एक शॉपिंग सेंटर में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करते थे. 24 जून को आए भूकंप के बाद शॉपिंग सेंटर की इमारत ढह गई और गिल बेसमेंट में मलबे के नीचे फंस गए. रेस्क्यू टीम ने 28 जून को उनसे संपर्क किया और फिर 100 घंटे से ज्यादा समय के बाद गुरुवार, 2 जुलाई को उन्हें जिंदा बाहर निकाला.

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BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, कोस्टा रिका रेड क्रॉस के पैरामेडिक एलन मैड्रिगल ने ही 28 जून को सबसे पहले गिल की मदद के लिए पुकार सुनी थी. वो कह चीख रहे थे, ‘मैं जिंदा हूं’. उन्होंने बताया कि उन्हें पहले तो अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ और उन्होंने अपने एक साथी से जांच करने को कहा. मैड्रिगल ने कहा, “यह एक भावुक पल था.”

कैसे किया रेस्क्यू?

रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला, चिली, कोस्टा रिका, अल साल्वाडोर, मेक्सिको, पुर्तगाल और अमेरिका की टीमों ने मिलकर हर्नान अल्बर्टो गिल तक पहुंचने की कोशिश की. उन्होंने जो पहुंचने के लिए सुरंगें बनाई थीं, वे कई बार ढह गईं. इससे गिल और रेस्क्यू टीम दोनों की जान खतरे में पड़ गई. 

रात भर में रेस्क्यू टीम को मलबे के अंदर डाले गए एक छोटे टेलीस्कोपिक कैमरे से पहली बार यह पक्का पता चला कि गिल जिंदा है. चिली के एक फायरफाइटर ने उनसे कैमरे की तरफ मुड़ने के लिए कहा. उनकी एक आंख खून से लाल थी और उन्होंने एक मास्क पहना हुआ था, जो रेस्क्यू टीम ने उन्हें पहले ही दे दिया था ताकि धूल उनके फेफड़ों में न जाए.

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कोस्टा रिका रेड क्रॉस के एक वर्कर ने बताया कि गिल ने उनसे कहा कि उनका नाखून तक नहीं टूटा है. रेस्क्यू टीम ने उन्हें पानी पिलाया और IV ड्रिप लगाई. उधर खुदाई का काम जारी रहा. चिली की अनुभवी फायरफाइटर मारा पाज कैंपोस ने पूरे ऑपरेशन के दौरान गिल से बात की और आखिरी घंटों में शांत रहने में मदद की.

पत्नी ने क्या बताया?

हर्नान अल्बर्टो गिल की पत्नी गुसबिमार गोंजालेज ने 'द एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि उन्होंने कई दिन निराशा के बीच बिताए, फिर रेस्क्यू टीम ने उन्हें गिल के जिंदा रहने की जानकारी दी. उन्होंने कहा, 

"जब मुझे पता चला कि वे जिंदा हैं, तो मुझे अंधेरे में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी." 

इस कपल के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 8 और 10 साल है.

सफल रेस्क्यू के बाद, लाल यूनिफॉर्म पहने कोस्टा रिका रेड क्रॉस के सदस्यों ने एक-दूसरे को गले लगाया, राहत की सांस ली और तालियां बजाईं. एक फायरफाइटर ने इसे अपने करियर का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन बताया.

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24 जून को वेनुजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो भूकंप आए. तेज झटकों ने उत्तरी वेनेजुएला में हजारों इमारतों को नुकसान पहुंचाया. 2,200 से ज्यादा लोग मारे गए. 11,000 से ज्यादा लोग घायल हुए और ला गुएरा राज्य देश का सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बन गया. हजारों लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है.

वीडियो: दुनियादारी: वेनेजुएला में भूकंप ने इतनी तबाही क्यों मचाई?

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