ईरान अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रहा है. पूर्व सुप्रीम लीडर की अंतिम विदाई में लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. आने वाले 9 जुलाई को खामेनेई को ईरान के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा की दरगाह के पास ‘सुपुर्द-ए-खाक’ किया जाएगा. इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ईरान के नए सुप्रीम लीडर और अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं?
मोजतबा खामेनेई के सामने आने का वक्त आ गया है, लेकिन क्या वे आएंगे?
Iran के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं. इस बीच उनके बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei के उनके जनाजे में शामिल होने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.


इसी साल 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन फ्यूरी’ में 86 साल के अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ ईरान के कई सीनियर ऑफिसर्स की मौत हो गई थी. इस हमले में 56 साल के मोजतबा खामेनेई भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. हमले के बाद से ही मोजतबा को सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है. समय-समय पर उनके नाम का हवाला देकर कई मैसेज को ईरानी स्टेट मीडिया के एंकरों द्वारा पढ़ाया गया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम राजधानी तेहरान में 4 जुलाई से शुरू होगा और 9 जुलाई को पूरा किया जाएगा. ऐसे में ईरान के नागरिकों के साथ-साथ दुनियाभर के राजनीतिक हलकों की नजर मोजबता खामेनेई पर टिकी हैं कि क्या वो इस कार्यक्रम में नजर आएंगे या नहीं.

ईरानी सरकारी मीडिया और अधिकारियों की ओर से इस बात की पुष्टि की गई थी कि हमले में मोजतबा घायल हो गए हैं. उनके चेहरे और पैर में गंभीर चोटें हैं. अली खामेनेई की मौत के बाद ही मोजतबा ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पद संभाल लिया. हालांकि, पदभार संभालने के बाद से अब तक मोजतबा को सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है.
मार्च 2026 में मोजतबा के ‘नाम’ से पहला सार्वजनिक मैसेज आया, जिसमें खामेनेई ने ईरान के दुश्मनों पर दबाव बनाए रखने की बात कही. खासकर अमेरिका और इजरायल पर. उनके पहले मैसेज में जोर देकर कहा गया कि ईरान जंग नहीं चाहता, लेकिन अपने जायज अधिकारों को नहीं छोड़ेगा.
इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक रखने का दावा किया और चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी इलाकों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला जारी रहेगा. मोजतबा के पहले संदेश में राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया गया और ईरानी लड़ाकों का शुक्रिया अदा किया गया.
इसके बाद मोजतबा के नाम से इसी तरह के कई मैसेजेस आते रहे. लेकिन वे खुद सामने नहीं आए. इसकी वजह से ईरान समेत दुनियाभर में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं. कराज जैसे इलाकों में कुछ नागरिकों ने ‘गुमशुदा शख्स’ के पोस्टर भी लगा दिए हैं.
मोजतबा के न दिखने पर लोगों की अलग-अलग राय है. कुछ ‘कट्टरपंथी’ लोगों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से मोजतबा का सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आना सही है. जबकि, कुछ लोग घायल होने की वजह से सामने न आने की बात को सही मानते हैं.

आमतौर पर ईरान की टॉप लीडरशिप अपनी ताकत के प्रदर्शन के लिए ऐसे मौकों का इस्तेमाल करती है. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी उनके पहले के सुप्रीम लीडर रुहोल्लाह खामेनेई की मौत के बाद, उनसे जुड़े बड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिसा लिया था.
कुछ हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर मोजतबा खामेनेई ने काफी सक्रिय भूमिका निभाई है. लेकिन इस दौरान भी उनके नाम से ही लिखित बयानों को पढ़ाने का सिलसिला जारी रहा.
ईरान-अमेरिका जंग के बाद कई तरह की सर्वे रिपोर्ट्स सामने आईं. प्यू रिसर्च सेंटर की सर्वे रिपोर्ट में ईरान और अमेरिका के हालात पर चर्चा की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने मोजतबा को देश के नए सुप्रीम लीडर के तौर पर तो चुन लिया, लेकिन जनता के बीच उनकी गैर मौजदूगी ने एकजुट सत्ता दिखाने की क्षमता पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं.
कहा जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई के सामने आने का ये सबसे सही वक्त है. अगर वो अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो ईरान की अवाम के बीच अच्छा संदेश जा सकता है. देश के ‘कट्टर समर्थकों’ को एक करने में भी मदद मिल सकती है. दुश्मन देशों में भी कड़ा संदेश जाएगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो मौजूदा ईरानी सरकार की कमजोरी और एकजुटता के अभाव का संकेत जा सकता है.
वीडियो: सऊदी अरब और फ्रांस में प्लेन क्रैश, 25 लोगों की मौत

















